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अखिलेश बोले: गिद्ध कहकर महाकुंभ के मृतक परिवारों को अपमानित कर रहे सीएम, संवेदनहीनता की पराकाष्ठा

Tue, 25 Feb 2025 10:02 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 25 Feb 2025 10:02 PM IST
सार

Mahakumbh 2025: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि सीएम के बयान संवेदनहीनता की पराकाष्ठा हैं। 

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Akhilesh said: CM is insulting the families of the deceased of Mahakumbh by calling them vultures, the height
योगी आदित्यानाथ और अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री गिद्ध कहकर महाकुंभ में अपनों की खोज कर रहे खोये हुए लोगों और मृतकों के परिवारों को अपमानित कर रहे हैं। महाकुंभ में बड़ी संख्या में अब भी लोग अपनों को खोज रहे हैं। क्या अपनों को ढूंढने वालों को मुख्यमंत्री गिद्ध बोल रहे हैं। यह संवैधानिक पद पर बैठे एक मुख्यमंत्री की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

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अखिलेश यादव ने जारी बयान में कहा कि मुख्यमंत्री गोरखपुर में गिद्ध प्रजनन केंद्र बना रहे हैं। गिद्ध की बात कहकर प्रयागराज महाकुंभ की भगदड़ के पीड़ित और दुखी परिवारों को अपमानित कर रहे है। प्रयागराज महाकुंभ में जो भगदड़ हुई और व्यवस्था खराब हुई, उसके लिए खुद मुख्यमंत्री जिम्मेदार है।
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शेयर बाजार में गिरावट मध्य वर्ग के निवेश को निगल गई
अखिलेश ने कहा कि भारतीय शेयर बाज़ार में जारी गिरावट मध्य वर्ग के निवेश को निगल गई है। सरकार आम आदमी के हित में कोई कदम नहीं उठा रही है।

धर्म की आड़ में असल मुद्दों से ध्यान भटका रही भाजपा : लाल बिहारी

Akhilesh said: CM is insulting the families of the deceased of Mahakumbh by calling them vultures, the height
यूपी विधानसभा (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

 विधान परिषद में बजट पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि पहली बार बजट अभिभाषण की शुरुआत महाकुंभ से हुई। सपा महाकुंभ की पक्षधर है, लेकिन भाजपा ने ऐसे प्रचार किया कि जैसे महाकुंभ उसने ही कराया। प्राचीन परंपरा के आयोजन पर विपक्ष ने सकारात्मक भूमिका निभाते हुए सरकार को सुझाव भी दिए, लेकिन स्तरहीन बयान देकर भाजपा धर्म की आड़ में असल मुद्दों से ध्यान भटका रही है।

उन्होंने कहा कि प्रयागराज में गंगा जल प्रदूषित होने की बात हम नहीं कह रहे, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कह रहा है। इस पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने कहा कि तीन रिपोर्ट आई हैं, सभी को पढ़ें। महाकुंभ में भगदड़ का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार खोए हुए लोगों की सूची उपलब्ध कराए। इस पर अधिष्ठाता डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त ने कहा कि आप प्रमाण दीजिए और खोए हुए लोगों की सूची उपलब्ध कराइए। कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने भी विपक्ष से सूची मांगी।

लाल बिहारी ने कहा कि बजट में ये ब्योरा नहीं दिया है कि 36 लाख करोड़ में से कितना निवेश धरातल पर उतरा। ये भी आंख में धूल झोंकने का प्रयास है। उन्होंने बजट में मनेरगा के मद में ज्यादा राशि न होने की बात उठाई। कहा, प्राथमिक विद्यालयों में पुस्तकें नहीं हैं। मान्यता प्राप्त स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें नहीं मिल रही हैं। उन्होंने मान्यता प्राप्त स्कूलों के बच्चों को भी प्राथमिक विद्यालयों जैसी सुविधाएं देने की मांग उठाई।

उन्होंने मदरसों को मिलने वाला अनुदान खत्म करने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धन्य हैं जिन्होंने कहा कि मदरसा छात्रों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में कंप्यूटर होगा, लेकिन मदरसों को मिलने वाला अनुदान ही खत्म कर दिया गया। उन्होंने हटाए गए दो हजार तदर्थ शिक्षकों की बहाल की मांग की।

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वित्तविहीन शिक्षकों की स्थिति मनरेगा श्रमिकों से भी बदतर

नेता प्रतिपक्ष ने कहा, वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों की स्थिति मनरेगा मजदूर से भी बदतर है। ये शिक्षक 2000 से अधिकतम 10 हजार रुपये पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों को प्रबंधकों का गुलाम बना दिया गया है। गुलाम शब्द पर हंगामा हो गया और इसे वापस लेने की मांग की गई। शिक्षक नेताओं पर कटाक्ष करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सदन में मुद्दे उठाने की रिकार्डिंग शिक्षकों को भेजते हैं, लेकिन जब सदन में शिक्षकों के हित की बात होती है तो घुटने टेककर भाग जाते हैं। इस पर अधिष्ठाता ने कहा कि जिनके लिए आप कह रहे हैं वे आपके साथ ही बैठते हैं।

प्रधानाचार्यों की नियुक्ति में लागू हो आरक्षण
लाल बिहारी ने कहा कि प्रधानाचार्यों की नियुक्ति में भी आरक्षण की व्यवस्था लागू की जाए। पहले प्रधानाचार्यों के नियुक्ति की एकल व्यवस्था थी। अब शिक्षा सेवा चयन आयोग से इनकी सामूहिक नियुक्ति होती है। इसलिए आरक्षण भी लागू किया जाए। जेईई-सीयूपी की परीक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब शून्य अंक पाने वाले को भी प्रवेश दिया जा रहा है तो प्रवेश परीक्षा कराई ही क्यों जा रही है। उन्होंने आयुष बोर्ड में 6-6 महीने से सदस्य न होने का भी मुद्दा उठाया।

5 मार्च तक चलेगी विधान परिषद
विधान परिषद की कार्यवाही 5 मार्च तक चलेगी। अधिष्ठाता डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त ने प्रत्येक दिन की कार्यवाही जारी की। 26 और 27 फरवरी को अवकाश रहेगा। 28 फरवरी को बजट पर चर्चा होगी। 1 और 2 मार्च को अवकाश रहेगा। 3 मार्च को बजट व विधायी चर्चा होगी। 4 मार्च को बजट पर चर्चा जारी रहेगी। 5 मार्च को बजट पर चर्चा के बाद उप्र. विनियोग विधेयक पेश किया जाएगा। इसी के साथ विधान परिषद 28 फरवरी तक के लिए स्थगित हो गई।
 
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