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सब कुछ हरा हरा
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Tue, 29 Oct 2013 09:19 AM IST
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एक आईएएस अफसर को कुछ दिन पहले रिटायर होने के बाद कृपा विस्तार मिला है। उनके दफ्तर में लंच के समय व शाम को चला-चली की बेला में एक से डेढ़ घंटा फीडबैक के लिए होता है।
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मेन कैंपस सचिवालय स्थित उनके कार्यालय में उस समय वैसे तो अलग-अलग विभागों में कार्यरत उनके बैचमेट जुटते हैं।
जो दिन भर आने-जाने वालों से मिली सियासी जानकारी साझा करते हैं लेकिन अगर खुदा न खास्ता कोई दूसरा भी पहुंचा तो उससे भी सीधा सवाल यही कि सरकार कैसी चल रही है?
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अगर सरकार की तारीफ में बोलिए तो ठीक, वरना समझिए शामत है। मुरादाबाद से आए एक सज्जन ने मुजफ्फरनगर का ताजा समीकरण समझाना शुरू किया तो वे भड़क गए।
बोले, तुम भाजपाई हो क्या? सपा को हर कहीं माइनॉरिटी का पूरा समर्थन मिलेगा। हर किसी को पता है कि यह सरकार किसके लिए क्या कर रही है?
मुजफ्फरनगर में जो होना था हुआ लेकिन क्या कोई मिसाल है कि दंगे के पीड़ित लोगों को इस तरह मुआवजा, नौकरी व घर दिए गए हों?
बात सुनने के लिए सरकारी हेलीकॉफ्टर से बुलाया गया हो? अगर अब भी ये सपा के साथ नहीं आएंगे तो कहां जाएंगे? इसे कहते हैं, ‘ले लो ऐनक हरे रंग की, सब कुछ दिखे हरा-हरा।’
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