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एयरपोर्ट लिंक फ्लाईओवर : जमीन मिली नहीं और 135 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर शुरू करा दिया काम

Thu, 10 Jun 2021 02:18 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 10 Jun 2021 02:18 AM IST
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airport link flyower dispute in lucknow
लखनऊ। हवा में पुल कैसे बनता है उसका नमूना है एयरपोर्ट लिंक प्रोजेक्ट...। पीडब्ल्यूडी और सेतु निगम के अधिकारियों ने बिना सही योजना के ही 135 करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम शुरू करा दिया। जबकि इसके लिए जमीन तक नहीं मिली थी। एलडीए के अफसरों ने इस प्रोजेक्ट को त्रिशंकु बनाने का काम किया। आननफानन में काम का नतीजा है कि यह 73 प्रतिशत काम होने के बाद अब एलीवेटेड फ्लाईओवर हवा में अटका हुआ है। जबकि सेतु निगम को इसी महीने तक काम पूरा करना था। अब देरी होने से इसकी लागत लागत भी बढ़ेगी।
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सेतु निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक करीब 1125 मीटर लंबे एलीवेटेड फ्लाईओवर के निर्माण के लिए अगस्त 2018 में अनुमति मिली। 134.69 करोड़ रुपये लागत के इस प्रोजेक्ट पर आनन-फानन काम भी शुरू करा दिया गया। 2019 में जब काम शुरू हुआ उस समय भी अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था-जमीनों पर कब्जा कैसे मिलेगा? जमीन मिलने में शुरू से ही मुश्किलें आईं तो डिजाइन बदल दिया गया। डिजाइन में रिटेनिंग वॉल की जगह एलीवेटेड और पिलर्स कर दिया गया। इतना सबकुछ होने के बाद भी बिना जमीन मिले ही सेतु निगम अधिकारियों ने, ‘बाद में हो ही जाएगा’, के तर्ज पर शहीद पथ के पास मौजूद जमीन पर ही निर्माण शुरू करा दिया।
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जमीन के लिए पहले हां, अब ना
जुलाई 2020 में तत्कालीन प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी ने उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य के निर्देश पर जमीन विवाद को हल कराना शुरू किया। उस समय भी पहले एलडीए ने जमीनों का मुआवजा दिए जाने की मांग रखी। हालांकि, पीडब्ल्यूडी के विभागाध्यक्ष के फ्लाईओवर के बनने से सभी के लाभ के प्रस्ताव पर तत्कालीन एलडीए वीसी प्रभु एन सिंह से मुफ्त में जमीन दिए जाने पर सहमति बना ली गई। पूर्व वीसी का मानना था कि यह जनहित का प्रोजेक्ट है। सहमति के बाद एलडीए के मांगे गए 19.64 करोड़ रुपये की कटौती कर केवल 17.40 करोड़ रुपए ही मुआवजा के लिए शासन ने जारी कर दिए। यह 17.40 करोड़ रुपये किसानों की जमीनों के मुआवजा के लिए है। अब मौजूदा वीसी अभिषेक प्रकाश ने भूखंडों की फ्रीहोल्ड रजिस्ट्री होने से स्वामित्व आवंटियों का होने का तर्क देते हुए दोगुने मुआवजे की मांग भेज दी। जमीनों पर कब्जा भी एलडीए ने नहीं दिलाया। वीसी अभिषेक प्रकाश ने प्रभावित आवासीय व ग्रुप हाउसिंग भूखंड की कीमत के दोगुने यानी 39.28 करोड़ रुपये मुआवजा की मांग अपर मुख्य सचिव वित्त को भेज दी। एलडीए वीसी का कहना है कि इसमें पार्क व सड़क की जमीन की कीमतें शामिल नहीं हैं। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि एलडीए की सहमति मिलने के बाद केवल किसानों का मुआवजा की दरों को ही तय किया जाना बाकी था। हालांकि, यह दरें अभी तक तय कर किसानों से जमीन नहीं ली जा सकी है।
