बाबरी विवाद पर हाशिम बोले, 'हमारे साथ इंसाफ होगा'
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श्रीराम जन्मभूमि/बाबरी मस्जिद विवाद के हल की दिशा में गुरुवार को एक नई पहल हुई है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत ज्ञानदास के हनुमानगढ़ी स्थित आवास पर विवाद से जुड़े दोनों पक्षों के छह पक्षकारों ने सौहार्दपूर्ण हल को कामयाब बनाने की घोषणा की है। लगभग पौन घंटे तक बंद कमरे में दोनों पक्षों के लोग बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब हुए। मामले पर बाबरी मस्जिद के मुद्दई ने कहा कि हमें उम्मीद है कि हमारे साथ न्याय होगा।
हिंदू महासभा के पक्षकार संत सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि विवाद के निराकरण के लिए हमारे साथ दोनों पक्षों के छह पक्षकार आए हैं। हमने प्रस्ताव रखा कि महंत ज्ञानदास की अध्यक्षता में यह मुहिम आगे बढ़े जो इस विवाद में कोई पक्ष नहीं हैं।
उनकी अध्यक्षता में इस अभियान को चलाया जाए और जितने पक्षकार हैं सभी को जोड़कर समझौता हो। कहा कि आपसी सहमति से विवाद के निराकरण के पक्ष में सभी हैं। अगली बैठक पर आगे विचार होगा। साथ ही पूरे देश के लोगों को जोड़ने का भी कार्य किया जाएगा।
हम जानते हैं लेकिन अंतिम फैसले के लिए कोर्ट में जाना पड़ेगा। इसलिए हम लोग सुलह करके अपना एक पक्ष कोर्ट में रखेंगे। स्वामी ने कहा कि इस मुहिम का किसी भी प्रकार से राजनीतिकरण नहीं होने देंगे।
तीसरी बैठक में समझौता हो जाने की उम्मीद
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने कहा कि अब नए सिरे से काम शुरू हुआ है। विवाद से जुड़े दोनों पक्षों के छह पक्षकार मुहिम में साथ आ चुके हैं। यह सभी लोग भी सौहार्दपूर्ण हल चाहते हैं। हम विवाद से जुड़े सभी पक्षों को एक मंच पर ले आएंगे। तीसरी बैठक में समझौता हो जाएगा। अगली बैठक एक-दो दिन में तय की जाएगी।
बाबरी मस्जिद के मुद्दई मोहम्मद हाशिम अंसारी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि इस विवाद को लेकर हमारे साथ इंसाफ होगा। शांति और अमन के साथ होगा। मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने से कोई फायदा नहीं है लेकिन लोग वहां राजनीति की दुकान चलाने के लिए गए हैं।
निर्मोही अखाड़े के वकील रणजीत लाल वर्मा ने कहा कि यह एक प्रयास है। विवाद का सौहार्दपूर्ण हल की संभावना को तलाशा जाए। सभी पक्षों में समझौता हो जाए यह उम्मीद है। कहा कि विवाद के सौहार्दपूर्ण हल के लिए बीच का तरीका निकाला जाए, जो कोर्ट को स्वीकार्य हो।
बैठक में अखिल भारतीय निर्वाणी अनी अखाड़े के श्रीमहंत धर्मदास, वर्ष 2010 में सुलह समझौते की अपील दायर करने वाले रमेशचंद्र त्रिपाठी, पक्षकार मौलाना महफजुर्रहमान के प्रतिनिधि खालिक अहमद, महंत जन्मेजय शरण, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव मौजूद रहे।