मुख्तार की पार्टी पर बोले अखिलेश, 'विलय पर पार्टी नेतृत्व का फैसला मंजूर'
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माफिया मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल (कौएद) के सपा में विलय को लेकर खड़े हुए बवंडर पर बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह कहकर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की कि इस मुद्दे पर कहीं कोई नाराजगी नहीं है।
उन्होंने उल्टे मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस खड़ी करने की तोहमत लगा दी। अखिलेश ने कहा, ये पार्टी के अंदर का मामला है और पार्टी जो भी फैसला करेगी वह सब मानेंगे।
सचिवालय एनेक्सी में कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों से रू-ब-रू अखिलेश से जब कौएद के विलय और मुख्तार अंसारी को लेकर नाराजगी के सवाल हुए तो उनके तेवर काफी नरम दिखाई दिए। बोले- कहीं कोई नाराजगी नहीं है। मीडिया के साथियों को मौका मिलता है बहस करने का। जहां तक विलय का सवाल है तो ये हमारी पार्टी का अपना निर्णय है। इस पर पार्टी के अंदर चर्चा होगी और पार्टी जो फैसला करेगी मैं समझता हूं वह सब मानेंगे। तो फिर बलराम यादव की बर्खास्तगी क्यों हुई?
अखिलेश ने कहा, इस विषय पर हम इसलिए कुछ नहीं कहेंगे कि फैसला हो चुका है। उससे भी बड़ा फैसला बाद में हो गया कि मौर्या जी (स्वामी प्रसाद मौर्य) बसपा छोड़कर आ गए।
'स्वामी प्रसाद मौर्य अच्छे व्यक्ति पर गलत दल में थे'
स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर सवालों पर अखिलेश ने कहा, मौर्य जी मजबूत नेता हैं। हमारे साथ सदन में नेता विरोधी दल हैं। सदन में हमारे और उनके बीच बहुत से विषयों पर बहस होती है। अच्छी बात है कि उन्होंने बसपा छोड़ दी।
मौर्य कहां जाएंगे क्या फैसला करेंगे यह उन पर निर्भर है। यह सही है कि उनसे हमारे काफी अच्छे संबंध हैं। सदन में जब कभी बहस होती थी तो मैंने हमेशा सभी विधायकों के सामने कहा कि मौर्य जी अच्छे व्यक्ति हैं लेकिन गलत दल में हैं। उनके बसपा छोड़ने से यह बात साफ भी हो गई है।
मायावती के परिवारवाद के आरोप पर पलटवार
सवाल हुआ कि बसपा प्रमुख मायावती ने सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाया है? अखिलेश ने मजाकिया लहजे में पत्रकारों को बसपा प्रमुख को ‘बुआजी’ कहकर संबोधित करने की सलाह देते हुए कहा, उन्होंने कहा है कि ‘बच्चों के बच्चे बच्चों के बच्चे’ (चुनाव में टिकट देने के संदर्भ में)। पर, उन्हें जानकारी ही नहीं है। हमारे बच्चे तो बहुत छोटे हैं। अभी तो उन्हें कम से कम 12-15 साल लगेंगे वहां तक पहुंचने में। 12-15 साल में पता नहीं क्या परिवर्तन होगा? कौन कहां होगा? ये विरोधी पार्टी के नेता तो आरोप लगाएंगे ही।
मुख्तार को आगरा जेल भेजने का सवाल टाला
आगरा से लखनऊ जेल स्थानांतरित मुख्तार अंसारी को क्या फिर आगरा वापस भेजा जाएगा? इसका जवाब उन्होंने यह कहकर टाल दिया कि ये तमाम फैसले यहां के नहीं कि जिसे लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही सारी बात हो जाए।
यूपी के चुनाव पर सबकी नजर
अखिलेश ने कहा, यूपी का चुनाव बड़ा चुनाव है। एक तरह से देश का चुनाव होने जा रहा है। हर राजनीतिक दल जनता का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है। पिछली बार जनता ने समाजवादियों को समर्थन दिया था। आजादी के बाद पहली बार इतने बड़े पैमाने पर जनसमर्थन देकर सरकार बनाई थी।
कम से कम समाजवादी लोग जनता की भावनाओं व भरोसे पर खरे उतरे हैं। सपा ने लगातार काम किया। घोषणा पत्र लागू किया। विकास की नई-नई चीजें सामने लेकर आए हैं। अब जब हम चुनाव में जा रहे हैं तो विरोधी दल कोशिश करेंगे ही कि हमारा दल सत्ता में न आने पाए। इसीलिए तो वे विरोधी दल हैं और उनका नाम विरोधी पार्टी है।
जिनके पास कोई विकास का मुद्दा नहीं है। जिनके पास कोई खुशहाली का मुद्दा नहीं है वो तो हमें घेरेंगे ही। अब तो विधानसभा की दीवारों पर नारे भी लिख दिए। यूपी पर सबकी नजर होगी।
क्या घटनाक्रम हो रहा है ये आप सब हमसे बेहतर जानते हैं। ड्यूटी के दौरान जो दरोगा व पुलिसकर्मी जिम्मेदारी निभाते हुए शहीद हुए हैं सरकार उनके परिवार की पूरी मदद करेगी।