2017 चुनाव के पहले मजबूत हो रही है सपा सेना, मिला युवा सेनापति
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सूबे में वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने युवा संगठनों को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। पार्टी ने युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति कर दी है।
वहीं लोहिया वाहिनी, मुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेड और समाजवादी छात्र सभा को जल्द सेनापति मिलने वाले हैं। ये चारों संगठन दो साल से भंग चल रहे थे।
वर्ष 2012 के विस चुनाव में सपा के युवा नेताओं ने अहम भूमिका निभाई थी। बसपा सरकार के खिलाफ संघर्ष से लेकर अखिलेश यादव की रथयात्राओं और चुनाव अभियान की बागडोर नौजवान नेताओं के हाथों में दी थी।
उस में अखिलेश यादव पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष होने के साथ ही युवा संगठनों के प्रभारी थे। यही नहीं, मुख्यमंत्री बनने के बावजूद वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व युवा संगठनों के प्रभारी हैं। लिहाजा आगामी विस चुनाव के मद्देनजर वह युवा संगठनों को सक्रिय बनाने में जुट गए हैं।
युवजन सभी की इन्हें दी गई है कमान
पिछले विस चुनाव में सक्रिय रहे युवा नेता अभी भी मुख्यमंत्री से उसी तरह जुड़े हुए हैं। अब सेनापति तैनात किए जा रहे हैं। विकास यादव को बृहस्पतिवार को युवजन सभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
बता दें, पिछले विस चुनाव में संजय लाठर युवजन सभा, आनंद भदौरिया लोहिया वाहिनी, अमिताभ वाजपेयी यूथ ब्रिगेड और सुनील यादव साजन छात्र सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।
प्रदेश में इन चारों संगठनों की बागडोर क्रमश: नफीस अहमद, डॉ. निर्भय सिंह पटेल, नईमुल हसन और डॉ. राजपाल कश्यप के हाथों में थी।
युवा नेताओं को दी जाएगी ट्रेनिंग
सपा के सूत्रों का कहना है कि लोहिया वाहिनी, यूथ ब्रिगेड और छात्र सभा के प्रदेश अध्यक्ष भी जल्द ही मनोनीत होने वाले हैं। युवा संगठनों के अध्यक्षों को चुनावी टिप्स देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इससे पहले युवा नेताओं को दिल्ली में प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण प्राप्त इन्हीं युवा नेताओं के हाथों में वर्ष 2017 के चुनाव अभियान की कमान रहेगी।
इसके पहले इन युवाओं को सपा ने दिया है मौका
सपा युवा नेताओं को राजनीति में तरजीह देती रही है। उन्हें न केवल विधान परिषद और राज्यसभा में भेजा वरन विधानसभा चुनाव में टिकट देकर मंत्री तक बनाती रही है।
मसलन सपा ने लखनऊ विवि छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष व समाजवादी छात्र सभा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह को वर्ष 2010 में राज्यसभा भेजा था। जबकि जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कमाल अख्तर 2006 में ही राज्यसभा भेजे दिए गए थे।
जामिया के पूर्व अध्यक्ष जावेद अली खां को 2014 में राज्यसभा में भेजा गया है। इसी तरह सुनील यादव साजन और आनंद सिंह भदौरिया समेत कई युवा नेताओं को इस वर्ष विधान परिषद में भेजा गया।
ऐसी संभावना है कि हाल में रिक्त हो रही राज्यसभा की 10 और विधान परिषद की 13 सीटों में भी युवाओं को अच्छा प्रतिनिधित्व मिलेगा।