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वर्कशॉप में काम कर रहे रेलकर्मियों पर गिरे 12 टन वजनी चार गर्डर, पांच जख्मी

Mon, 23 Jan 2017 01:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 23 Jan 2017 01:54 AM IST
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A gurder falls down on railway employees in Lucknow.
उत्तर रेलवे की ब्रिज वर्कशॉप - फोटो : amar ujala

चारबाग रेलवे स्टेशन स्थित उत्तर रेलवे की ब्रिज वर्कशॉप में शनिवार रात 12 टन वजनी चार गर्डर काम कर रहे रेलकर्मियों के ऊपर गिर गए। हादसे में टेक्नीशियन समेत पांच कर्मचारी गंभीर रूप से जख्मी हो गए। रेलकर्मियों को इंडोर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही से घायलों को समय पर इलाज नहीं मिल सका।

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ब्रिज वर्कशॉप में पुलों के लिए गर्डर बनाए जाते हैं। शनिवार रात करीब सवा आठ बजे वर्कशॉप में एक के ऊपर एक रखे 40 फीट लंबे चार गर्डर अचानक स्लिप होकर गिर गए।
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इस दौरान नीचे काम कर रहे टेक्नीशियन (वेल्डर) दिलीप गौतम, हेल्पर राहुल महतो, महेंद्र पाल सिंह, मिथुन चक्रवर्ती, कौशल गंभीर रूप से जख्मी हो गए। राहुल के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। पीड़ितों ने बताया कि चार गर्डरों का वजन 12 टन था।
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चूंकि, चार गर्डरों को एक के ऊपर एक लगा दिया गया था, इससे गर्डरों की ऊंचाई करीब दस फीट हो गई थी। पास में क्रेन से एक गर्डर नीचे गिराया गया तो उसके कंपन से ये चार गर्डर धड़धड़ाकर रेलकर्मियों पर गिर गए।

सूचना के बाद आरपीएफ पहुंची और गर्डरों को हटाने का काम शुरू किया। रात पौने नौ बजे रेलकर्मियों को इंडोर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ही नहीं मिले। देर रात रेलकर्मियों को अस्पताल में एडमिट किया गया, जहां रविवार को एनआरएमयू ब्रिज वर्कशॉप के मजदूर नेता शिवशंकर सहित अन्य कर्मचारी रेलकर्मियों का हालचाल लेने अस्पताल पहुंचे।

‘जिक’ से बची रेलकर्मियों की जान

A gurder falls down on railway employees in Lucknow.

12 टन वजनी चारों गर्डरों के गिरने से रेलकर्मियों का दब जाना तय माना जा रहा था। चूंकि, सभी रेलकर्मी जिक (ऐसी गहरी नालीनुमा जगह, जिसके अंदर खड़े होकर गर्डरों का काम होता है।) के करीब थे, इसलिए सभी उसमें लेट गए और गर्डरों के गिरने पर गंभीर हादसे से बच गए। इसके बावजूद राहुल महतो का सिर फट गया। महेंद्र, मिथनु और कौशल के पैर में चोटें आईं, जबकि दिलीप का हाथ टूट गया।

लापरवाही, गर्डरों का लगा दिया अंबार
हादसे की मुख्य वजह लापरवाही बताई जा रही है। दरअसल, ब्रिज वर्कशॉप में 40 से सौ फीट लंबे गर्डर बनाए जाते हैं।

जिन्हें बनाकर अलग-अलग रखा जाना चाहिए, लेकिन जिन गर्डरों के गिरने से हादसा हुआ है, उन्हें एक के ऊपर एक रखा गया। दुख की बात यह है कि उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के आला अधिकारियों को हादसे की जानकारी तक नहीं है।

डॉक्टर बोले संडे है, कल मिलेगा मलहम

A gurder falls down on railway employees in Lucknow.

हेल्पर राहुल महतो के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। रविवार को जब उन्हें दर्द उठा तो डॉक्टर से दवा मांगी। राहुल ने बताया कि डॉक्टर ने मलहम देने के बजाय कहा कि आज संडे है, कल ही मलहम मिलेगा।

इससे उन्हें बगैर दवा के ही लौटना पड़ा। जबकि  टेक्नीशियन दिलीप गौतम ने बताया कि शनिवार रात को भी डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरती थी।

अधिकारियों को नहीं मिली फुर्सत, नाराजी
नॉर्दन रेलवे मजदूर यूनियन (एनआरएमयू) की ब्रिज वर्कशॉप शाखा के अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने बताया कि गत वर्ष फरवरी में 113 नए रेलकर्मियों की भर्ती हुई थी। इन पांचों की भर्ती भी उसी समय हुई थी। जब इन्हें अस्पताल लाया गया तो डॉ. रामनाथ नदारद थे।

इसके बाद जब पहुंचे तो लापरवाही का आलम यह था कि मरीज को देखने के लिए बाहर तक नहीं आए। इसके अतिरिक्त रविवार को भी न तो कोई चिकित्सक और न ही मंडल कार्यालय से कोई रेलवे अधिकारी रेलकर्मियों को देखने पहुंचा।

इस पर ब्रिज वर्कशॉप के डिप्टी चीफ इंजीनियर राकेश कुमार का कहना है कि ब्रिज वर्कशॉप में गर्डरों की हैंडलिंग होती है। गर्डरों को एक जगह से दूसरी जगह रखने के दौरान हादसा हुआ। हालांकि, रेलकर्मी जब बचने के लिए भागे हैं तो उन्हें चोटें लगी हैं, जोकि माइनर इंजरी हैं।

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