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अमेठी हत्याकांड: गांव पहुंची खबर तो मची चीख-पुकार, शिक्षक बनने से पहले मृतक रह चुका था सिपाही
Thu, 03 Oct 2024 11:26 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला संवाद, रायबरेली
अमर उजाला संवाद, रायबरेली
Published by: रोहित मिश्र
Updated Thu, 03 Oct 2024 11:26 PM IST
सार
Murder of family in Amethi: अमेठी में एक परिवार के चार लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। मरने वाले का पूरा परिवार रायबरेली जिले का है। जब वहां खबर पहुंची तो कोहराम मच गया।
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घटना के बाद मौजूद भारी पुलिस बल
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
रात का वक्त था। घड़ी की सुई में करीब ७.३० बजे बज रहे थे। चीख पुकार ऐसी मची कि अचानक गांव का शोरशराबा थम गया। रोने बिलखने की आवाज सुनकर पड़ोसी भी बाहर निकल आए और रोने के बारे में पूछते-पूछते स्वयं आंसू नहीं रोक पाए। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जो परिवार १५ दिन पहले गांव आया था, उसकी इतनी बेरहमी से हत्या कर दी गई है। अमेठी में एक शिक्षक और उसकी पत्नी, दो बेटियों की हत्या के बाद सुदामापुर गांव का नजारा कुछ ऐसा ही है, जहां का माहौल गमगीन होने के साथ हर कोई इस घटना से स्तब्ध है। दिवाली की खुशियों के पहले ही परिवार ऐसा गमों का पहाड़ टूटा है, जो शायद ही वह कभी भूल पाएं।
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रायबरेली जिले के गदागंज थाना क्षेत्र के सुदामापुर गांव निवासी सुनील कुमार रैदास का वर्ष २०१८ में शिक्षक के पद पर चयन हुआ था। उनकी शादी जिले के ही भदोखर थाना क्षेत्र के उतरपारा गांव की रहने वाली पूनम भारती के साथ हुई थी। शादी बाद दो बेटियां सृष्टि (५), समीक्षा (एक) हुईं। शिक्षक बनने के बाद सुनील परिवार के साथ अमेठी में ही रहते थे, जबकि समय-समय पर गांव आना जाना था। पड़ोसी सज्जन शुक्ल बताते हैं कि रात के साढ़े सात और आठ के बीच घर पर था। परिवार के लोगों से आपस में बातचीत कर रहा था। अचानक सुनील के घर के परिजनों के रोने की आवाज सुनाई पड़ी। घर से बाहर निकलकर आया तो पिता रामगोपाल, माता राजवती दहाड़े मारकर रो रही थी। पूछने पर कुछ बता नहीं पा रही थी। कुछ देर बताया कि भइया सब कुछ खत्म हो गया है। सुनील और उनके परिवार को किसी ने मार दिया। कुछ देर बाद गांव के अन्य लोगों का जमावड़ा लग गया। नाते-रिश्तेदारी के लोगों का भी घर आना जाना शुरू हो गया।
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सिर्फ परिजन ही नहीं, बल्कि पूरा गांव घटना से गमगीन था। पड़ोसी सज्जन शुक्ल बताते हैं कि सुनील उनके बहुत अच्छे दोस्त थे। अभी १५ दिन पहले घर आए थे। सबकुछ ठीकठाक था। पता नहीं यह सब कैसे हो गया। गमगीन माता-पिता की जुबां पर यही शब्द थे कि बेटवा ने कहा था कि हम अमेठी जा रहे हैं। दिवाली के त्योहार पर परिवार समेत आएंगे और मिलकर पर्व मनाएंगे। हमरे बेटवा का बुलाई दियो, एक बार देखि लई। बेटवा ठीक है। तुम लोग झूठ बोलत हो। जो बतावा जा रहा है, वह सब झूठ है।
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तीसरे नंबर का था सुनील मृतक
सुनील परिवार में तीसरे नंबर का था। सबसे बड़ी बहन सुनीता था। दूसरे नंबर पर भाई सोनू था। सुनील की हत्या से बहन सुनीता और भाई बहन में भी कोहराम मचा है। पूर्व ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि सज्जन तिवारी कहते हैं कि बेेहद अच्छा परिवार है। सुनील और उसके परिवार की घटना से स्तब्ध हूं। यकीन नहीं हो रहा कि सुनील और उनका परिवार हमारे बीच नहीं रहा।
पत्नी से रहता था सुनील का मनमुटाव
सुनील और उसकी पत्नी के बीच मनमुटाव चल रहा था। पड़ोसी बताते हैं कि मनमुटाव दंपती के बीच था, लेकिन किस बात को लेकर रहता था, इसकी जानकारी नहीं हो पाती थी। सुनील और उसका परिवार गांव आता था, लेकिन कम ही यहां पर रहता था।