विधानसभा उपचुनाव: भाजपा-सपा की प्रतिष्ठा दांव पर, कांग्रेस-बसपा के पास खोने को कुछ नहीं
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किसी राजनेता की निजी प्रतिष्ठा की बात करें तो वह आजम खां हैं। उनके पुत्र रामपुर जिले की स्वार सीट से सपा के विधायक थे, जिनकी सदस्यता रद्द होने से वहां उपचुनाव हो रहा है। निश्चित रूप से सपा के साथ ही निजी तौर पर आजम के पास स्वार में साइकिल को रफ्तार से चलाकर जेल में होने के बावजूद अपनी सियासी ताकत का संदेश देने का मौका है।
जिन 8 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं, उनमें से छह भाजपा के कब्जे वाली हैं जबकि जौनपुर की मल्हनी तथा रामपुर की स्वार सीट सपा के कब्जे वाली है। मल्हनी सीट 2012 से अस्तित्व में आई। अब तक दो बार विधानसभा चुनाव हुए, जिनमें सपा के पारसनाथ यादव जीते।
2017 में वह 7वीं बार विधायक चुने गए थे। वह दो बार सांसद भी रहे थे। 2017 के विधानसभा चुनाव में लहर के बावजूद भाजपा यहां बढ़िया प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। अब एनडीए में शामिल निषाद पार्टी यहां दूसरे स्थान पर रही थी। निषाद पार्टी से बाहुबली धनंजय सिंह ने चुनाव लड़ा था। पारसनाथ यादव की मृत्यु के कारण मल्हनी में उपचुनाव हो रहा है।
इसलिए प्रतिष्ठा दांव पर
भाजपा के सामने न सिर्फ 2017 में जीती विधानसभा सीटों को अपने कब्जे में बनाए रखने की, बल्कि सपा के कब्जे वाली स्वार तथा मल्हनी को भी जीतकर लोकप्रियता में बढ़ोतरी के दावे को साबित करने की चुनौती है। वहीं, सपा को स्वार तथा मल्हनी में अपना कब्जा बरकरार रखते हुए भाजपा के कब्जे वाली सीटों में भी कुछ को अपनी झोली में डालकर अखिलेश यादव की लोकप्रियता दिन-प्रतिदिन बढ़ने के दावे को साबित करना है।
कांग्रेस अगर उपचुनाव में अपनी उपस्थिति की तरफ लोगों का ध्यान खींचने में कामयाब हो जाती है तो विपक्षी दल के रूप में उसकी तवज्जो बढ़ेगी। प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व पर भरोसा मजबूत होगा। बसपा की बात करें तो भले ही 2017 के विधानसभा चुनाव में वह उपचुनाव वाली सीटों में कहीं न जीती हो लेकिन मल्हनी में वह अच्छा प्रदर्शन करती रही है।
इस समय जौनपुर से बसपा का ही सांसद है। पिछले लोकसभा चुनाव में मल्हनी में बसपा ने काफी वोट हासिल किए थे। यह बात दीगर है कि तब सपा और बसपा गठबंधन करके मैदान में थीं। पर, सांसद होने के नाते मल्हनी में बसपा के सामने भी बेहतर प्रदर्शन की चुनौती है।
इस तरह तैयारी
भाजपा ने अपने कब्जे वाली छह सीटों पर चुनावी मंथन शुरू करने के साथ ही संगठन से लेकर सरकार के कुछ प्रमुख चेहरों को इन सीटों पर बतौर प्रभारी कमल खिलाने की जिम्मेदारी देने का फैसला किया है। इनकी जल्द ही तैनाती हो जाएगी। सपा के कब्जे वाली मल्हनी और स्वार सीट पर खास मंथन हो रहा है।
पार्टी के रणनीतिकार दोनों सीटों पर ऐसे चेहरों को उतारना चाहते हैं जो स्थानीय समीकरणों में अपनी पकड़ व पहुंच के जरिए वोट बढ़ाकर जीत के आंकड़े तक पहुंच सकें। पिछले दिनों निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद 2017 में मल्हनी में सपा को कड़ी टक्कर देने वाले धनंजय सिंह को लेकर भाजपा के प्रमुख नेता से मिले थे।
हालांकि अभी यह कहना मुश्किल है कि निषाद पार्टी के जरिये आपराधिक छवि के धनंजय सिंह की पीठ पर भाजपा हाथ रखेगी या नहीं। जहां तक बसपा की बात है तो उसने भी कुछ सीटों पर प्रभारी बना दिए हैं। सपा भी जल्द ही कुछ नेताओं को उपचुनाव वाले क्षेत्रों में लगाएगी।