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यूपी में सोसाइटी एक्ट में संशोधन लागू : दो वर्ष या उससे अधिक सजा पाया व्यक्ति नहीं होगा सोसाइटी का सदस्य

Wed, 10 Aug 2022 09:46 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 10 Aug 2022 09:46 PM IST
सार

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सोसाइटी की मुश्किलों को दूर करने के लिए समय-समय पर इस अधिनियम में राज्य स्तर पर संशोधन किए जाते रहे हैं।

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Amendment in Societies Act implemented in UP: A person sentenced to two years or more will not be a member of
यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना। - फोटो : amar ujala

विस्तार

प्रदेश में सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम-1860 में समय की मांग के अनुसार जरूरी महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। इसके तहत उप रजिस्ट्रार, सहायक रजिस्ट्रार और उप जिलाधिकारी के निर्णयों के विरुद्ध संबंधित मंडलायुक्त के यहां अपील हो सकेगी। पहले अपील के लिए हाईकोर्ट जाना पड़ता था। किसी आपराधिक मामले में दो वर्ष या उससे अधिक सजा पाया व्यक्ति सोसाइटी का सदस्य नहीं हो सकेगा। साथ ही सोसाइटी की अचल संपत्ति बिना सक्षम न्यायालय के न तो ट्रांसफर हो सकेगी और न ही इसकी बिक्री हो सकेगी।

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प्रेस कांफ्रेंस में यह जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि सोसाइटी की मुश्किलों को दूर करने के लिए समय-समय पर इस अधिनियम में राज्य स्तर पर संशोधन किए जाते रहे हैं। इसलिए सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण (उत्तर प्रदेश संशोधन) अधिनियम, 2021 के अधिनियम के कुछ प्राविधानों में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। इस अधिनियम के अधीन संस्थाओं के पंजीकरण व नवीनीकरण, सोसायटी के सदस्यों के चयन व निर्वाचन के संबंध में उप रजिस्ट्रार, सहायक रजिस्ट्रार और विहित प्राधिकारी (उपजिलाधिकारी) के निर्णयों के विरुद्ध मंडलायुक्त के यहां अपील हो सकेगी।
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सोसाइटी के सदस्यों की चयन की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए जाने के उद्देश्य से अधिनियम में यह प्रावधान किया गया है कि शासी निकाय के अनुमोदन के बाद ही साधारण सभा की सूची में कोई भी परिवर्तन हो सकेगा। संशोधन के पूर्व अधिनियम में साधारण सभा की सूची में नए सदस्यों के आने, हटाये जाने, सदस्यों की मृत्यु और त्याग पत्र देने के बाद परिवर्तन के लिए एक माह में संशोधित सूची बिना शासी निकाय के अनुमोदन के रजिस्ट्रार को दाखिल करने की व्यवस्था थी।
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अधिनियम में 1979 में धारा-5(ए) जोड़ी गई थी, जिसमें यह प्रावधान रखा गया था कि बिना सक्षम न्यायालय की पूर्व अनुमति के सोसाइटी की अचल संपत्ति के अंतरण को गैरकानूनी घोषित कर दिया जाए। यह धारा वर्ष 2009 में समाप्त कर दी गई थी।  नतीजतन, सोसाइटी की अचल संपत्तियों का ट्रांसफर तेजी से होने लगा। अब अधिनियम में 1979 में जोड़ी गई धारा5 (ए) को यथावत दुबारा स्थापित किया गया है। अब अगर सोसाइटी की अचल संपत्ति का अंतरण, दान, रेहन और विक्रय आदि सक्षम न्यायालय के पूर्व अनुमति के बिना किया जाता है तो वह विधिसम्मत नहीं होगा।


वित्त मंत्री ने बताया कि अब अगर कोई व्यक्ति आपराधिक मामले में दो वर्ष या उससे अधिक समय के लिए सजा पाया हो तो वह किसी सोसाइटी में पद धारण के अयोग्य होगा । पूर्व में सि तरह का कोई प्रावधान नहीं होने के कारण समितियों में अयोग्य व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व बढ़ता जा रहा था। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में इस अधिनियम को यूपी विधानसभा ने पास किया था, जिसे अब राष्ट्रपति के यहां से मंजूरी मिल चुकी है। अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव 18 जुलाई से प्रभावी माने जाएंगे।

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