यूपी: कई जिलों में तीसरे दिन भी प्रभावित रही एंबुलेंस सेवा, हड़ताल पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश
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उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 108 एंबुलेंस सेवा लगातार तीसरे दिन मंगलवार को भी प्रभावित रही। जीवीके कंपनी प्रबंधन और हड़ताली कर्मचारियों के बीच समझौते की सूचना कुछ जिलों तक न पहुंचने से वहां के कर्मचारियों ने कॉल ही नहीं रिसीव की। जब इसकी सूचना कंपनी प्रबंधन को मिली तो उन्होंने कर्मचारियों को समझौते की जानकारी दी। इसके बाद कई जिलों में संचालन शुरू हुआ।
वहीं, हड़ताल से एंबुलेंस सेवा ठप होने को शासन ने गंभीरता से लेते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य देवेश चतुर्वेदी ने कहा कि संचालक कंपनी को चेतावनी दी गई है। हड़ताल के दौरान जहां-जहां एंबुलेंस सेवा ठप रही, उसके आकलन के बाद नियमानुसार कंपनी पर पेनाल्टी लगाई जाएगी। अगर दोबारा ऐसा हुआ तो कंपनी पर और कड़ी कार्रवाई होगी।
बता दें, प्रदेश में जीवीके ईएमआरआई कंपनी 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन पूर्वी व पश्चिमी कलस्टर में करती है। सरकार ने टेंडर में कई बाध्यताओं के साथ कंपनी को अप्रैल में जिम्मा सौंपा था। इसमें सेवा प्रदाता के कॉल का जवाब न देने पर पांच हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है। इसी आधार पर कंपनी पर पेनाल्टी लगाने की तैयारी है।
इन जिलों में मंगलवार सुबह तक शुरू नहीं हो पाया एंबुलेंस संचालन
जानकारी के मुताबिक मेरठ, बिजनौर, फतेहपुर, महराजगंज, श्रावस्ती जिलों में मंगलवार सुबह तक एंबुलेंस संचालन शुरू नहीं हो पाया था। जब इन जिलों के कर्मचारियों ने हेड ऑफिस की कॉल नहीं रिसीव की तब इसकी जानकारी मिली। इस पर आनन-फानन में जिला सुपरवाइजरों को उनसे संपर्क करने को कहा गया। इसके बाद एंबुलेंस सेवाएं बहाल हुई।
जीवीके ईएमआरआई कंपनी के मीडिया प्रभारी सुनील यादव ने बताया कि कुछ जिलों के कर्मचारियों को हड़ताल खत्म होने सूचना नहीं मिली थी लेकिन वहां भी सेवाएं शुरू करा दी गई हैं।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने दिया समर्थन
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने 108 और 102 एंबुलेंस संविदा कर्मियों की मांगों का समर्थन किया है। परिषद के महामंत्री अतुल मिश्रा और प्रमुख उपाध्यक्ष सुनील यादव ने कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी शोषण के शिकार हैं इसलिए उनमें रोष बढ़ रहा है। कर्मचारी परिषद ने मांग की है कि जीवीके को श्रम कानूनों का पालन करने के निर्देश दिए जाए।