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लेखपालों के लिए अच्छी खबर, 300 से बढ़कर 3,250 रुपये हो सकता है भत्ता
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 09 Dec 2017 01:17 PM IST
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राजस्व परिषद ने लेखपालों का पेट्रोल, स्टेशनरी और विशेष भत्ता बढ़ाने की सिफारिश शासन से की है। इससे लेखपालों के भत्ते 300 रुपये से बढ़कर 3,250 रुपये प्रतिमाह हो जाएंगे। परिषद ने शासन से जल्द से जल्द प्रस्ताव पर निर्णय लेने का आग्रह किया है। प्रदेश में इस समय 30 हजार से अधिक लेखपाल हैं।
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लेखपालों को इस समय 100 रुपये विशेष वेतन भत्ता दिया जाता है। तीन वर्ष पहले इसे बढ़ाकर 300 रुपये करने पर सरकार सहमत भी हो गई थी लेकिन आदेश नहीं हुआ। लेखपालों ने 10 वर्ष में बढ़ी महंगाई व अन्य राज्यों में लेखपालों को मिलने वाले भत्ते का हवाला देकर वेतन का 25 प्रतिशत, न्यूनतम पांच हजार रुपये भत्ता देने की मांग की थी।
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परिषद ने 1500 रुपये प्रतिमाह विशेष वेतन-भत्ता देने की संस्तुति की है। लेखपालों ने सरकारी कार्य के लिए हर महीने करीब 30 लीटर पेट्रोल खर्च का हवाला देते हुए सरकार से 2000 रुपये प्रतिमाह भत्ता की मांग की थी। परिषद ने लेखपालों को 1000 रुपये प्रतिमाह पेट्रोल भत्ता देने की संस्तुति की है। लेखपालों को अभी 100 रुपये साइकिल भत्ता मिलता है।
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इसी तरह रजिस्टर व स्टेशनरी के लिए 1000 रुपये प्रतिमाह स्टेशनरी भत्ता मांगा गया था। इसके लिए भी अब तक 100 रुपये मिलता है। परिषद ने 750 रुपये प्रतिमाह भत्ता दिए जाने की सिफारिश की है। राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव लीना जौहरी ने प्रमुख सचिव राजस्व डॉ. रजनीश दुबे को संस्तुतियों की जानकारी दी।
अब शासन के पाले में लेखपालों का मामला
लेखपालों ने पिछले दिनों आंदोलन किया था। बाद में राजस्व परिषद के अध्यक्ष प्रवीर कुमार के साथ हुई वार्ता में लेखपाल संघ ने वेतन विसंगति दूर करने और भत्तों में बढ़ोत्तरी की मांग की थी। राजस्व परिषद वेतन विसंगति के संबंध में शासन को पहले ही लिख चुका है। अब भत्तों में वृद्धि से जुड़ी संस्तुतियां भी भेजी गई है।
सरकार पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आएगा
लेखपाल संघ के महामंत्री बृजेश श्रीवास्तव का कहना है कि भत्ते बढ़ाने से सरकार पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आएगा। लेखपालों को पहले खतौनी बनाने का पूरा पैसा मिलता था। अब खतौनी का पैसा सरकार के खजाने में जाता है। इस मद के कुछ अंश से ही बढ़ाए गए भत्तों का भुगतान हो सकता है।
सरकार पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आएगा
लेखपाल संघ के महामंत्री बृजेश श्रीवास्तव का कहना है कि भत्ते बढ़ाने से सरकार पर कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आएगा। लेखपालों को पहले खतौनी बनाने का पूरा पैसा मिलता था। अब खतौनी का पैसा सरकार के खजाने में जाता है। इस मद के कुछ अंश से ही बढ़ाए गए भत्तों का भुगतान हो सकता है।