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छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर मॉडल से यूपी में गंगा किनारे के शहरों का होगा कूड़ा प्रबंधन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 13 Oct 2018 12:25 PM IST
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गंगा नदी की ऐसी है हालत।
- फोटो : अमर उजाला
गंगा किनारे बसे 21 में 18 नगर निकाय वाले छोटे शहरों में छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर मॉडल पर ठोस कूड़ा प्रबंधन की योजना लागू की जाएगी। इसके तहत जैविक व अजैविक कूड़े को अलग-अलग निस्तारित कर आय का जरिया बनाया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने कूड़े के विकेंद्रीकरण कर निस्तारण के मुद्दे पर नगर विकास विभाग व नमामि गंगे परियोजना की राज्य मिशन इकाई द्वारा आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों की राय जानने के बाद यह फैसला लिया है।
स्थानीय निकाय निदेशालय के नव निर्मित भवन के सभागार में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में स्वच्छ भारत मिशन के राष्ट्रीय सलाहकार श्रीनिवासन ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कार्यशाला में आए सभी 18 नगर निकायों के अध्यक्षों व अधिशासी अधिकारियों से कहा कि रोज के कूड़े को सिर्फ कचरा न समझकर उसे आय का जरिया मानकर निस्तारण कराया जाए।
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उन्होंने अंबिकापुर मॉडल की चर्चा करते हुए कहा कि अगर वैज्ञानिक तरीके और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर कूड़ा प्रबंधन किया जाय तो इससे कई फायदे हो सकते हैं। इससे निकायों की आय बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजी-रोटी मिलेगी।
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प्रदेश सरकार ने कूड़े के विकेंद्रीकरण कर निस्तारण के मुद्दे पर नगर विकास विभाग व नमामि गंगे परियोजना की राज्य मिशन इकाई द्वारा आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञों की राय जानने के बाद यह फैसला लिया है।
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स्थानीय निकाय निदेशालय के नव निर्मित भवन के सभागार में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में स्वच्छ भारत मिशन के राष्ट्रीय सलाहकार श्रीनिवासन ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कार्यशाला में आए सभी 18 नगर निकायों के अध्यक्षों व अधिशासी अधिकारियों से कहा कि रोज के कूड़े को सिर्फ कचरा न समझकर उसे आय का जरिया मानकर निस्तारण कराया जाए।
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उन्होंने अंबिकापुर मॉडल की चर्चा करते हुए कहा कि अगर वैज्ञानिक तरीके और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर कूड़ा प्रबंधन किया जाय तो इससे कई फायदे हो सकते हैं। इससे निकायों की आय बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजी-रोटी मिलेगी।
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नगर विकास मंत्री ने किया स्वच्छ भारत मिशन की वेबसाइट का लोकार्पण
कार्यशाला का उद्घाटन करने के बाद नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि यूपी के शहरों में निकायों के सामने कूड़ा निस्तारण बड़ी चुनौती है। इसलिए अंबिकापुर मॉडल को लागू कर समाधान पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हर वार्डों में पहले से गठित स्वच्छ वातावरण समितियों को इससे जोड़कर बेहतर किया जा सकता है। इस मौके पर उन्होंने www.smcg-up.org का लोकार्पण किया। इस मौके पर प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार सिंह, नमामि गंगे के राज्य मिशन निदेशक श्रीहरि प्रताप शाही, निदेशक स्थानीय निकाय अखिलेश सिंह ने भी संबोधित किया।
अंबिकापुर मॉडल की खास बातें
-शहर में हर दो किमी. पर निस्तारण के लिए ट्राली और सुपरवाइजर रखना
-ठोस व तरल कूड़े का उठान स्थल पर ही अलग-अलग कर निस्तारण
- कूड़ा कलेक्शन के लिए 2500 घरों का एक कलस्टर बनाना
- एक कलस्टर से निकलने वाले कूड़े से खाद बनाने के लिए एक यूनिट बनाना
- शहर में गरीबी रेखा से नीचे के लोगों का स्वयं सहायता समूह गठित करना
- ऐसे समूहों के सदस्यों को ही योजना के क्रियाकलापों में तैनात करना
-योजना की शुरुआत में सरकार द्वारा समूह के सदस्यों को मानदेय देना
- बाद में मानदेय पर खर्च होने वाली राशि यूजर्स चार्ज के रूप में वसूली जाएगी
नगर निकायों में लागू होगा अंबिकापुर मॉडल
- कन्नौज, हस्तिनापुर, बिजनौर, गढ़मुक्तेश्वर, अनूपशहर, नरौरा, बबराला, फरूर्खाबाद, बिठूर, गंगाघाट, झूंसी, मिर्जापुर, चुनार, रामनगर, मुगलसराय, सैदपुर, गाजीपुर व बलिया।
-ठोस व तरल कूड़े का उठान स्थल पर ही अलग-अलग कर निस्तारण
- कूड़ा कलेक्शन के लिए 2500 घरों का एक कलस्टर बनाना
- एक कलस्टर से निकलने वाले कूड़े से खाद बनाने के लिए एक यूनिट बनाना
- शहर में गरीबी रेखा से नीचे के लोगों का स्वयं सहायता समूह गठित करना
- ऐसे समूहों के सदस्यों को ही योजना के क्रियाकलापों में तैनात करना
-योजना की शुरुआत में सरकार द्वारा समूह के सदस्यों को मानदेय देना
- बाद में मानदेय पर खर्च होने वाली राशि यूजर्स चार्ज के रूप में वसूली जाएगी
नगर निकायों में लागू होगा अंबिकापुर मॉडल
- कन्नौज, हस्तिनापुर, बिजनौर, गढ़मुक्तेश्वर, अनूपशहर, नरौरा, बबराला, फरूर्खाबाद, बिठूर, गंगाघाट, झूंसी, मिर्जापुर, चुनार, रामनगर, मुगलसराय, सैदपुर, गाजीपुर व बलिया।