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Lucknow News: एफआईआर की मिली चेतावनी तो आरटीई के तहत दाखिले लेने लगे बड़े स्कूल

Wed, 28 May 2025 01:55 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 28 May 2025 01:55 AM IST
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After receiving the warning of FIR, big schools started taking admissions under RTE
लखनऊ। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत चयनित बच्चों को निशुल्क प्रवेश न देने वाले शहर के बड़े निजी स्कूलों पर जब एफआईआर की नौबत आ गई तो उन्होंने दाखिला लेना शुरू कर दिया है। सिटी मांटेसरी स्कूल प्रबंधन ने डीएम व बीएसए की सख्ती के बाद इस सत्र में पहली बार 14 बच्चों को प्रवेश दिया है। यहां कुल 35 बच्चों को एडमिशन मिलना है। ब्राइटवे, क्राइस्ट चर्च और सेंट एंथोनी स्कूल ने भी दाखिले लिए हैं। वहीं, आधा दर्जन निजी स्कूलों ने अभी प्रवेश पाए बच्चों का डाटा सार्वजनिक नहीं किया है। बता दें कि आरटीई अधिनियम लागू होने के बाद राजधानी में पहली बार 12,550 बच्चों को दाखिला मिल सका है। बीते वर्षों में यह संख्या सात से साढ़े सात हजार के बीच ही रही है।आरटीई के तहत चयनित बच्चों की आवाज अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाई, जिसके बाद शिक्षा विभाग व जिला प्रशासन सक्रिय हुआ।
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सीएमएस ने इन 14 बच्चों को दिया प्रवेश

अलीगंज ब्रांच में एंजेल वर्मा, विराज शर्मा, राजाजीपुरम में प्रत्यक्ष दीक्षित, राजेंद्रनगर में अंश, स्टेशन रोड पर तनिष्का गुप्ता, अभिनेंद्र प्रताप सिंह, आनंदनगर में सान्वी कुतर, राजाजीपुरम प्रथम में सिद्धांत राजपूत, गोमतीनगर में अर्श साहू, अलीगंज प्रथम कैंपस में दीक्षांत चौधरी, चौक शाखा में असद, राजेंद्रनगर द्वितीय शाखा में शौर्य खन्ना, अग्रिम मिश्रा, इंदिरानगर में युग वर्मा को प्रवेश मिला है। हालांकि, 25 प्रतिशत सीटों को देंखे तो बच्चों को एक प्रतिशत सीट पर भी प्रवेश नहीं मिला है। इस तरह से अभी भी ये आरटीई एक्ट का उल्लघंन ही है।
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प्रवेश दिया, पर मानक पूरे नहीं
ब्राइटवे अलीगंज में दो, क्राइस्ट चर्च गीतापल्ली में दो, सेंट एंथोनी पारा में आठ, टेंडर हर्ट स्कूल में तीन बच्चों को प्रवेश दिया गया है। 25 प्रतिशत सीटों के सापेक्ष यह संख्या नहीं के बराबर है।
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इस तरह निर्धारित होता है सीटों का प्रतिशत

उदाहरण के तौर पर प्री नर्सरी व कक्षा एक में यदि किसी विद्यालय के एक सेक्शन में 100 बच्चे पढ़ रहे हैं तो उसमें 25 प्रतिशत सीटें आरटीई के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। कई बार स्कूल प्रबंधक ये जानकारी शिक्षा विभाग को देने से बचते हैं कि उनके यहां एक कक्षा का संचालन कितने सेक्शन में हो रहा है। हालांकि, यू-डायस और अपार सिस्टम लागू होने से अब इसे छिपाना आसान नहीं होगा।


15 हजार दाखिलों का लक्ष्य
18 हजार बच्चों के सापेक्ष 15 हजार बच्चों का निशुल्क प्रवेश कराने का लक्ष्य है। अभी तक 12,550 बच्चों का प्रवेश हो चुका है। वहीं, 3000 जिन बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधकों के रवैये से परेशान होकर प्रवेश से किनारा किया है, उनका भी फीडबैक लिया जा रहा है। -राम प्रवेश, बीएसए


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