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65 साल का स्टूडेंट 44 साल बाद बना‘टॉपर'

Sun, 29 Nov 2015 09:50 AM IST
Updated Sun, 29 Nov 2015 09:50 AM IST
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after 44 years a student become topper by rti

टॉपर का हक पाने के लिए 44 साल तक लड़े। इस दौरान प्रोफेसर बन गए। पढ़ाते-पढ़ाते रिटायर भी हो गए। पर हक पाने का उनका जज्बा कम नहीं हुआ। आखिरकार 65 साल की उम्र में उन्हें अपना हक मिल ही गया।

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शनिवार को लखनऊ यूनिवर्सिटी ने अपने ही रिटायर्ड प्रोफेसर अनिल कुमार सिंह को बुलाकर एम. रमन नायर मेमोरियल गोल्ड मेडल से नवाजा। प्रो. अनिल एलयू के ही छात्र रहे। यहीं से 1971 में एमएससी किया।
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इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री में सर्वाधिक अंक हासिल किए। पर, उस साल दीक्षांत समारोह नहीं हुआ तो उन्हें गोल्ड मेडल नहीं मिल सका। टॉपर का रुतबा न मिलना प्रो. सिंह को सालता रहा। वे सालों तक इसकी लड़ाई लड़ते रहे।
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अलग-अलग परीक्षा नियंत्रकों से मुलाकात कर अपना हक मांगा, लेकिन सबने कहा कि डिग्री दे दी गई है। दीक्षांत नहीं हुआ इसलिए मेडल नहीं दिया जाएगा। रिटायर होने के बाद उन्होंने एलयू परिनियमावली का अध्ययन किया और आरटीआई दाखिल कर अपना दावा ठोका। आखिरकार परीक्षा नियंत्रक एके शुक्ला ने उन्हें बुलाकर उनके ‘हक’ से सम्मानित किया।

कैसे किया दावा

एलयू की प्रथम परिनियमावली की धारा 15 (05) में साफ लिखा है कि यदि किसी साल किसी वजह से दीक्षांत समारोह का आयोजन नहीं हो पाता है तो उस वर्ष के छात्र-छात्राओं को उनका डिग्री, डिप्लोमा तथा मेधावी छात्र-छात्राओं को उनके मेडल रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजे जाएंगे।

प्रो. अनिल ने इसी को आधार बनाकर 24 मार्च, 2015 को एलयू में आरटीआई दाखिल किया। पूछा कि इस धारा का पालन विश्वविद्यालय करता है या नहीं? एलयू ने 23 जुलाई को जवाब दिया कि यदि आवेदन किया जाए तो डिग्री व मेडल दोनों दिए जाएंगे। इसके बाद उन्होंने आवेदन कर अपना हक हासिल किया।

बेटी के हक के लिए भी एलयू से भिड़ गए थे प्रो. अनिल

after 44 years a student become topper by rti

एलयू के 65 साल के रिटायर्ड प्रो. अनिल कुमार सिंह सिर्फ अपने हक के लिए ही नहीं, बेटी के हक के लिए भी एलयू से भिड़ गए थे। वर्ष 2004 में एलयू प्रशासन ने उनकी बेटी व एंथ्रोपोलॉजी की टॉपर ऐश्वर्या सिंह को चांसलर रजत पदक के लिए चुना था। वहीं, पॉलिटिकल साइंस की टॉपर पूजा पांडेय को चांसलर गोल्ड मेडल के लिए चुना था।

तब, प्रो. सिंह ने विवि के फैसले को एक पिता की हैसियत से चुनौती दी। उनका तर्क था कि ऐश्वर्या का रिकॉर्ड पूजा से बेहतर है। विवि अधिकारियों ने उनकी नहीं सुनी, तो उन्होंने राजभवन का दरवाजा खटखटाया।

राजभवन ने चांसलर पदक वितरण पर रोक लगा दी और हाईकोर्ट के जज की अध्यक्षता में जांच को कमेटी बैठाई। बाद में ऐश्वर्या को चांसलर गोल्ड मेडल के लिए अर्ह घोषित किया गया। ऐश्वर्या आज आईएएस अफसर है और सिक्किम के पश्चिम जिले की डीएम है।

प्रो. अनिल कुमार सिंह ने 1971 में एमएससी पास करने के बाद वर्ष 1976 में लखनऊ विश्वविद्यालय से ही पीएचडी की थी। उसी वर्ष लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज में उन्हें नौकरी मिल गई थी।

बाद में 31 मार्च 1979 को उनका चयन लविवि के रसायन विभाग में प्रवक्ता पद पर हो गया। इसके बाद लविवि में वह प्रोफेसर बने और 30 जून 2012 को सेवानिवृत्त हो गए। रिटायर होने के बाद नए सिरे से अपना मेडल पाने की लड़ाई लड़ी।


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