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Lucknow News: ट्रॉमा सेंटर से मरीज को ले जाने के मामले की जांच करेगी दो सदस्यीय समिति
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ट्रॉमा सेंटर।
लखनऊ। केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर से मरीज को सस्ते इलाज का झांसा देकर निजी अस्पताल ले जाने के मामले में दो सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी गई है। शिकायत मिलने पर सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने जांच के आदेश दिए हैं।
बलरामपुर के खैरा निवासी सुनील पाल के अनुसार, उन्होंने 27 दिसंबर को पिता रामभिलाव को जिला अस्पताल से रेफर होकर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां बेड नहीं मिला। इसी दौरान उनके मोबाइल पर निजी अस्पताल में सस्ते इलाज का फोन आया और ट्रॉमा सेंटर गेट पर एंबुलेंस पहुंच गई, जो मरीज को गोमतीनगर स्थित निजी अस्पताल ले गई।
आरोप है कि दलाल ने एक दिन के इलाज का खर्च सात हजार रुपये बताया था, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही कुछ ही देर में 36 हजार रुपये वसूल लिए गए। रुपये खत्म होने और मरीज की हालत में सुधार न होने पर जब डिस्चार्ज की बात की गई तो मरीज को बंधक बना लिया गया। इसके बाद सुनील ने 112 पर कॉल की, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मरीज को मुक्त कराया।
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नर्सिंग होम के नोडल अफसर डॉ. एपी सिंह ने बताया कि शिकायत पर दो सदस्यीय जांच कमेटी बना दी गई है। अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।
मोबाइल नंबर कैसे पहुंचा दलाल तक
मामले में बड़ा सवाल यह है कि दलाल को मरीज का मोबाइल नंबर कैसे मिला। ट्रॉमा सेंटर में परचा बनवाते समय मोबाइल नंबर दर्ज होता है, जो केवल कर्मचारियों के पास होता है। आशंका है कि अंदर से ही मरीजों की जानकारी दलालों तक पहुंचाई जा रही है। यह भी दलालों को पता होता है कि किस मरीज को बेड नहीं मिला। कड़ी जांच होने पर ट्रॉमा सेंटर के कर्मचारियों की मिलीभगत उजागर हो सकती है।
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बलरामपुर के खैरा निवासी सुनील पाल के अनुसार, उन्होंने 27 दिसंबर को पिता रामभिलाव को जिला अस्पताल से रेफर होकर केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां बेड नहीं मिला। इसी दौरान उनके मोबाइल पर निजी अस्पताल में सस्ते इलाज का फोन आया और ट्रॉमा सेंटर गेट पर एंबुलेंस पहुंच गई, जो मरीज को गोमतीनगर स्थित निजी अस्पताल ले गई।
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आरोप है कि दलाल ने एक दिन के इलाज का खर्च सात हजार रुपये बताया था, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही कुछ ही देर में 36 हजार रुपये वसूल लिए गए। रुपये खत्म होने और मरीज की हालत में सुधार न होने पर जब डिस्चार्ज की बात की गई तो मरीज को बंधक बना लिया गया। इसके बाद सुनील ने 112 पर कॉल की, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मरीज को मुक्त कराया।
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नर्सिंग होम के नोडल अफसर डॉ. एपी सिंह ने बताया कि शिकायत पर दो सदस्यीय जांच कमेटी बना दी गई है। अस्पताल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।
मोबाइल नंबर कैसे पहुंचा दलाल तक
मामले में बड़ा सवाल यह है कि दलाल को मरीज का मोबाइल नंबर कैसे मिला। ट्रॉमा सेंटर में परचा बनवाते समय मोबाइल नंबर दर्ज होता है, जो केवल कर्मचारियों के पास होता है। आशंका है कि अंदर से ही मरीजों की जानकारी दलालों तक पहुंचाई जा रही है। यह भी दलालों को पता होता है कि किस मरीज को बेड नहीं मिला। कड़ी जांच होने पर ट्रॉमा सेंटर के कर्मचारियों की मिलीभगत उजागर हो सकती है।