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करोड़ों का बिल, फिर भी जान बचाना मुश्किल

Sat, 23 Oct 2021 01:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 23 Oct 2021 01:48 AM IST
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advance life support ambulance without vantilator
अति गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्ट पर अस्पताल पहुंचाने वाली एएलएस एंबुलेंस खुद बदहाल हैं। एंबुलेंस के वेंटिलेटर तक खराब पड़े हैं। ऐसे में मरीजों को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के जरिए करोड़ों रुपये का भुगतान हर माह कंपनी को किया जा रहा है, मगर एंबुलेंस की मरम्मत तक नहीं कराई जाती।
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लखीमपुर गोला निवासी जफीना बेगम (50) की गुरुवार रात अचानक हालत बिगड़ गई। परिजन उन्हें जिला अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने पहले उन्हें भर्ती कर लिया। मगर बाद में मरीज की हालत गंभीर बताकर उसे एडवांस लाइफ स्पोर्ट वाली एंबुलेंस से शुक्रवार दोपहर ट्रॉमा भेजा गया। वहां पर डॉक्टरों ने बेड खाली न होने की बात कहकर बलरामपुर अस्पताल भेजा। दोपहर करीब तीन बजे एंबुलेंस बलरामपुर अस्पताल इमरजेंसी में मरीज को लेकर आई। अस्पताल स्टाफ ने एंबुलेंस स्ट्रेचर पर मरीज को लाने को कहा तो ईएमटी ने स्ट्रेचर का पहिया टूटा होने की बात कही। इसी बीच इमरजेंसी से ऑक्सीजन सिलेंडर व स्ट्रेचर मंगाकर मरीज को अंदर शिफ्ट कराया गया। इतना ही नहीं पूरी एंबुलेंस कंडम नजर आ रही थी। हालांकि कंपनी ने दावा किया कि छह घंटे बाद उक्त एंबुलेंस के वेंटिलेटर सिस्टम की मरम्मत करा दी गई।
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वेंटिलेटर सिस्टम भी ध्वस्त मिला
जिस एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस से मरीज को लखनऊ लाया गया था, उसका वेंटिलेटर सिस्टम भी ध्वस्त था। ऐसे में जरूरत होने पर मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट तक नहीं मिल पाएगा। सरकार अति गंभीर मरीजों को अस्पताल तक ले जाने के लिए वेंटिलेटर सपोर्ट वाली एंबुलेंस मुहैया कराती है, मगर मरम्मत न होने से इनके कई पार्ट्स खराब हो चुके हैं।
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एंबुलेंस का नहीं हो रहा मेंटेनेंस
एएलएस एंबुलेंस मेंटेनेंस की जिम्मेदारी जिगित्सा हेल्थ केयर लिमिटेड की है। मगर कंपनी एंबुलेंस को दुरुस्त नहीं करा रही। एक दो नहीं बल्कि कई एंबुलेंस की स्थिति खराब है। अहम बात यह है कि एनएचएम के जरिए कंपनी को जारी किए जा रहे बजट में मेंटेनेंस का भी काम शामिल होता है।

सरकार के जरिए हैंडओवर एंबुलेंस में से कुछ एंबुलेंस और मेडिकल उपकरण रिप्लेसमेंट प्रक्रिया में हैं। हम प्रशासन के मार्गदर्शन में जरूरी उपकरणों पर लगातार काम कर रहे हैं।
- दीपक, प्रोजेक्ट हेड, जिगित्सा हेल्थ केयर लिमिटेड
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