बजट में यूपी की अनदेखी पर जानें क्या बोले सीएम अखिलेश
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केंद्रीय बजट को निराशाजनक बताया है। उन्होंने कहा कि बजट गरीब विरोधी और दिशाहीन है। इसमें ग्रामीणों के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे सहित प्रदेश की अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी जरूरतों के लिए भी कोई प्रावधान नहीं है। यूपी में देश की सर्वाधिक आबादी रहती है, पर बजट में सूबे के हितों की अनदेखी की गई। प्रदेशवासियों को इससे निराशा हुई है।
अखिलेश ने केंद्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इसमें कुछ नया नहीं है। राज्य सरकार ने गोरखपुर में एम्स स्थापित करने के लिए निशुल्क जमीन की व्यवस्था की और बिजली देने का भी निर्णय लिया, लेकिन बजट में इसके लिए राशि का प्रावधान नहीं किया गया है।
राज्य ने केंद्र की सत्ताधारी पार्टी को लोकसभा के 71 सांसद दिए हैं। प्रधानमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र भी उत्तर प्रदेश में ही है। इसके बावजूद राज्य के विकास के लिए दूरगामी रणनीति नहीं बनाई गई। बजट में कई योजनाओं के माध्यम से राज्य सरकारों पर आर्थिक बोझ डालने का प्रयास किया गया है।
सरकारी कर्मचारियों को हुई निराशा
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों, नौजवानों, अल्पसंख्यकों, पिछड़ों, कमजोर वर्गों तथा महिलाओं के लिए कोई नई योजना पेश नहीं की गई है। बजट से सरकारी कर्मचारियों को भी काफी निराशा हुई है। आयकर में कोई छूट न देने से छोटे कर्मी भी इसके दायरे में आ जाएंगे। पुरानी पेंशन व्यवस्था भी बहाल नहीं की गई।
उन्होंने बजट को किसान और नौजवान विरोधी बताते हुए कहा कि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की व्यवस्था नहीं की गई है। बुंदेलखंड और पूर्वांचल का पिछड़ापन दूर करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति का जिक्र नहीं है। कालाधन वापस लाने के बारे में भी कोई नई बात नहीं की गई है।
केंद्र के विभागों में भर्ती पर चुप्पी
अखिलेश ने कहा कि देश में बेरोजगारी गंभीर समस्या है। प्रदेश सरकार सरकारी तथा निजी सहयोग से अवस्थापना सुविधाओं का विस्तार करके युवाओं को रोजगार के अवसर दे रही है।
सरकारी विभागों में खाली पदों को भरा जा रहा है, लेकिन बजट में केंद्र सरकार के विभागों में रिक्त पदों पर भर्तियों के बारे में कोई चर्चा नहीं की गई है। इससे युवाओं में घोर निराशा है।
मध्यम वर्ग पर महंगाई की मार
सीएम ने कहा कि बजट में कई वस्तुओं को महंगा किया गया है। इससे मध्यम वर्ग के लोगों पर भार पड़ेगा। इसके अलावा कृषि, ग्रामीण, सामाजिक, शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार सृजन, अर्थव्यवस्था, ढांचागत क्षेत्र में निवेश, वित्तीय सुधार, सरल कारोबारी माहौल तथा वित्तीय अनुशासन पर जोर तो दिया गया है, लेकिन इसकी दिशा स्पष्ट नहीं की गई है।
वित्त मंत्री ने नहीं लिया पत्र का संज्ञान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर प्रदेश की जरूरतों के मुताबिक केंद्रीय बजट में प्रावधान किए जाने का अनुरोध किया था।
ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों की बची राहत राशि, पूर्वांचल समाजवादी एक्सप्रेस-वे, कानपुर और वाराणसी मेट्रो रेल, हिरनगांव (फीरोजाबाद) और जेवर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए जरूरी रकम के प्रावधान के साथ ही बुंदेलखंड और पूर्वांचल निधि की व्यवस्था का अनुरोध किया था, लेकिन इन पर ध्यान नहीं दिया गया।