फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Akhilesh Yadav becomes strong after saying no to Mukhtar Ansari.

मुख्तार अंसारी को रेड सिग्नल दिखाने से बढ़ा सीएम अखिलेश का कद

Mon, 27 Jun 2016 10:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 27 Jun 2016 10:13 AM IST
विज्ञापन
Akhilesh Yadav becomes strong after saying no to Mukhtar Ansari.
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व मुख्तार अंसारी - फोटो : amar ujala

माफिया मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल के सपा में विलय को रेड सिग्नल दिखाने के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के रुख से समाजवादी पार्टी और सरकार में उनका कद बढ़ गया है।

विज्ञापन


चुनावी साल में सीएम ने साफ-सुथरी छवि का संदेश देने के साथ ही यह भी साबित करने की कोशिश की है कि प्रदेश में साढ़े चार सीएम होने के विपक्ष के आरोपों में दम नहीं है। वे फैसले खुद लेते हैं। उनके फैसलों के आगे पार्टी व परिवार को झुकना पड़ा है।
विज्ञापन


कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर अक्सर समाजवादी पार्टी की आलोचना होती है। हाल के दिनों में मथुरा के बाद कैराना मुद्दे पर सपा सरकार की घेराबंदी हुई। संतों की कमेटी ने भी कैराना में गुंडागर्दी की बात स्वीकार की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे दौर में मुख्तार अंसारी के कौमी एकता दल का विलय करते ही सपा और अखिलेश सरकार विरोधियों के निशाने पर आ गए। 21 जून को जिस समय सपा मुख्यालय में कौमी एकता दल के विलय की घोषणा हो रही थी, सीएम जौनपुर में एक कार्यक्रम में थे।

उन्होंने वहीं इस पर आपत्ति जता दी थी लेकिन लखनऊ आते ही उनका विरोध तीखा हो गया। अगले दिन कारागार मंत्री को तलब करके मुख्तार अंसारी को लखनऊ जेल शिफ्ट करने की वजह पूछी। शिवपाल सिंह यादव से विलय पर नाराजगी जताई।

मुलायम के सामने भी जताया था विरोध

Akhilesh Yadav becomes strong after saying no to Mukhtar Ansari.

सीएम यह संदेश देने में सफल रहे कि शिवपाल ने भले ही कौएद अध्यक्ष अफजाल अंसारी और उनके विधायक भाई सिगबतुल्ला अंसारी को सपा में शामिल किया हो लेकिन इस फैसले की उन्हें जानकारी नहीं थी।

उन्होंने विलय का विरोध करके सपा में अपराधियों की एंट्री पर सवालिया निशान लगा दिया। उन्होंने मुलायम सिंह के सामने भी विरोध जताया।

मामला इतना गंभीर हो गया कि कि सपा मुखिया को संसदीय बोर्ड की बैठक बुलानी पड़ी। इसमें अखिलेश के रुख पर पार्टी की शीर्ष नीति निर्धारक कमेटी की मुहर लग गई है।

2012 में किया था डीपी यादव का विरोध
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने चर्चित बाहुबली डीपी यादव को सपा में शामिल करने पर आपत्ति जताई थी। वे अपने राष्ट्रीय परिवर्तन दल का सपा में विलय करना चाहते थे।

अखिलेश उस समय सपा के प्रदेश अध्यक्ष थे। उनके विरोध के चलते डीपी यादव सपा में नहीं आ सके थे। विधानसभा चुनाव में सपा को इसका लाभ मिला था। कुछ ऐसी ही उम्मीद सपा नेता मुख्तार अंसारी को सपा में लेने का विरोध करने पर लगा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed