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....तो यूपीए से नाता तोड़ सकते हैं अजीत सिंह

Sat, 01 Mar 2014 12:25 PM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 01 Mar 2014 12:25 PM IST
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ajit singh did not reach to cabinet meeting

आचार संहिता की तलवार लटकने का डर और जाट आरक्षण में देरी ने राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और कांग्रेस के कई जाट नेताओं की बेचैनी बढ़ा दी।

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गुरुवार रात से ही दिल्ली में इस मुद्दे पर सियासी गरमाहट रही। एजेंडे में जाट रिजर्वेशन न होने के कारण अजित सिंह शुक्रवार को कैबिनेट की मीटिंग में शामिल नहीं हुए।
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उन्होंने एक मार्च को अमरोहा में प्रस्तावित रैली भी स्थगित कर दी।

कुछ और नेताओं के साथ मिलकर बनाए गए दबाव के बाद जाट आरक्षण को लेकर देर शाम ग्रुप ऑफ मिनिस्टर की बैठक हुई।

टूट सकता है नाता

ajit singh did not reach to cabinet meeting

आचार संहिता लगने से पहले जाटों को आरक्षण देने पर फैसला नहीं हुआ तो चौधरी अजित सिंह यूपीए से नाता तोड़ सकते हैं।

यूपीए में शामिल होते वक्त उन्होंने जाट आरक्षण के मुद्दे को सबसे महत्वपूर्ण बताया था। उन्हें मंत्री बने करीब दो साल हो गए लेकिन अभी तक आरक्षण पर कोई निर्णय नहीं हो सका।

ऐसे में यह मामला टला तो उनका यूपीए में रहना मुश्किल रहेगा। संभावना जताई जा रही है कि अगले तीन-चार दिनों में इस मुद्दे पर स्थिति साफ हो जाएगी।

टूटा अजित का विश्वास

ajit singh did not reach to cabinet meeting

दिल्ली व उसके नजदीकी वेस्ट यूपी, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब आदि में जाटों की ठीकठाक तादाद है।

इन राज्यों में जाटों को राज्य स्तर पर तो आरक्षण मिला हुआ है लेकिन वे पिछड़ी जातियों की केंद्रीय सूची में शामिल नहीं हैं। लिहाजा उन्हें केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण का लाभ नहीं मिलता।

इसके लिए जाट लंबे अरसे से आंदोलन कर रहे हैं। केंद्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने जाटों के आरक्षण के मुद्दे पर सुनवाई करके दो दिन पहले केंद्र सरकार को रिपोर्ट दे दी।

रालोद को भरोसा था कि आचार संहिता लगने से पहले कैबिनेट इस रिपोर्ट पर विचार कर जाटों को आरक्षण देने पर फैसला ले लेगी।

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जाट फैक्टर पर ही ‌टिका है रालोद का भविष्य

ajit singh did not reach to cabinet meeting

गुरुवार को कैबिनेट की बैठक का एजेंडा जारी हुआ तो उसमें जाटों को पिछड़े वर्ग की केंद्रीय सूची में शामिल करने का प्रस्ताव नहीं था।

इससे अजित सिंह और कांग्रेस के जाट नेताओं की नींद उड़ गई। चूंकि मार्च के पहले हफ्ते में आचार संहिता लगना प्रस्तावित है, इसलिए उन्हें आरक्षण का मुद्दा लटकने का अंदेशा सता रहा है।

दंगा प्रभावित वेस्ट यूपी में इस मुद्दे पर रालोद की संभावनाएं काफी हद तक टिकी हुई हैं। अजित सिंह की बेचैनी का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उन्होंने तमाम तैयारियों के बावजूद एक मार्च को अमरोहा में प्रस्तावित रैली स्थगित कर दी।

उन्होंने शुक्रवार को दिन भर किसी से बातचीत तक नहीं की। जयंत चौधरी ने भी फोन रिसीव नहीं किए।

जाट आरक्षण के मुद्दे पर लामबंदी के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी गुरुवार देर रात चौधरी अजित सिंह से मिलने उनके निवास पर गए।

अजित, हुड्डा और कुछ अन्य नेताओं के दबाव के बाद शुक्रवार शाम ग्रुप ऑफ मिनिस्टर की बैठक हुई। उन्हें अब भी उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले आरक्षण पर फैसला हो जाएगा।

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