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आयकर छापे में फंसे कई अफसर : अफसरों-ठेकेदारों का भ्रष्टाचार उजागर, उपायुक्त उद्योग का तो बन रहा मॉल

Fri, 02 Sep 2022 10:55 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Fri, 02 Sep 2022 10:55 PM IST
सार

इसी साल चुनाव के दौरान पांच मार्च को लखनऊ के सरोजनीनगर में एक सफेद स्विफ्ट कार से डेढ़ करोड़ रुपये बरामद किए गए थे। इन पैसों को लखनऊ से कानपुर ले जाया जा रहा था, जिसे पुलिस ने सरोजनी नगर में चेकिंग के दौरान पकड़ लिया था।

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Action of Income Tax Department: The nexus of officers and contractors exposed
Income Tax Raid - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भ्रष्टाचार को लेकर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में आयकर विभाग की कार्रवाई में कई अधिकारियों और ठेकेदारों का गठजोड़ उजागर हुआ है। पता चला है कि उपायुक्त उद्योग राजेश सिंह यादव का बुलंदशहर या नोएडा में मॉल बन रहा है। एक ट्रैवल एजेंसी में भी इनकी हिस्सेदारी है। सूत्रों की मानें तो विभाग की यह कार्रवाई लंबी जांच-पड़ताल के बाद की गई है। कुछ बड़े अफसरों की शह पर ठेकेदारों को काम दिला  गए।

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सूत्रों के अनुसार ऐसे में आने वाले दिनों में इसकी जद में कुछ बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं। इससे आला नौकरशाहों में खलबली मची हुई है। आयकर विभाग ने यूपी इंडस्ट्रियल कंसल्टेंट्स लिमिटेड (यूपीकॉन) के निदेशक रहे देवेंद्र पाल सिंह, कानपुर में उद्योग विभाग में तैनात उपायुक्त राजेश यादव, कानपुर के प्रॉपर्टी डीलर राजू चौहान व देशराज के ठिकानों पर बुधवार व बृहस्पतिवार को कार्रवाई की। कहा जा रहा है कि शासन के कुछ बड़े अफसरों ने अपने करीबियों को ठेके  दिलाकर पैसे कमवाए और खुद भी पैसे कमाए। बाद में प्रापर्टी डीलरों के साथ मिलकर जमीनों में पैसों का निवेश भी किया गया।
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चुनाव में लखनऊ में बरामद हुआ था कैश... जांच में खुलती गईं परतें
विधानसभा चुनाव के दौरान लखनऊ के सरोजनीनगर में एक कार से डेढ़ करोड़ रुपये कैश मिला था। पुलिस के अनुसार यह गाड़ी राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के डिप्टी डायरेक्टर डीपी सिंह की थी और पैसा कानपुर ले जाया जा रहा था। आयकर विभाग की जांच में कड़ियां कानपुर के कुछ कारोबारियों व उपायुक्त उद्योग राजेश यादव तक जुड़ती चली गईं। 17 व 18 जून को राजेश, उसके करीबी गोल्डन बास्केट फर्म के संचालक अंचित मगलानी व अन्य के 19 ठिकानों पर छापे में सवा करोड़ से अधिक कैश व दस्तावेज बरामद हुआ। आयकर विभाग ने राजेश का मोबाइल भी जब्त कर लिया था। मोबाइल चैटिंग से कई राज खुले थे। पता चला था कि वह कई अफसरों के साथ मिलकर सरकारी धन का बंटरबांट करने में लगा था। सूत्रों ने बताया कि वह अपनी काली कमाई को मॉल बनवाने में लगा रहा है। इसमें कई साझेदार हैं। ट्रैवल एजेंसी कंपनी में भी इसकी हिस्सेदारी है। दस्तावेजों के आधार पर 31 अगस्त को लखनऊ, कानपुर, दिल्ली व नोएडा में 22 ठिकाने खंगाले और भारी संख्या में दस्तावेज जब्त किए। 
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फर्जी नाम से शिकायतें होती रहीं ताकि परिचितों को ही मिले ऑर्डर
विश्वकर्मा श्रम सम्मान और ओडीओपी की टूल किट खरीद में गड़बड़ी मामले में नाम आने के बाद उपायुक्त उद्योग राजेश यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। महीनों से गायब उपायुक्त उद्योग के निलंबन की संस्तुति शासन को भेज दी गई है। विभाग में आने वाली शिकायतों की जांच कराई जा रही है। पता चला है कि योजनाओं के अलग-अलग अभ्यर्थियों के नाम से फर्जी शिकायतें कराई जा रहीं थी, ताकि इनके परिचितों को खरीद के ही ऑर्डर मिलते रहें। सूत्रों के अनुसार पूर्व सीएम से अच्छे संबंध होने के चलते इनके कामकाज पर कभी किसी ने सवाल नहीं खड़े किए। इसी वजह से लंबे समय से शहर में जमे हैं। 

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