एक आदमी ने पांच लोगों को दी जिंदगी, पढ़िए कैसे...
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केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में ब्रेन डेड घोषित सहजनवा गोरखपुर निवासी प्रमोद (35) के परिवारीजन महादानी बन गए। उन्होंने प्रमोद की मौत के झटके से उबरते हुए तीन लोगों को दोबारा जीवनदान दे दिया और दो लोगों की अंधेरी जिंदगी में रोशनी भर दी।
परिवारीजीनों ने उसकी ब्रेन डेथ होने की जानकारी मिलने के बाद लिवर, दो किडनी और दोनों कार्निया जरूरतमंद मरीजों को दान करने की सहमति दे दी। इसके बाद लिवर को दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेस(आईएलबीएस) के मरीज को प्रत्यारोपित किया गया।
इसके साथ ही दोनों किडनी एसजीपीजीआई में भर्ती मरीजों को ट्रांसप्लांट कर दी गई जबकि कार्निया केजीएमयू के आई बैंक को दे दी गई। गोरखपुर निवासी प्रमोद साहनी (35) को सिर की चोट के कारण केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में इलाज के लिए 24 अगस्त की सुबह 4 बजे भर्ती कराया गया था।
ब्रेन डेथ होते ही परिवार ने लिया फैसला
हालत गंभीर होने के कारण वेंटीलेटर यूनिट में उसका इलाज शुरू किया गया। इसके बावजूद प्रमोद की स्थिति गंभीर होती जा रही थी। सिर की चोट भी बहुत गंभीर थी, खून भी काफी बह चुका था। ब्लड प्रेशर तेजी से गिर रहा था।
किसी तरह 24 घंटे बीत गए लेकिन 25 अगस्त की शाम तक उसकी हालत और खराब हो गई। विशेषज्ञों ने जांच के बाद शाम को छह बजे उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इसके बाद आनन-फानन में प्रमोद के परिवारीजनों को उसकी स्थिति के बारे में बताया गया।
काउंसलर पियूष, क्षितिज और अश्वनी सिंह ने उनके पिता और पत्नी को ब्रेन डेथ के बारे में जानकारी दी। उन्हें बताया कि प्रमोद की ब्रेन डेथ हो चुकी है लेकिन इसके बावजूद भी उसके जीवित रहने का अनुभवकर सकते हैं।
इसके लिए उन्हें प्रमोद के अंगों को दान करना होगा, जो किसी दूसरे जरूरतमंद मरीज को प्रत्यारोपित किए जाएंगे। इससे उन मरीजों को नई जिंदगी मिल जाएगी। काउंसलरों के समझाने के बाद प्रमोद की पत्नी, पिता और अन्य परिवारीजनों ने उनके ब्रेन डेथ घोषित होने के बाद लिवर, किडनी और कार्निया दान देने पर सहमति जता दी।
लिवर, दोनों किडनी और कार्निया किया दान
आर्गन ट्रांसप्लांट विभाग के डॉ. विवेक कुमार गुप्ता ने बताया कि खून अधिक बह जाने के कारण प्रमोद का ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा था। इसलिए अंगों के जल्दी खराब होने का खतरा पैदा हो गया था।
परिवारीजनों से अंगदान के लिए सहमति मिलने के बाद उसे सबसे लिवर और किडनी के लिए एसजीपीजीआई से संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने मरीज तैयार न होने की बात कही। इसके बाद दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ बिलयरी साइंसेज (आईएलबीएस) के निदेशक से बात हुई तो वहां प्रमोद के ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव का एक मरीज मिल गया।
डॉ. विवेक कुमार ने बताया कि 25 अगस्त की शाम को छह बजे मरीज को ब्रेन डेथ घोषित किया गया था। एसजीपीजीआई के बाद आईएलबीएस से 6.45 बजे के आसपास बात हुई उन्होंने 15 मिनट के अंदर शाम को 7 बजे प्लेन लखनऊ के लिए रवाना कर दिया।
इसी बीच एसजीपीजीआई ने दोनों किडनी लेने के लिए सहमति जता दी थी। इसलिए 7 बजे ही अंगों को निकालने की सर्जरी भी शुरू कर दी गई। लगभग ढाई घंटे तक चली सर्जरी के बाद प्रमोद के अंगों को निकाल लिया गया।
25 मिनट में एयरपोर्ट पहुंचाया लिवर
लगभग 10 बजे प्रमोद के लिवर को पुलिस स्कॉर्ट में एयरपोर्ट पहुंचा दिया गया। जहां आईएलबीएस का प्लेन पहले से ही तैयार खड़ा था। केजीएमयू से एयरपोर्ट लिवर ले जाने में 25 मिनट का समय लगा।
केजीएमयू के सीनियर रेजीडेंट डॉ. राहुल ने लिवर को प्लेन में मौजूद आईएलबीएस के स्टाफ को सौंप दिया। डॉ. विवेक ने बताया कि लिवर को ब्रेन डेथ मरीज के शरीर से निकालने और ट्रांसप्लांट करने के लिए मात्र 10 घंटे का ही समय होता है।
इसलिए समय का प्रबंधन बहुत जरूरी होता है। लखनऊ से रात को दिल्ली की फ्लाइट न होने के कारण लिवर भेजने का संकट था लेकिन आईएलबीएस ने प्लेन भेजकर इससे निजात दिला दी। उन्होंने बताया कि किडनी एसजीपीजीआई के दो मरीजों को ट्रांसप्लांट कर दी गई है।
डॉ. विवेक ने बताया कि प्रमोद का ब्लड प्रेशर बहुत कम होने कारण अंगों के खराब होने की संभावना पैदा हो गई थी। क्योंकि पहले एसजीपीजीआई ने लिवर और किडनी दोनों लेने से मनाकर दिया। यदि समय पर अंग लिए नहीं जाते तो वो खराब हो जाते। लेकिन बाद में सभी अंग प्रत्यारोपण के लिए मरीज मिलने से प्रमोद की परिवारीजनों का बलिदान बेकार नहीं गया।