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यूपी: ऐसा नियम बनाया कि तमाम एफपीओ गेंहू क्रय केंद्र खोलने की पात्रता से ही हो गए बाहर

Sat, 05 Jun 2021 07:49 PM IST
ishwar ashish महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 05 Jun 2021 07:49 PM IST
सार

कृषक उत्पादक संगठनों के लिए जारी की गईं नई नीति व शर्तें उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। ये शर्तें इतनी कठोर हैं कि ज्यादातर एफपीओ पात्रता की शर्तें ही नहीं पूरी कर पा रहे हैं।

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A report on FPO by Mahendra Tiwari.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तर प्रदेश में समूह में खेती करने वाले किसानों को गेंहू व धान खरीद में शामिल कर उन्हें प्रोत्साहन देने की पहल एक साल में ही धराशाई हो गई है। पिछली बार धान व गेंहू खरीद करने वाले कई एफपीओ इस बार गेंहू खरीद की पात्रता से बाहर कर दिए गए। कुछ पिछले वर्ष की लालफीताशाही झेलने की वजह से खुद मैदान से हट गए। इससे कृषक उत्पादक संगठनों व उनसे जुड़े किसानों में शासन के प्रति गहरी नाराजगी है।

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प्रदेश में तमाम कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) निजी स्तर पर समूह में जैविक खेती, कृषि उत्पाद तैयार कर उसका कारोबार लंबे अरसे से करते रहे हैं। कई एफपीओ अपने अभिनव प्रयोगों व कार्यों के लिए पुरस्कृत हो चुके हैं। लेकिन, प्रदेश सरकार का एफपीओ को प्रोत्साहन देने पर ठीक से ध्यान तब गया जब केंद्र की मोदी सरकार ने देश में 10 हजार एफपीओ की स्थापना का एलान किया। सरकार ने हर ब्लॉक में कम से कम एक व प्रदेश में 2000 एफपीओ गठन के लक्ष्य के साथ एफपीओ नीति-2020 जारी की।
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पिछले साल जब कोरोना प्रदेश में कहर ढा रहा था तब सरकार ने किसानों के उपज की खरीद किसानों से कराने की अभिनव सोच के साथ एफपीओ को पहले गेंहू व बाद में धान खरीद की जिम्मेदारी सौंप दी। तमाम शर्तों व सीमाओं के बावजूद एफपीओ के काम की आमतौर पर सराहना हुई। समूह के किसानों को एफपीओ के केंद्रों पर सरकारी केंद्रों की तरह जलालत नहीं झेलनी पड़ी। आम किसानों ने भी काफी राहत महसूस की थी।
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पर, इस बार गेंहू खरीद का मौका आया तो पहले तो एफपीओ को नीति से बाहर किया गया। जब एफपीओ ने यह मामला उठाया तो उनके लिए अलग से नीति जारी की गई। इस बार की नीति में इतनी शर्तें व सीमाएं शामिल कर दी गईं कि पूर्व में धान या गेंहू की खरीद कर चुके तमाम एफपीओ केंद्र खोलने की पात्रता से ही बाहर हो गए।

इस तरह नीति के झमेले में उलझकर बाहर हुए किसान

A report on FPO by Mahendra Tiwari.
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

- एफपीओ को केवल मंडी परिसर व उप मंडी परिसर के अंतर्गत क्रय केंद्र खोलने की अनुमति होगी। पिछले वर्ष ऐसी कोई शर्त नहीं थी। इससे किसानों को घर के पास क्रय केंद्र की सहूलियत व अनावश्यक दौड़ धूप से बचाने की पहल खत्म कर दी गई। घर से दूर मंडी परिसर जाकर गेंहू खरीदने को तमाम एफपीओ उचित नहीं मानते।
 
- उन्हीं एफपीओ को गेहूं क्रय केंद्र की अनुमति जिनका पंजीकरण 1 मार्च 2021 को 1 वर्ष पूरा हो तथा न्यूनतम 10 लाख की कार्यशील पूंजी खाते में हो। इस शर्त से ज्यादातर एफपीओ बाहर। वजह, ज्यादातर का रजिस्ट्रेशन पिछले वर्ष केंद्र की घोषणा के बाद हुआ। बिना रजिस्ट्रेशन पूर्व के अनुभव की वजह से गत वर्ष ऐसी शर्त नहीं थोपी गई थी।

- 10 लाख कार्यशील पूंजी वाले एफपीओ केवल उन्हीं सदस्य कृषकों की गेहूं खरीद कर सकेंगे जो उनके संगठन में 1 मार्च 2021 तक शेयरधारक बने होंगे। 50 लाख की कार्यशील पूंजी वाले ही अपने सदस्यों के अतिरिक्त अन्य किसानों से भी गेहूं खरीद सकेंगे। पहले यह शर्त भी नहीं थी।

- एफपीओ प्रति सदस्य/कृषक से अधिकतम 60 कुंतल गेहूं अथवा उनकी खतौनी के अनुसार अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र का उत्पाद खरीद कर सकेंगे। इससे अधिक खेती व उत्पादन करने वाले किसानों को मुश्किल बढ़ गई। उन्हें एफपीओ के साथ दूसरे क्रय केंद्र पर बिक्री के लिए मजबूर होने की नौबत आ गई।

