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खेत में जिंदा दफन था बच्चा, चील-कौवों की वजह से बची जान!

Thu, 26 Nov 2015 05:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 26 Nov 2015 05:28 PM IST
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alive newborn buried in field

पैदा होते ही उसे खेत में जिंदा दफन कर दिया गया। पर, छटपटाहट से थोड़ी मिट्टी हट गई। वह सांस ले सका। पर, चील-कौवे आ धमके और नोंचने लगे।

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जिंदगी शायद हार जाती अगर संबारा नहीं पहुंचती। संबारा ने चील-कौवों को मंडराते देखा तो उधर लपक पड़ी। जमीन में गड़े नवजात को निकाला। मुंह के अंदर की मिट्टी साफ की।
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चील-कौवों ने उसके पेट में नोच-नोचकर छेद कर दिया था। उसे लेकर अस्पताल भागी। जहां से उसे राजधानी के डफरिन अस्पताल रेफर कर दिया गया। अब वह चम्मच से दूध पी रहा है।
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डॉक्टरों का कहना है कि नन्ही-सी जान ने जिंदगी की जंग जीत ली। वह तेजी से रिकवर कर रहा है। घटना बाराबंकी के सैदनपुर गांव की है। बच्चे के साथ डफरिन अस्पताल में ही जमीं संबारा बताती हैं- 21 नवंबर की सुबह खेत में कौए और चील मंडरा रहे थे।

जमीन से निकला दिखा पैर

alive newborn buried in field

लगा कुछ गड़बड़ है। पास गई तो बच्चे का पैर नजर आया। दिल कांप गया। पर, जैसे ही मिट्टी हटाई बच्चा रो पड़ा। चील-कौवों ने नोचकर उसके पेट में छेद कर दिया था।
नाजुक अंगों पर आई चोट से भी खून बह रहा था। बस, फौरन उसे लेकर घर की ओर भागी।

पति राम प्रसाद को बताया और हम उसे लेकर निजी अस्पताल भागे। वहां डॉक्टरों ने तुरंत जिला अस्पताल रेफर कर दिया।

संबारा बताती हैं कि जिला अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने नवजात को टांका लगाया और भर्ती कर लिया। मामले की जानकारी कोठी थाने की पुलिस व चाइल्ड लाइन सेंटर को दी।

पुलिस ने एक दिन बाद बाराबंकी की चाइल्ड लाइन को सूचित किया। मंगलवार शाम को हालत बिगड़ी तो डॉक्टरों ने डफरिन अस्पताल में रेफर कर दिया।

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