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मोहर्रम का चांद होते ही शहर में बिछ गई फर्श-ए-अजा, आज निकलेगा जरीह का जुलूस

Sun, 01 Sep 2019 11:16 AM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Sun, 01 Sep 2019 11:16 AM IST
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after moharrum moon seen farsh e aza laid, zarih juloos today
मोहर्रम
कर्बला के शहीदों का गम मनाने के लिये जरीह और तबर्रुकात के बाजार के सज गये हैं। रंगीन कागज से लेकर तांबे, पीतल और चांदी की जरीह (ताजिये) अजाखानों को रोशन करने के लिये तैयार हो चुके हैं। अजादार अलम, पटके, हथकड़ी, मन्नती फल आदि तबर्रुकात से इमाम हुसैन और उनके साथियों को पुरसा देंगे।
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मोहर्रम का चांद होते ही कर्बला में हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों के शहीदों होने का गम मनाने के लिये अजाखाने सजना शुरू हो गये हैं। अजाखानों को जरीह के साथ ही हजरत अब्बास की निशानी अलम, अली असगर का झूला आदि निशानियां रोशन करेंगी। अजाखानों को सजाने के लिये रंगीन कागज से बनी मन्नती, पंचगुम्जा, अदगजी, सवा गजी तक जरीह तैयार है।
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वहीं तांबे, पीतल और चांदी की जरीह के साथ अलम, हथकड़ी, इमाम हुसैन की सवारी दुलदुल के जेवरों के बाजार भी सजे हैं। इन निशानियों और तमाम तबर्रुकात के जरिये इमाम हुसैन और उनके सार्थियों को पुरसा दिया जाएगा।
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आज निकलेगा शाही जरीह का जुलूस
मोम की शाही जरीह का जुलूस रविवार की शाम बड़े इमामबाड़े से निकाला जाएगा। नवाबी रवायत के अनुसार शाही जरीह का जुलूस गूंजती मातमी शहनाई के बीच निकाला जाएगा। इस अवसर पर अंजुमन शब्बीरिया के मातमदार नौहा पढ़कर मातम करेंगे। बड़े इमामबाड़े से शाम पांच बजे निकलने वाले इस जुलूस से पहले आसफी इमामबाड़े में मजलिस आयोजित होगी। मजलिस के बाद मोम की शाही जरीह का जुलूस शाम 6 बजे बड़े इमामबाड़े से निकाला जाएगा जो देर रात छोटे इमामबाड़े पहुंच कर सम्पन्न होगा।

चांदी की जरीह 2500 से एक लाख रूपये

मोहर्रुम में जरीह यानि ताजिये का बेहद अहमियत है। अकीदतमंद अजाखानों में अपने हैसियत के मुताबिक जरीह सजाकर हजरत इमाम हुसैन को पुरसा देते हैं। बाजार में कागज से लेकर चांदी तक की जरीह उपलब्ध हैं। पारचे वाली गली स्थित जव्वार हुसैन ज्वैलर्स के मालिक दिलबर हुसैन के पास 30 ग्राम से लेकर एक किलों तक चांदी की जरीह मौजूद है। वो बताते हैं इनकी कीमत 2500 रूपये से लेकर एक लाख रूपये तक है। उन्होंने बताया कि चांदी की शबीह के दाम 60 रूपये प्रतिग्राम के हिसाब से उनके भारत के मुताबिक तय होते हैं।

दुलदुल के जेवर की कीमत पांच लाख रूपये 
दिलबर हुसैन के पास हजरत इमाम हुसैन की सवारी दुलदुल के जेवर उनके पास पांच लाख रूपये में मौजूद हैं। दुलदुल के चांदी के पूरे जेवर, तलवार, ढाल का वजन करीब 8 किलोग्राम है। उन्होंने बताया कि चांदी का दुलदुल की शबीह 19 हजर 500 रूपये में उपलब्ध है। अलम के साथ लगने वाले पटके 500 रूपये से 3 हजार रूपये तक कीमत में उपलब्ध हैं। 
 

रवायती हैं रंगीन कागजों से बनी जरीह

मोहर्रम में हजरत इमाम हुसैन को पुरसा देने के लिये रंगीन कागजों से बनी जरीह की रवायत है। रौजा-ए-काजमैन, दरगाह हजरत अब्बास, सुलतानुल मदारिस में इनका बाजार भी सजा है। काजमैन निवासी जरीह के कारीगर मोहम्मद अन्ने बताते है कि पुश्तों से जरीह बनाने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि मन्नती छोटे ताजिये 10 रूपये लेकर 50 रूपये में मिल रहे हैं जबकि चार फीट ऊंची बाल्टी जरीह 500 से 700 रूपये, अदगजी 800 से 1000 रूपये रूपया जरीह जिसकी ऊंचाई 2000 रूपये 2200 रूपये में मिल रही है। उन्होंने बताया कि पांच गुम्बदों वाली पंचगुम्जा जरीह की कीमत 4000 से 4500 रूपये है। जबकि नौ गुम्बदों वाली जाफरी जरीह 5 से 6 हजार रूपये में है।

कुरान की आयतों से सजाएं इमामबाड़े
मोहर्रम में इमामबाड़ों व अजाखानों को सजाने या फिर किसी को देने के लिये कुरान की आयतों वाले फ्रेम भी बाजार में अपनी पहुंच बनाए हुये हैं। तहसीन अली खां मस्जिद के बाहर नकी ग्लास हाउस के मोहम्मद नकी के पास 60 रूपये से 500 रूपये तक कीमत के फ्रेम मौजूद हैं। मोहर्रम में दुआ की किताबों की मांग भी बढ़ जाती है। 14 सितारे, नहजुल बलागाह, मजलिस व मर्सिया की किताबों की बिक्री भी बढ़ चुकी है। 
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