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आउटसोर्सिंग से स्टाफ रखने को बनेगी नीति
लखनऊ/महेंद्र तिवारी
Updated Sat, 03 Aug 2013 09:12 AM IST
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प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के रिक्त पदों पर आउटसोर्सिंग के जरिये
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स्टाफ रखने को सरकार नीति बनाने पर विचार कर रही है।
इसके लिए प्रमुख सचिव कार्मिक की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित कर दी गई है। इसमें कई विभागों के प्रमुख सचिव या उनके प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
समिति समूह ‘घ’ के रिक्त पदों को आउटसोर्सिंग के जरिये भरे जाने में आ रही मुश्किलों से जुड़े पहलुओं पर विचार कर रिपोर्ट देने को कहा है। सरकार इसी के आधार पर नीति बनाएगी।
सरकारी विभागों में खाली पदों पर जरूरत के मुताबिक कई जगह सीधी भर्ती की जगह आउटसोर्सिंग के जरिये कर्मचारी रखे जाते हैं। ऐसे कर्मचारियों का चयन बाहरी कार्य प्रदाता (निजी एजेंसी) के जरिये किया जाता है।
इन कर्मियों का भविष्य पूरी तरह निजी एजेंसी की मर्जी पर निर्भर करता है।
अक्सर शिकायतें आती हैं कि सरकार कार्य प्रदाता को मानदेय के लिए जितना पैसा देती है वह कर्मचारी से तो उतनी राशि की प्राप्ति का हस्ताक्षर करवा लेते हैं लेकिन वास्तव में उतना देते नहीं।
बॉन्ड व तमाम कठिन शर्तों की वजह से कर्मचारी कोई सवाल-जवाब भी नहीं कर पाते।
इसके लिए प्रमुख सचिव कार्मिक की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित कर दी गई है। इसमें कई विभागों के प्रमुख सचिव या उनके प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है।
समिति समूह ‘घ’ के रिक्त पदों को आउटसोर्सिंग के जरिये भरे जाने में आ रही मुश्किलों से जुड़े पहलुओं पर विचार कर रिपोर्ट देने को कहा है। सरकार इसी के आधार पर नीति बनाएगी।
सरकारी विभागों में खाली पदों पर जरूरत के मुताबिक कई जगह सीधी भर्ती की जगह आउटसोर्सिंग के जरिये कर्मचारी रखे जाते हैं। ऐसे कर्मचारियों का चयन बाहरी कार्य प्रदाता (निजी एजेंसी) के जरिये किया जाता है।
इन कर्मियों का भविष्य पूरी तरह निजी एजेंसी की मर्जी पर निर्भर करता है।
अक्सर शिकायतें आती हैं कि सरकार कार्य प्रदाता को मानदेय के लिए जितना पैसा देती है वह कर्मचारी से तो उतनी राशि की प्राप्ति का हस्ताक्षर करवा लेते हैं लेकिन वास्तव में उतना देते नहीं।
बॉन्ड व तमाम कठिन शर्तों की वजह से कर्मचारी कोई सवाल-जवाब भी नहीं कर पाते।