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एकेटीयू : ऑडिट कोर्स की अड़चन हटी, एक हजार छात्रों की डिग्री का रास्ता साफ
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लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) ने बीटेक फाइनल ईयर के करीब एक हजार छात्रों को बड़ी राहत दी है। ऑडिट कोर्स (बीएनसी 601-02) के नॉन-क्रेडिट पेपर में तीसरे वर्ष के दो पेपरों में से किसी एक को पास न कर पाने के कारण इन छात्रों का डिवीजन अवाॅर्ड अटका हुआ था। अब परीक्षा समिति ने नियम में संशोधन करते हुए तीसरे वर्ष में दो के बजाय एक नॉन-क्रेडिट पेपर पास करने पर भी डिवीजन अवाॅर्ड करने को मंजूरी दे दी है।
कुलपति प्रो. जेपी पांडेय की अध्यक्षता में हुई परीक्षा समिति की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी। विश्वविद्यालय के मौजूदा नियमों के तहत बीटेक छात्रों के लिए पहले और दूसरे वर्ष में एक-एक तथा तीसरे वर्ष के दोनों सेमेस्टर में एक-एक नॉन-क्रेडिट पेपर पास करना अनिवार्य था।
संशोधित व्यवस्था के अनुसार पहले और दूसरे वर्ष के नॉन-क्रेडिट पेपर पहले की तरह अनिवार्य रहेंगे, जबकि तीसरे वर्ष में दो के बजाय एक पेपर पास करने पर भी छात्र डिवीजन अवाॅर्ड के पात्र होंगे।
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बता दें कि विश्वविद्यालय में पहले और दूसरे वर्ष में ऑडिट कोर्स के तहत स्पोर्ट्स एंड योगा, जबकि तीसरे वर्ष में भारतीय संविधान और पारंपरिक ज्ञान का सार विषय पढ़ाए जाते हैं। तीसरे वर्ष के इन पेपरों में बड़ी संख्या में छात्र सफल नहीं हो सके थे, जिसके चलते उनका डिवीजन अवाॅर्ड लंबित था। विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के छात्र लंबे समय से इस नियम में राहत की मांग कर रहे थे। प्रभावित छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियम में संशोधन कर उन्हें राहत देने का निर्णय लिया।
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कुलपति प्रो. जेपी पांडेय की अध्यक्षता में हुई परीक्षा समिति की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी। विश्वविद्यालय के मौजूदा नियमों के तहत बीटेक छात्रों के लिए पहले और दूसरे वर्ष में एक-एक तथा तीसरे वर्ष के दोनों सेमेस्टर में एक-एक नॉन-क्रेडिट पेपर पास करना अनिवार्य था।
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संशोधित व्यवस्था के अनुसार पहले और दूसरे वर्ष के नॉन-क्रेडिट पेपर पहले की तरह अनिवार्य रहेंगे, जबकि तीसरे वर्ष में दो के बजाय एक पेपर पास करने पर भी छात्र डिवीजन अवाॅर्ड के पात्र होंगे।
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बता दें कि विश्वविद्यालय में पहले और दूसरे वर्ष में ऑडिट कोर्स के तहत स्पोर्ट्स एंड योगा, जबकि तीसरे वर्ष में भारतीय संविधान और पारंपरिक ज्ञान का सार विषय पढ़ाए जाते हैं। तीसरे वर्ष के इन पेपरों में बड़ी संख्या में छात्र सफल नहीं हो सके थे, जिसके चलते उनका डिवीजन अवाॅर्ड लंबित था। विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के छात्र लंबे समय से इस नियम में राहत की मांग कर रहे थे। प्रभावित छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने नियम में संशोधन कर उन्हें राहत देने का निर्णय लिया।