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साहब का मूड कैसा है ?
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 24 Jul 2013 01:09 PM IST
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बुनियादी तालीम देने वाले विभाग के मुखिया के पास दो विभागों का चार्ज है।
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यह बात अलग है कि उन्होंने बुनियादी तालीम वाले विभाग को कभी भी गंभीरता से नहीं लिया। पर आजकल मुखियाजी का मूड कुछ अपसेट है।
वह बात-बात पर मातहतों को काटने दौड़ रहे हैं। अमूमन तो शिविर कार्यालयों में वह बैठते बहुत कम हैं और बैठते हैं तो उनके मातहत उनके सामने जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं।
वजह मुखियाजी किस बात पर नाराज हो जाएं और डपट पड़ें कोई भरोसा नहीं। इसलिए उनके कमरे में जाने से पहले हर कोई मुखियाजी के मूड के बारे में जानकारी हासिल करता है।
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इस मूड को लेकर भी विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। एक चर्चा सबसे गरम है। कहा जा रहा है कि जब से जेल वाले साहब बाहर आए हैं, तब से ही मुखियाजी का मूड कुछ गड़बड़ाया है।
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इसके पीछे मातहत जेल से बाहर वाले साहब के दिमाग का हवाला देते हैं। कहते हैं कि वह कब क्या कर दें, कोई बड़ी बात नहीं है। इसीलिए मुखियाजी अपसेट हैं।