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आरसंस की पांच एकड़ में बस रही कॉलोनी तोड़ेगा एलडीए
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लखनऊ। गलत जानकारी देकर लोगों को भूखंड बेचने वाली आर संस बिल्डर की प्रखर सिटी-2 में अवैध निर्माण तोड़ने की कार्रवाई एलडीए बुधवार को करेगा। सिद्धपुरा गोसाईगंज में विकसित की जा रही कॉलोनी में भूखंड पहले ही बिल्डर बेच चुका है। वहीं एलडीए की जांच में इस कॉलोनी का विकास बिना किसी स्वीकृत मानचित्र के होते मिला।
एलडीए की विहित प्राधिकारी और संयुक्त सचिव ऋतु सुहास ने बताया कि प्रवर्तन जोन-2 की जांच में करीब पांच एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कालोनी विकसित होते हुए मिली। यहां साइट ऑफिस के अलावा भूखंड विकसित करने के कार्य बिना अनुमति कराए गए हैं। सड़क-नाली का काम पूर्व में बंद करा दिया गया था। कई बार नोटिस के बाद भी बिल्डर आशीष श्रीवास्तव, निदेशक आरसंस की तरफ से कोई जवाब प्रवर्तन कोर्ट में दाखिल नहीं किया गया। दो जुलाई 2019 को तहसीलदार और क्षेत्रीय अभियंताओं ने फिर निरीक्षण किया। यहां प्रखर सिटी-2 के नाम से बोर्ड लगा मिला। अवैध कॉलोनी के निर्माण को तोड़ने का आदेश जांच जुलाई को जारी कर दिया गया।
प्रवर्तन जोन-2 ने कार्रवाई के लिए गोसाईगंज थाने से पुलिस बल की मांग की है। इसी के करीब में अजीत सिंह व अमित सिंह द्वारा विकसित की जा रही छह एकड़ में कॉलोनी के निर्माण भी तोड़े जाने हैं। सिद्धपुरा गोसाईगंज में ही इस कॉलोनी को भी विकसित किया जा रहा है। मौके पर कॉलोनी का कोई बोर्ड लगा हुआ नहीं मिला।
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देव सिटी या फिर प्रखर सिटी-2
आरसंस बिल्डर ने प्रखर सिटी-2 के नाम पर आवंटियों के साथ फ्रॉड किया है। रेरा के सामने आए तथ्यों के मुताबिक, प्रखर सिटी-2 के लिए जो जमीन बिल्डर ने बताई। उसी जमीन पर देव सिटी के नाम से आवेदन रेरा में पंजीकरण के लिए किया गया। रेरा ने जरूरी अनुमति और मानचित्र स्वीकृत न होने पर आवेदन खारिज कर दिया था।
रेरा कर चुका एसआईटी जांच की सिफारिश
बिल्डर कंपनी आरसंस के निदेशक आशीष श्रीवास्तव व अन्य के खिलाफ रेरा के चेयरमैन राजीव कुमार खुद एसआईटी जांच की सिफारिश प्रदेश सरकार से कर चुके हैं। गैंगस्टर एक्ट में पुलिस आशीष श्रीवास्तव को जेल भी भेज चुकी है।
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एलडीए की विहित प्राधिकारी और संयुक्त सचिव ऋतु सुहास ने बताया कि प्रवर्तन जोन-2 की जांच में करीब पांच एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कालोनी विकसित होते हुए मिली। यहां साइट ऑफिस के अलावा भूखंड विकसित करने के कार्य बिना अनुमति कराए गए हैं। सड़क-नाली का काम पूर्व में बंद करा दिया गया था। कई बार नोटिस के बाद भी बिल्डर आशीष श्रीवास्तव, निदेशक आरसंस की तरफ से कोई जवाब प्रवर्तन कोर्ट में दाखिल नहीं किया गया। दो जुलाई 2019 को तहसीलदार और क्षेत्रीय अभियंताओं ने फिर निरीक्षण किया। यहां प्रखर सिटी-2 के नाम से बोर्ड लगा मिला। अवैध कॉलोनी के निर्माण को तोड़ने का आदेश जांच जुलाई को जारी कर दिया गया।
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प्रवर्तन जोन-2 ने कार्रवाई के लिए गोसाईगंज थाने से पुलिस बल की मांग की है। इसी के करीब में अजीत सिंह व अमित सिंह द्वारा विकसित की जा रही छह एकड़ में कॉलोनी के निर्माण भी तोड़े जाने हैं। सिद्धपुरा गोसाईगंज में ही इस कॉलोनी को भी विकसित किया जा रहा है। मौके पर कॉलोनी का कोई बोर्ड लगा हुआ नहीं मिला।
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देव सिटी या फिर प्रखर सिटी-2
आरसंस बिल्डर ने प्रखर सिटी-2 के नाम पर आवंटियों के साथ फ्रॉड किया है। रेरा के सामने आए तथ्यों के मुताबिक, प्रखर सिटी-2 के लिए जो जमीन बिल्डर ने बताई। उसी जमीन पर देव सिटी के नाम से आवेदन रेरा में पंजीकरण के लिए किया गया। रेरा ने जरूरी अनुमति और मानचित्र स्वीकृत न होने पर आवेदन खारिज कर दिया था।
रेरा कर चुका एसआईटी जांच की सिफारिश
बिल्डर कंपनी आरसंस के निदेशक आशीष श्रीवास्तव व अन्य के खिलाफ रेरा के चेयरमैन राजीव कुमार खुद एसआईटी जांच की सिफारिश प्रदेश सरकार से कर चुके हैं। गैंगस्टर एक्ट में पुलिस आशीष श्रीवास्तव को जेल भी भेज चुकी है।