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हंसी-ठिठोली के बीच चिकित्सकों ने याद किए वो कॉलेज वाले दिन, बोले- तब जिंदगी बचाने पर मिलती थी शाबाशी

Sat, 16 Nov 2019 02:40 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 16 Nov 2019 02:40 PM IST
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alumni meet of KGMU pediatric department in lucknow
एल्युमिनाई मीट में मौजूद तमाम चिकित्सक - फोटो : अमर उजाला

लखनऊ में केजीएमयू के हॉस्टल में ताउम्र दोस्ती का वादा करने वाले पीडियाट्रिक विभाग के एल्युमिनाई सालों बाद शुक्रवार को मिले। हंसी-ठिठोली के साथ क्लास से लेकर हॉस्टल तक की यादें ताजा हो गईं। कब किसने, किसको चांटा मारा और कब किसे प्रपोज करने का प्रयास किया, इस पर भी जमकर बातें हुईं।

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एल्युमिनाई मीट - फोटो : अमर उजाला
मौका था पीडियाट्रिक एसोसिएशन की ओर से राजधानी के एक होटल में केजीएमयू पीडियाट्रिक एल्युमिनाई समारोह का। नौस्टिाल्जिया रीरोडेड यानी पुरानी मीठी यादें नाम से आयोजित इस समारोह में 1961 बैच से लेकर अब तक के चिकित्सकों ने हिस्सा लिया।
 
alumni meet of KGMU pediatric department in lucknow
एल्युमिनाई मीट - फोटो : अमर उजाला
समारोह में  लखनऊ के साथ ही प्रदेशभर से आए दो सौ से अधिक एल्युमिनाई शामिल हुए। सभी ने एक-दूसरे से गले मिलकर बधाई दी। जूनियरों ने अपने सीनियर का एक बार फिर क्लास की तरह अभिवादन किया तो सीनियरों ने भी उन्हें गले लगा लिया।
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एल्युमिनाई मीट - फोटो : अमर उजाला
बुजुर्ग हो चले डॉक्टरों ने अपने जूनियर्स को जिंदगी के संघर्र्षों के जरिए हर वक्त कर्तव्य को लेकर सचेत रहने की सीख दी। इस दौरान कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। इसमें सभी ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। किसी ने गीत के जरिए तो किसी ने व्यंग्य बाण चलाए।
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डॉ मुनेश - फोटो : अमर उजाला
सम्मान में आ रही गिरावट
मैं 1995 बैंच की हूं। मैं अक्सर केजीएमयू आती रहती हूं। यहां का सीन हर साल बदल रहा है। पुरानी से नई बिल्डिंग्स बन रही हैं तो नए-नए उपकरण भी आ रहे हैं। इससे मरीजों का इलाज आसान हुआ है। एक बार हम लोग फिल्म देखने के लिए टेंपो से निकले थे। रास्ते में दो लोग मिले। पहले तमंचा लगाकर चेन व अंगुठी मांगी, लेकिन जब पता चला कि हम लोग मेडिकल कॉलेज के हैं तो बिना कुछ लिए लौट गए। यह मेडिकल प्रोफेशन के प्रति एक तरह का सम्मान था। अब इस तरह का सम्मान नहीं दिखता है। - डॉ. मुनेश, मेरठ
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