फंदे से लटकता मिला लड़की भगाने वाला युवक
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लड़की भगाने के आरोप में पकड़ कर थाने लाए गए युवक का शव गांव के करीब एक बाग में फांसी के फंदे से लटका मिला। उसके पिता ने थाना पुलिस व लड़की के करीबियों पर हत्या करने का आरोप लगाया है। पुलिस का कहना है कि युवक थाने से भाग गया था। जिसके बाद उसने फांसी लगा ली।
खबर पाकर मौके पर सैकड़ों ग्रामीण जमा हो गए। राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी के साथ कई थानों की फोर्स भी आ गई। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
संदना के जहांनपुर गांव निवासी राजेंद्र (27) पुत्र जगदीश पासी क्षेत्र के रालामऊ के पास मोबाइल बनाता था। वह दस अगस्त को एक लड़की को भगा ले गया था। जिसके बाद संदना थाने की पुलिस ने युवक के घरवालों पर दोनों को जल्द पेश करने दबाव डाला।
परिवारीजनों के मुताबिक 14 अगस्त को राजेंद्र व उसके द्वारा भगाई गई लड़की को पुलिस के हवाले कर दिया गया था। जिसके बाद पुलिस ने लड़की को तो पिता के उसके पिता के हवाले कर दिया, लेकिन राजेंद्र को अपनी कस्टडी में रखा था।
इसी बीच बुधवार दोपहर राजेंद्र का शव उसके गांव से करीब दो किलोमीटर दूर चौपडिया गांव में आम के बाग में फंदे से लटका मिला। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
...और घर वालों को मिली राजेंद्र के गायब होने की खबर
इस बीच थाने से पहुंचे सिपाहियों ने घरवालों को राजेंद्र के गायब होने की सूचना दी। घबराए घरवाले सीधे एसपी के पास पहुंचे। यहीं पर उन्हें राजेंद्र की मौत की खबर मिली। उधर, जानकारी होते ही मौके पर क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण जमा हो गए। तनाव को देखते हुए मौके पर कई थानों की फोर्स बुला ली गई। राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी भी आ गए।
पुलिस अधिकारियों ने नाराज लोगों से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। जिसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। राजेंद्र के पिता जगदीश का कहना है कि उसके बेटे को पुलिस ने पांच दिन तक थाने में बैठाए रखा।
बुधवार को पुलिस गांव पहुंची और राजेंद्र के भाग जाने की सूचना दी। जगदीश हत्या का आरोप लगा रहा है। उसका कहना है कि थाने की पुलिस ने लड़की वालों के साथ मिलकर राजेंद्र की हत्या कर दी। उसने थाना पुलिस, रामू पासी, चंदा, भारत व सतीश शुक्ला पर घटना को अंजाम देने का आरोप लगाया है।
मामले पर एसपी राजेश कृष्ण का कहना है कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
संदना पुलिस ने उड़ाया मानवाधिकारों का मखौल
पुलिस कस्टडी में आए दिन होने वाली घटनाओं से पुलिस सबक नहीं ले रही है। संदना पुलिस ने राजेंद्र के मामले में मानवाधिकारों का खुलेआम मखौल उड़ाया।
सीतापुर पुलिस के दामन पर कस्टडी डेथ का दाग एक बार फिर लगा दिया है। बताते हैं कि राजेंद्र 10 अगस्त को एक लड़की को भाग ले गया था। जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा नहीं लिखा, बल्कि दोनों परिवारों से संपर्क कर दोनों को हिरासत में ले लिया।
जेल भेजने के बजाय थाने में रखा
राजेंद्र के परिवारीजनों के मुताबिक उन लोगों ने 14 अगस्त को राजेंद्र को पुलिस के हवाले कर दिया था, लेकिन पुलिस ने उसे थाने में बैठाए रखा। बाद में 17 अगस्त को मुकदमा लिख लिया।
मुकदमा लिखने के बाद भी संदना पुलिस जोड़-तोड़ का दांव चलती रही। लड़की भगाने के मामले में राजेंद्र को जेल भेजने के बजाय उसे आज तक थाने में रखा। नतीजा यह हुआ कि राजेंद्र की मौत हो गई।
एसपी ऑफिस में कार्रवाई न होने तक जमे रहे युवक के परिवारीजन
थाने से राजेंद्र के गायब होने के बाद और उसकी मौत की खबर तक परिवारीजन पुलिस अधीक्षक कार्यालय में जमे रहे। किसी अनहोनी को देखते हुए एसपी ने भारी पुलिस बल बुला लिया।
सीओ सिटी राहुल मिठास, एसएसआई कोतवाली डीके सिंह, क्राइम ब्रांच टीम सहित भारी पुलिस बल पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लगा रहा। यहां एसपी ने मृतक के परिवारीजनों से तहरीर मांगी। तहरीर लिखने में पुलिस का कोई दखल न रहे, इसके लिए राजेंद्र के परिवारीजन ने कार्यालय के बाहर परिसर में जाकर अकेले तहरीर लिखी।
मां-बाप की इकलौती संतान था राजेंद्र
मृतक राजेंद्र के परिवारीजनों के मुताबिक वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। उसके जन्म से ढाई साल बाद उसकी मां की मौत हो गई थी। जिसके चलते राजेंद्र की परवरिश उसकी चाची लल्ली देवी ने की। राजेंद्र की मौत की खबर सुनकर उसकी पत्नी व दो बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल था।