रजत जयंती पर सबको साथ लाने की कोशिश में जुटे शिवपाल
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राज्यपाल ने बताया कि सीएम ने न तो कोई चिट्ठी दी है न ही विस्तार पर कोई चर्चा हुई। वहीं सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान सीएम अखिलेश ने राज्यपाल को बहुमत पत्र सौंपा। शिष्टाचारिक भेंट के बीच ही उन्होंने करीब 205 विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को दिया। इसके अलावा 23 अक्तूबर को विधानमंडल दल की बैठक का भी विस्तार दिया। सूत्रों की माने तो राज्यपाल ने भी समर्थन पत्र पर सकारात्मक रुख दिखाया।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश में संवैधानिक संकट न होने की बात कही। बता दें कि रथ यात्रा पर कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग करने के बाद सीएम अखिलेश यादव राज्यपाल राम नाईक से मिलने पहुंचे। वहीं इसी बीच सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव बेटे आदित्य के साथ दिल्ली रवाना हो गए। 5 नवंबर को होने वाली सपा की रजत जयंती में सभी को एक ही मंच पर लाने की रणनीति है। समारोह में शामिल होने के लिए शरद यादव, नीतीश कुमार, लालू और देवगौड़ा को निमंत्रण दिया गया है।
चर्चा में रही सीएम-राज्यपाल की मुलाकात
सीएम अखिलेश और राज्यपाल की मुलाकात पर कई कयास लगाए जा रहे थे। ये भी चर्चा थी कि शिवपाल यादव ने पवन पांडेय को मंत्री पद से के हटाए जाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है, उसी सिलसिले में वह राज्यपाल से मिलने गए हैं।
वहीं ये भी माना जा रहा था कि चार मंत्री पद खाली हुए हैं उन पर पुराने मंत्रियों की बहाली के लिए या फिर उन पदों पर अपने विधायकों को मंत्री बनाने के लिए राज्यपाल से मुलाकात करने गए हैं।
अखिलेश ने 3 नवंबर को होने वाली रथयात्रा के सिलसिले में मंत्री, विधायकों और एमएलसी के साथ मीटिंग की। इस मीटिंग में निकाले गए यूथ विंग के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। मीटिंग के बाद एमएलसी सुनील साजन ने कहा, रथयात्रा का उद्देश्य जनता के बीच जाना है। अखिलेश आज भी मुख्यमंत्री हैं और कल भी रहेंगे।