- पिछले वर्ष की नीति में कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) तथा कृषि उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) को साथ-साथ शामिल किया गया था। इस बार नीति में केवल एफपीओ का जिक्र किया गया। इससे पिछले वर्षों में एफपीओ से एफपीसी बनने वाले पात्रता से बाहर हो गए।

- एफपीओ को गेहूं खरीद पर केंद्र सरकार के नियमानुसार सोसाइटी कमीशन व प्रशासनिक खर्च देने का प्रावधान। मगर, नीति में इसका उल्लेख नहीं किया गया कि यह कितने रुपये होगा। इससे पिछले वर्ष गेंहू व धान की खरीद करने वाले ज्यादातर एफपीओ को कमीशन व प्रशासनिक खर्च नहीं मिल पा रहा है। इस वर्ष की नीति में इसका जिक्र तक नहीं है।

जानें, क्या कहते हैं कृषि कंपनियों से जुड़े पदाधिकारी

A report on FPO by Mahendra Tiwari.
अमित वर्मा व महेंद्र प्रताप यादव। - फोटो : amar ujala

रामपुर कृषक उत्पादक कंपनी के चेयरमैन अमित वर्मा का कहना है कि पिछली बार ज्यादातर एफपीओ ने बहुत अच्छा काम किया था। लगता है कि लोगों को गेंहू खरीद में आम एफपीओ के आने से वर्षों पुरानी सरकारी खरीद प्रणाली की अंदरूनी कहानी बाहर आने का खतरा नजर आने लगा था। ऐसे में ऐसी-ऐसी शर्तें जोड़ दी जिससे तमाम एफपीओ बाहर हो गए। पिछली बार करीब एक लाख कुंतल धान खरीदा था। इस बार एक वर्ष पुराने एफपीओ की शर्त रखने से गेंहू क्रय केंद्र खोलने की पात्रता से बाहर हो गए।

ब्रह्म कृषि बायो एनर्जी फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी गोरखपुर के निदेशक महेंद्र प्रताप यादव का कहना है कि पिछले वर्ष 1.05 करोड़ का धान खरीदा। इस बार 50 लाख पूंजी व एक वर्ष पूर्व रजिस्ट्रेशन की शर्त से गेंहू क्रय केंद्र नहीं खोल सके। मंडी में जाकर केंद्र खोलने की शर्त भी बेतुकी है। किसान की सुविधा के लिए किसान के आसपास केंद्र खोलने चाहिए या दूर मंडी में जाकर। लगता है जानबूझकर एफपीओ को इस सिस्टम से बाहर करने के लिए नीति में अनाप-शनाप शर्तें थोपी गई।

सरल हों नियम व शर्तें

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अमित पांडेय व संजीव शुक्ला। - फोटो : amar ujala
श्री अन्नगर्भा बायो एनर्जी फॉर्मर प्रोड्यूसर कंपनी प्रतापगढ़ के निदेशक संजीव शुक्ला का कहना है कि पहली बार करीब 253  कुन्तल गेंहू व 993 कुन्तल धान खरीद चुके हैं। विभाग की कार्यप्रणाली सिस्टम के बाहर के लोगों को दौड़ाने व परेशान करने वाली है। पिछले अनुभव से परेशान होकर इस बार गेंहू क्रय केंद्र खोलने के बारे में सोचा ही नहीं। अभी तक पिछले खरीद का ट्रांसपोर्टेशन व कमीशन नहीं मिला है।

सफल किसान प्रोड्यूसर कंपनी झांसी के निदेशक अमित पांडेय का कहना है कि क्रय केंद्र चलाने के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत जोड़ दी गई। किसानों को समय से भुगतान की जिम्मेदारी एफपीओ पर डाल दी गई जबकि वापसी पैसा मिलने में काफी समय लग जाता है। सरकार यदि एफपीओ को आगे बढ़ाना चाहती है तो कार्यशील पूंजी के लिए सस्ते ब्याज पर अल्पकालिक ऋण दिलाए। नियम व शर्तें सहज व सरल हों। जिला प्रशासन का रुख अच्छा है लेकिन नीतिगत खामियों से एफपीओ परेशान हैं।

खाद्य एवं रसद आयुक्त मनीष चौहान बोले- मुश्किलें संज्ञान में हैं

A report on FPO by Mahendra Tiwari.
खाद्य एवं रसद आयुक्त मनीष चौहान - फोटो : amar ujala

आयुक्त खाद्य एवं रसद मनीष चौहान का कहना है कि रजिस्ट्रेशन की शर्त से मुश्किल की बात संज्ञान में है। इसे आगे हटाने पर विचार किया जाएगा। दूसरा, केवल धान में कमीशन की व्यवस्था है। इसका भुगतान सुनिश्चित कराया जाएगा। रही एफपीओ के पूंजी की समस्या, तो वे क्रय आवंटन पत्र के आधार पर बैंक से ऋण ले सकते हैं। एफपीओ को पिछली वर्ष पहली बार क्रय केंद्र खोलने की अनुमति दी गई थी। कई एफपीओ पूंजी से अधिक खरीद कर लेते थे जिससे भुगतान काफी दिनों तक अटक जाता था। इस बार पूंजी की शर्त इसीलिए जोड़ी गई कि वे जितना खरीदें, उतने का समय से भुगतान कर पाएं। अगली बार एफपीओ का फीडबैक को ध्यान में रखा जाएगा।

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