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यूपीः श्रमिकों के हित में चार में से तीन कानून खत्म न करने की सिफारिश, पर मुख्य सचिव श्रम ने भेजी श्रमायुक्त की रिपोर्ट

Tue, 29 Dec 2020 10:59 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 29 Dec 2020 10:59 AM IST
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Additional Chief Secretary Labor sent the report of Labor Commissioner to Additional Chief Secretary Industrial Development
श्रम कानून - फोटो : social media

श्रम विभाग ने श्रमिकों के हितों का हवाला देते हुए चार में से उन तीन श्रम कानूनों को बरकरार रखने की जरूरत बताई है, जिन्हें केंद्र सरकार ने खत्म करने या दूसरे अधिनियमों में शामिल करने का सुझाव दिया था। अपर मुख्य सचिव श्रम सुरेश चंद्रा ने इस संबंध में श्रमायुक्त की रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग आलोक कुमार को भेज दी है।

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जिन तीन कानूनों को बनाए रखने की सिफारिश की गई है, उनमें श्रमिकों को समय पर वेतन अदायगी सुनिश्चित करने, राष्ट्रीय पर्वों पर अवकाश, कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने व श्रम कल्याण निधि के प्रावधान शामिल हैं।
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केंद्र सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग ने निवेश प्रोत्साहन के लिहाज से ‘नियामक व अनुपालन’ से जुड़ी मुश्किलों को आसान करने के लिए मौजूदा अधिनियमों व नियमों का परीक्षण करने का निर्देश दिया था। इनमें अनुपयोगी प्रतीत होने वाले अधिनियमों व नियमों को समाप्त करने या अन्य अधिनियमों में समाहित करने को कहा था।
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श्रम विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यूपी औद्योगिक विवाद अधिनियम-1947 को समाप्त करने की सिफारिश शासन को भेज दी गई है क्योंकि इसके प्रावधान केंद्र सरकार के औद्योगिक संबंध संहिता-2020 में शामिल हैं।
 

औद्योगिक अधिष्ठान (राष्ट्रीय अवकाश) अधिनियम-1961

यह अधिनियम गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस व गांधी जयंती के दिवसों में अवकाश देने के लिए बनाया गया था। केंद्र के वेतन संहिता-2019, औद्योगिक श्रम संहिता-2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशाएं संहिता-2020 में राष्ट्रीय पर्वों के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में इस अधिनियम को समाप्त किया जाना औचित्यपूर्ण नहीं है।

यूपी औद्योगिक शांति (मजदूरी का यथासमय संदाय) अधिनियम-1978
इस अधिनियम में वृहद औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों को समय पर वेतन अदायगी सुनिश्चित करने के लिए विशेष आपात उपबंध हैं। श्रम विभाग ने कहा है कि समय से वेतन भुगतान न होने पर गंभीर औद्योगिक अशांति उत्पन्न होने की आशंका रहती है। नई श्रम संहिताओं में समय से इस संबंध में आपात उपबंध नहीं बनाए गए हैं। श्रम संहिताओं के लागू होने बाद भी इस अधिनियम की आवश्यकता बनी रहेगी।

यूपी श्रम कल्याण निधि अधिनियम-1965

यह अधिनियम संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को ऐसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए बनाया गया है, जो कर्मचारी राज्य बीमा योजना तथा भविष्य निधि योजना के अंतर्गत अनुमन्य नहीं हैं। इसी अधिनियम के तहत यूपी श्रम कल्याण निधि का गठन किया गया है।

इस निधि में श्रमिकों के वेतन का कुछ अंश जमा किया जाता है और उसी के ब्याज से संचालित होती है। राज्य सरकार या सेवायोजक कोई अंशदान नहीं करता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 में भवन निर्माण के कर्मकारों, असंगठित क्षेत्र के कर्मकारों तथा संगठित क्षेत्र के कर्मकारों को कर्मचारी भविष्य निधि एवं कर्मचारी राज्य बीमा योजना का लाभ देने की व्यवस्था है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रावधान इस संहिता में नहीं है। ऐसे में इस अधिनियम को भी बनाए रखा जाना चाहिए।

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