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लखनऊ में महिलाओं ने लिया संकल्प : मिलकर शहर को बनाएंगे प्लास्टिक मुक्त

Thu, 29 Aug 2019 03:00 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Thu, 29 Aug 2019 03:00 PM IST
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amar ujala aprajita: lucknow women will make city plastic free
महिला संवाद - फोटो : amar ujala
पॉलिथीन या प्लास्टिक हर तरह से पर्यावरण के लिए खतरनाक है। यह करीब एक हजार वर्षों तक नष्ट नहीं होती है। इसके बढ़ते इस्तेमाल और खतरों को देखते हुए कोर्ट ने इस पर रोक लगा रखी है, लेकिन यह रोक प्रभावी नहीं हो पा रही है। 
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अब राजधानी की महिलाओं ने लखनऊ को प्लास्टिक मुक्त बनाने का बीड़ा उठाया है। अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स मुहिम के तहत बुधवार को डालीबाग स्थित अमर उजाला कार्यालय में संवाद में जुटीं महिलाओं ने शहर को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प लिया। 
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‘महिलाएं चाह लें तो संभव है प्लास्टिक का लखनऊ निकाला’ विषय पर आयोजित महिला संवाद में उनके द्वारा सुझाए गए उपायों और उनकी बात को हम साझा कर रहे हैं अपने पाठकों से। 
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पैक्ड सामानों का बहिष्कार करें

घर से शुरुआत अच्छी बात है, लेकिन हम सब पैक्ड सामान खरीदते हैं। यदि हम पैकेट में बंद सामान लेना बंद करें तो प्लास्टिक से छुटकारा मिलेगा। पैक्ड सामान का बहिष्कार करे हर महिला। बच्चों के संस्कार में डालें की प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें। इस तरह के अभियान निश्चित तौर पर एक बदलाव लाएंगे और जागरूकता चेन जरूरी है। 
- सुचिता तिवारी

हम प्लास्टिक को कह चुके हैं ना
हम लोग कंज्यूमर्स हैं। यदि हम ज्यादा से ज्यादा ग्रीनरी को बढ़ाएंगे तो सरकारी मशीनरी पर भी दबाव बनेगा। कभी-कभी हम सबको क्लीन अप अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करना चाहिए। यदि हम ऐसा कर सके तो 60 फीसदी कचरे को खत्म कर सकते हैं। हमारे प्रयास लगातार होने चाहिए, एक दिन थैला ले गए दूसरे दिन नहीं, ऐसा नहीं करना चाहिए। प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रूल आ गया है। अब कस्टमर को यह अधिकार है कि वे प्लास्टिक प्रोड्यूसर को प्लास्टिक इकट्ठा करके भेज दें, इससे उनका निस्तारण करने की अपनी जिम्मेदारी को वे निभाने को मजबूर होंगे।
- अनुराधा गुप्ता

पानी की प्लास्टिक बोतलों को ना कहें
घर से बाहर जाते समय पानी की बोतलें मेटालिक की रखें। इससे बच्चों की आदतें सुधरेंगी। दूसरे प्लास्टिक के कपों में चाय बाहर पीना बंद करें। पेड़-पौधे प्लास्टिक में लपेटकर बिकते हैं, इसे रोकना होगा। पेपर बैग को बढ़ावा देकर हम प्लास्टिक का बहिष्कार कर सकते हैं। 
- डॉ. ओम सिंह

खुद से करें शुरुआत
जागरूक होना और करना जरूरी। अचानक सब कुछ बदल नहीं जाएगा। घर से शुरुआत करें, जो ज्यादा जरूरी हो, उसी का इस्तेमाल करें। धीरे-धीरे एक-एक चीज बंद करें, एक दिन पूरी तरह से बंद हो जाएगा। जागरूकता का सिलसिला रुकना नहीं चाहिए।  
- डॉ. रूबी राज सिन्हा

खुद का बैग लेकर जाने की आदत डालिए

मॉल में सामान लेने जाएं तो खुद का थैला या बैग लेकर जाने की आदत डालिए। दवा लेने जाते हैं तो प्लास्टिक की जगह कागज के पैकेट में लीजिए। इसके अलावा लंच टिफिन प्लास्टिक का न होकर स्टील का हो तो बेहतर होगा। ऐसी छोटी-छोटी आदतों से बदलाव आएगा।  
- ऋचि

पहले घर से निकालें
मेरा भी यही मानना है कि पहले अपने घर को प्लास्टिक फ्री करें। पहले के जमाने में कपड़ों के थैलों का इस्तेमाल होता था। यदि हम वही पुरानी आदतों को अपना लें कि अपने पास एक थैला रखें तो बड़ा बदलाव आएगा। 
- शशि निगम

मैं अपना झोला अपने साथ रखती हूं
मैं सब्जी लेने जाती हूं या फिर कुछ भी सामान तो अपना थैला अपने पास रखती हूं। सब्जी वाला देता भी है तो मना कर देती हूं। हालांकि वे लोग खुद देते हैं। पर यदि हम मना करेंगे तो दुकानदार अपने पास प्लास्टिक रखना बंद कर देंगे। 
- शशि खन्ना

पुराने कपड़ों का इस्तेमाल करें
घरों में पुराने पैंट और अन्य कपड़े जो अब इस्तेमाल न हो रहे हों, उनसे अच्छे बैग बनवाए जा सकते हैं। एक तो इससे जिनसे बनवाएंगे उनको रोजगार मिलेगा, दूसरा घर में पुराने कपड़ों का ढेर नहीं लगेगा। इसके अलावा प्लास्टिक का इस्तेमाल इसी तरह से बंद होगा। 
- रागिनी श्रीवास्तव

