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हो नहीं पाई अपनी सत्ता
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Wed, 16 Oct 2013 01:22 PM IST
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सत्ताधारी पार्टी की बात ही कुछ और होती है। अगर अपनी पार्टी नहीं है तो फिर कौन पूछता। यही हाल कुछ भगवा वाली पार्टी का है।
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इस पार्टी के बड़े नेता का नाता पश्चिम से है। वहां इनकी एक फैक्ट्री है, जिसकी जमीन के लैंडयूज का कुछ मामला शासन में फंसा हुआ है।
कई बार इस नेता ने शासन के अधिकारियों को फोन पर इसके बारे में जानकारी ली, पर काम बनता न देख एक दिन खुद वहां पहुंच गए।
अधिकारियों के कमरे तक कौन कहे, वे तो अनुभाग तक पहुंच गए। यह देखकर हर कोई हैरान। शिष्टाचार का नाता, हर कोई कुर्सी छोड़कर खड़ा हो गया।
वे भी वहां बैठ गए और अपने काम की ताकीद करने लगे। अब बेचारे अनुभाग के अधिकारी और कर्मचारी उन्हें क्या बताते कि उनका कितना काम हुआ।
अपने काम की जानकारी लेने के बाद वे वहां से चले तो गए, पर अपने पीछे एक चर्चा जरूर छोड़ गए कि न हुई अपनी पार्टी की सत्ता।
इस चर्चा का मतलब साफ है कि अपनी पार्टी की सत्ता होती तो शायद ही इस नेता को यहां आना पड़ता।