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प्रोजेक्ट में देरी के ये जिम्मेदार
वीके सिंह, पूर्व विभागाध्यक्ष, पीडब्ल्यूडी
इन्होंने एलडीए के तकनीकी पहलुओं को जाने बिना और बगैर मुआवजा जमीनों पर सहमति दिए ही फ्लाईओवर को बनवाने का प्रस्ताव रखा। काम शुरू कराने के लिए भी अपनी सहमति दे दी।
- प्रभु एन सिंह, पूर्व वीसी, एलडीए
इन्होंने जमीन का विवाद हल कराते समय तकनीकी पक्षों पर ध्यान ही नहीं दिया। जनहित के प्रोजेक्ट के लिए जमीन देने के लिए आवंटियों के समायोजन की तैयारी कर दी। जबकि, एलडीए फ्रीहोल्ड रजिस्ट्री कर चुका था।
- अभिषेक प्रकाश, वीसी, एलडीए
इन्होंने अपने ही पूर्व समकक्ष के फैसले को पलटकर पूरे प्रोजेक्ट को फंसा दिया। जबकि, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि 14 में से बमुश्किल छह आवंटियों को ही समायोजन कर दूसरा भूखंड देना होगा। प्रोजेक्ट डिजाइन में अधिकतम भूखंड को बचाने का प्रयास किया।
- अरविंद श्रीवास्तव, एमडी सेतु निगम
इन्होंने शुरू सेे ही प्रोजेक्ट में अहम भूमिका निभाई। बिना जमीनों पर कब्जा मिले ही निर्माण शुरू करा दिया। जबकि इन्हें भलीभांति पता था कि पहले भी जमीन के विवाद में सेतु निगम के ही कई प्रोजेक्ट सेतु निगम के लखनऊ में ही फंस चुके हैं।
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जमीन विवाद में पिपराघाट, कुकरैल, मल्हौर पुल की बढ़ी थीं कीमतें, पर इन सबसे सीखा ही नहीं
जमीन के विवाद का हल न निकल पाने से शहर के तीन फ्लाईओवर की लागत दोगुनी तक हो चुकी है। ऐसा तीन पुल में खुद पीडब्ल्यूडी की सहयोगी संस्था सेतु निगम ही कर चुकी है। कुकरैल पुल जहां 48 करोड़ रुपये स्वीकृत लागत से बढ़कर 82 करोड़ में पूरा हुआ। मल्हौर पुल 16 करोड़ की जगह 31 करोड़ रुपये में बना। इसके अलावा पिपराघाट पुल 39 करोड़ की जगह 60 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुआ। इसके बाद भी अधिकारियों की लापरवाही जारी है।
एक महीने में कब्जा लेकर काम शुरू कराने की होगी कोशिश
अपर मुख्य सचिव पीडब्ल्यूडी से जमीनों के अधिग्रहण पर सभी विभागों की एक बैठक बुलाने की मांग की है। पूर्व में भी प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी की ही बैठक में जमीनों के अधिग्रहण पर सहमति बनी थी। हमारी कोशिश है कि अगले एक महीने में पूरे प्रकरण को खत्म कर जमीनों पर कब्जा लेकर काम शुरू करा दिया जाए।

- अरविंद श्रीवास्तव, एमडी, सेतु निगम
पहले जो फैसला हुआ उसमें आवंटियों का हित नहीं देखा गया
एलडीए मानसरोवर योजना के आवंटियों की फ्रीहोल्ड रजिस्ट्री कर चुका है। इन आवंटियों का अब भूखंडों पर स्वामित्व है। ऐसे में उनको मुआवजा दिए बिना जमीन वापस नहीं ली जा सकती है। एलडीए ने पीडब्ल्यूडी को विकल्प दिया है कि वह सीधे भी आवंटियों को पैसा दे सकते हैं। एलडीए के माध्यम से भी पैसा दिए जाने का विकल्प उनके पास है। पूरे प्रकरण से पीडब्ल्यूडी को अवगत करा दिया गया है। पूर्व में जो फैसला हुआ वह आवंटियों के हितों को देखते हुए ठीक नहीं था।
- अभिषेक प्रकाश, वीसी, एलडीए
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