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Lucknow News: एआई से सजी ऐशबाग की रामलीला

Tue, 20 Oct 2026 02:01 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 20 Oct 2026 02:01 AM IST
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Aishbaghs Ramlila, enhanced by AI
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विनीत चतुर्वेदी

लखनऊ। 500 साल से ज्यादा पुरानी ऐशबाग की रामलीला इस बार रामकथा के साथ तकनीक का नया अनुभव भी दे रही है। मंच पर रामायण के प्रसंगों के साथ बड़ी एलईडी स्क्रीन, बेहतर साउंड और रोशनी का प्रभाव है तो वहीं जुलूस में प्रयोग किया गया 12 फीट ऊंचा रोबोटिक हाथी भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है। मंचन में घोड़े और ऊंट भी नजर आए। मंगलवार को दशहरे पर 75 फुट ऊंचे चलायमान रावण के पुतले का दहन होगा। 17 से 20 अक्तूबर तक एआई आधारित विशेष प्रस्तुतियां रामकथा को नए अंदाज में दर्शकों के सामने रख रही हैं। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष हरीश चंद्र अग्रवाल व उपाध्यक्ष शुभम अग्रवाल ने बताया कि रामलीला से पहले, रामायण पर आधारित विशेष एआई प्रस्तुतियां हो रही हैं। इनमें दृश्य प्रभाव और खास ध्वनि का इस्तेमाल किया जा रहा है। तकनीक के इस प्रयोग का उद्देश्य मूल कथा को बदले बिना प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाना है। कोलकाता के 50 कलाकार रामायण के प्रसंगों का मंचन कर रहे हैं। निर्देशक भास्कर बोस के अनुसार कथा में बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि संवादों को चुस्त बनाने के साथ रोशनी और ध्वनि का बेहतर इस्तेमाल किया गया है। दर्शकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बैठने की क्षमता सात हजार से बढ़ाकर 7,500 की गई है।


ऐतिहासिक ऐशबाग रामलीला की परंपरा करीब 400-500 साल पुरानी मानी जाती है। यह 16वीं शताब्दी में संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास द्वारा शुरू की हुई मानी जाती है। अवध के नवाबों ने भूमि दान देकर इस परंपरा को संरक्षण दिया।
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