अमर उजाला यूनिसेफ वेबिनार: कोरोना की वापसी न हो, इसलिए अपनाएं ‘न्यू नॉर्मल’ तरीके, विशेषज्ञों ने दिए सुझाव
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दुनिया में कोरोना की दूसरी लहर की दहशत फैली हुई है। लॉकडाउन खुला तो लोगों को लगा कि सब सामान्य हो गया, लेकिन धीरे-धीरे फिर स्थितियां बेकाबू होने लगी हैं। इसे देखते हुए राजधानी के लोग भी खुद को तैयार कर रहे हैं। इस तैयारी में एक तो जरूरी है कोरोना फैलने के बाद के हालात की तैयारियां और दूसरी अहम चीज है न्यू नॉर्मल के साथ जीने की आदत।
विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि हमने कुछ जरूरी नियम, सावधानियों को अपना लिया तो कोरोना की दूसरी लहर हमें छू नहीं सकेगी और जो समस्या पैदा हुई है, उसका भी हल निकलेगा। ये निष्कर्ष रहा अमर उजाला यूनिसेफ की जिंदगी मास्टर क्लास सीजन-2 के तहत आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञों व युवाओं के बीच संवाद का। वेबिनार को अमर उजाला के फेसबुक पेज पर लाइव भी किया गया।
जितनी जल्दी हो सके, अपनी आदतें बदलिए, हाथ धोने की आदत मत छोड़िए
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में संक्रामक रोग नियंत्रण यूनिट के प्रभारी डॉ. डी हिमांशु ने कहा कि मास्क लगाना, सामाजिक दूरी और हाथ धोने की जरूरत न्यू नॉर्मल जिंदगी का हिस्सा है। देखा ये जा रहे हैं कि लोगों के मन में कोरोना के प्रति डर में कमी आई है। लोग पहले की अपेक्षा अब बड़ी संख्या में घर से बाहर जा रहे हैं, लेकिन हमें मास्क पहने बगैर घर से बाहर नहीं निकलना है।
हाथ मिलाना, गले मिलना, बिल्कुल नहीं। घर से निकलने से पहले खुद से पूछिए कि क्या ये काम घर से हो सकता है या नहीं। जरूरत हो, तभी बाहर जाइए। वैक्सीन आते ही सब सामान्य हो जाएगा, ऐसा नहीं है। इसके आने और सबको लगने में वक्त लगेगा। मरीजों की संख्या बढ़ेगी या कम होगी, यह बहुत कुछ हमारे व्यवहार पर निर्भर करता है। जितनी जल्दी हो सके अपनी आदतें बदलिए।
स्कूल हर मुमकिन कोशिश कर रहे, बच्चों की सेहत से समझौता नहीं
दूसरी लहर के मद्देनजर किए जा रहे हैं सारे जरूरी प्रयास
धीरे-धीरे हमने संसाधन बढ़ाए और अब हमारे पास 39 ऐसे सेंटर हैं और बेड की संख्या 10 हजार के करीब है। 1000 आईसीयू बेड भी हमारे पास हैं। हमारी तैयारियां हैं, लेकिन इसके बावजूद हम सबका यह प्रयास है कि ऐसे हालात ही न पैदा हों। इसके लिए लगातार हम लोगों को हर स्तर पर जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए बाजार एसोसिएशन और होटल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से बात चल रही है। स्कूल-कॉलेज हर स्तर पर जागरूकता के साथ-साथ विश्वास जगाने की सबके सहयोग से कोशिश जारी है। हर दिन 10,000 टेस्ट चल रहे हैं।