नोवेल कोरोना वायरस को लेकर लखनऊ में अलर्ट, चिकित्सा संस्थानों में अलग से बनाए गए वार्ड
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चीन के वुहान शहर में लोगों की जान सांसत में डालने वाले नोवेल कोरोना वायरस को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। राजधानी के चिकित्सा संस्थानों में इसके लिए अलग से वार्ड बना दिए गए हैं। मरीज मिलते ही स्वास्थ्य मंत्रालय को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। एयरपोर्ट पर आने वाली चीनी यात्रियों की स्क्रीनिंग के बाद ही शहर में जाने देने का निर्देश दिया गया है।
चीन के वुहान शहर में 62 मरीजों में यह वायरस पाया गया। दो दिन पहले एक भारतीय अध्यापिका भी चीन में नोवेल कोरोना वायरस की चपेट में आ गई। इसकी जानकारी मिलते ही केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव प्रीति सूदन ने अलर्ट जारी कर दिया है।
उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों को चौकन्ना रहने का निर्देश जारी किया है। सचिव की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि चीन से आने वाले यात्रियों की पूरी तरह से स्क्रीनिंग की जाए। सीएमओ डॉ नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि राजधानी के चिकित्सा संस्थानों के साथ ही सरकारी अस्पताल को अलर्ट कर दिया गया है। मरीजों को आइसोलेट करने के लिए अलग वार्ड बनाए गए हैं।
एयरपोर्ट पर विशेष सावधानी
सीएमओ ने बताया कि चीन से आने वाले यात्रियों पर खासतौर से निगरानी की जाएगी। उन्हें एयरपोर्ट पर उनकी थर्मल स्कैनर टीम स्क्रीनिंग करेगी। जांच पड़ताल में बीमारी के लक्षण मिलने पर एंबुलेंस से केजीएमयू या पीजीआई भेजा जाएगा।
केजीएमयू में 10 तो पीजीआई में 5 बेड रिजर्व
इसके लिए केजीएमयू में 10, पीजीआई में पांच और लोहिया संस्थान में पांच बेड आरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह सिविल, बलरामपुर, लोकबंधु अस्पताल को भी अलर्ट कर दिया गया है।
क्या है चीनी वायरस
नोवेल कोरोना वायरल (एनसीओवी) को लेकर डब्ल्यूएचओ ने अलर्ट कर दिया है। इसकी वजह से सीवियर एक्युट रेस्पायरेटरी सिंड्रोम (एसएआरएस) होता है। इसमें फेफड़े में गंभीर किस्म का संक्रमण होता है। मरीज को वेंटिलेटर पर लेना पड़ता है। चीन व हांगकांग में वर्ष 2002- 2003 में कई लोगों की जान चली गई थी। इस साल भी चीन के वुहान शहर में करीब 62 मरीजों में यह वायरस मिला है। यह वायरस सी-फूड में पाया जाता है। ऊंट, बिल्ली और चमगादड़ में भी यह पाया जाता है।
क्या है लक्षण
डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी गाइड लाइन के मुताबिक कोरोना वायरस का असर होने पर संबंधित व्यक्ति को जुकाम, खांसी, गले में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, बुखार आदि हो सकता है। तीन दिन बाद निमोनिया जैसे लक्षण सामने आते हैं और यह किडनी पर भी असर डालता है।
क्या है बचाव का रास्ता
केजीएमयू माइक्रोबायोलॉजी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शीतल वर्मा ने बताया कि राजधानी में अभी तक इसके मरीज नहीं मिले हैं। इससे बचने के लिए साफ सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सर्दी जुकाम वाले लोग भीड़भाड़ वाले इलाके में न जाएं। हाथ को अच्छी तरह से साबुन से धोएं। नाक और मुंह पर मास्क अथवा रूमाल रखें। यदि कोई व्यक्ति बीमार है तो उसके बर्तन का इस्तेमाल दूसरे लोग न करें। जुकाम के साथ सीने में तेज दर्द हो तो चिकित्सक को दिखाएं। सी फूड खाने से बचें।