अपनी सेहत की चिंता करें

महिलाएं हो यां दुकानदार सफाई करते समय प्लास्टिक, पॉलिथीन नालियों में डाल देते हैं। सीवर लाइन जाम हो जाती है, गंदगी अलग फैलती है। कम से कम अपनी सेहत का ध्यान रखें। यदि हम इतना ही सोच लें और लोगों को बताएं तो बदलाव आएगा। स्टील या कांच के बर्तन का इस्तेमाल करें। 
- उषा किरण
 
हमें अपनी जिद छोड़नी होगी 
हम लोग बाहर जाते हैं तो प्लास्टिक मांगते हैं। यदि पेपर या कपड़े का बैग लेकर जाएं तो हमारी भी दिक्कत दूर होगी और दुकानदार भी दबाव में नहीं आएंगे। हम जिद करते हैं कि हमें बैग चाहिए, यदि हम अपनी जिद नहीं छोड़ेंगे तो बदलाव नहीं आएगा। 
- एकता खत्री

लोग तो लड़ने लगते हैं
आमतौर पर यदि मॉल में या दुकानदार प्लास्टिक बैग नहीं देता तो महिलाएं लड़ने लगती हैं। यह बेहद शर्मनाक है। इतने प्रचार-प्रसार के बावजूद वे अपना बैग लेकर जाना भूल जाती हैं। दुकानदार यदि पेपर बैग या कपड़े के बैग देने के पीछे पैसे मांगता है तो लड़ने लगती हैं। 
- सिमरन

फैक्ट्रियां बंद की जाएं
सरकार को और ज्यादा सख्त होना होगा। प्लास्टिक की फैक्ट्रियां बंद कर देनी चाहिए, अब बिना रोके काम नहीं चलेगा। इसके अलावा एक मुहिम की जरूरत है। प्लास्टिक इस्तेमाल पर ज्यादा से ज्यादा पेनाल्टी लगाई जानी चाहिए। 
- शैल श्रीवास्तव

नियमों को सख्त करें

प्लास्टिक पर रोक लगाने के लिए अब सख्त कार्रवाई की जरूरत है। नियमों को सख्त किया जाए और जुर्माना लगाया जाए। लोगों को मालूम होना चाहिए कि प्लास्टिक का विकल्प क्या है। यदि हम लोगों को जागरूक करेंगे, विकल्प बताएंगे तो सुधार होगा। 
- नमिता श्रीवास्तव

नियमों का पालन जरूरी 
नियम तो बहुत बने। अदालत ने भी आदेश दिया, लेकिन फिर भी प्लास्टिक पर रोक लगाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। दरअसल नियमों का पालन करना और कराना उतना ही जरूरी है, जितना की नियम बनाना और लागू करना। 
- मंजु श्रीवास्तव
 
बच्चों में आदत डालें
यदि हम बच्चों में एक बैग कैरी करने की आदत डाल दें तो भविष्य में समस्या पैदा ही नहीं होगी। हम लोगों की तो आदत नहीं रही, लेकिन यदि हम बच्चों को यह सिखाएंगे तो बेहतर होगा। मौजूद प्लास्टिक को खत्म करना जरूरी है। डंप कचरे की रिसाइकलिंग जरूरी है। 
- रश्मि सिंह

हम आंगनबाड़ी केंद्रों पर जागरूक करेंगे
हम अपने केंद्रों पर महिला मंडल की बैठक में प्लास्टिक से होेेने वाले नुकसान के बारे में बताते हैं। घर-घर जाते हैं, लोगों को समझाते हैं। हमारी कोशिश है कि कम से कम किशोरियां यदि झोला रखने की आदत बना लें तो काफी कुछ बदलाव हो सकता है। 
- मालती सिंह

बचा खाना प्लास्टिक में डालकर न फेंके

लोग बचा हुआ खाना प्लास्टिक की थैलियों में डालकर फेंक देते हैं, जिसे गाय खाती है। गाय की पूजा भी करते हैं और उन्हें कचरा भी खिला रहे हैं। किटी हो या पार्टी या कीर्तन, डिस्पोजल का इस्तेमाल बंद करें तो हालात बदलें। 
- अनुराग त्रिपाठी

हम झोला लेकर चलते हैं
हम झोला लेकर चलते हैं अपने बैग में। यदि यह हम अपने पड़ोसियों को समझा सकें कि प्लास्टिक कितना खतरनाक है तो हालात खुद बदलेंगे। हम सबको शुरुआत अपने घर से करनी होगी और कर भी रहे हैं। 
- किरन गुप्ता

त्यौहारों पर कपड़े के थैले करें गिफ्ट
जिन्हें त्यौहारों पर गिफ्ट देने का शौक है, वे मूर्तियों या प्लास्टिक के सेट की जगह कपड़े के बैग गिफ्ट कर सकते हैं। इससे लोगों में जागरूकता भी आएगी और हम-आप मिलकर समाज की बेहतरी में अपना योगदान दे सकेंगे। 
- सपना गुप्ता

बैग बनेंगे तो रोजगार बढ़ेगा
प्लास्टिक को जड़ से खत्म करना है तो हमें कपड़े के बैग का उत्पादन करना चाहिए। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा और एक दिन पूरी तरह से प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद हो जाएगा। 
- अमृता डिंगर
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