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Lucknow News: कबीर की वाणी में सामाजिक सुधार व समरसता की झलक

Thu, 05 Jun 2025 01:57 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 05 Jun 2025 01:57 AM IST
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A glimpse of social reform and harmony in Kabir's words
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पंजाबी अकादमी की ओर से इंदिरा भवन स्थित कार्यालय में बुधवार को गुरमति साहित्य में कबीर की वाणी एवं सामाजिक समरसता विषय पर संगोष्ठी हुई। विद्वानों ने कबीर के साहित्य को समाज सुधार और समरसता का संदेश देने वाला बताया।
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डॉ. दलबीर सिंह ने कहा कि गुरमति साहित्य का मूल उद्देश्य मानवता को एकता, समानता और ईश्वर की भक्ति का संदेश देना है। इस साहित्य का आधार गुरुग्रंथ साहिब है, जिसमें केवल सिख गुरुओं की ही नहीं, बल्कि संतों और भक्त कवियों की वाणियां भी संकलित हैं। उन भक्तों में कबीर की वाणी को विशेष स्थान प्राप्त है। उनकी वाणी न केवल आध्यात्मिक गहराई लिए हुए है, बल्कि सामाजिक सुधार और समरसता की भी स्पष्ट झलक मिलती है। सरदार नरेंद्र सिंह मोंगा ने कहा कि कबीर अपने समकालीन समाज के विभाजन को पाटने वाले आध्यात्मिक गुरु थे। ''ढाई आखर प्रेम का'' पढ़ाकर कबीर ने भारत के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक परिवेश में बहुत बड़ा परिवर्तन लाया।
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त्रिलोक सिंह ने कहा कि कबीर निर्गुण भक्ति के प्रवर्तक माने जाते हैं। उन्होंने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच की भावना का विरोध किया। अजय पांडेय ने कहा कि कबीर की वाणी ने गुरमति साहित्य को सामाजिक दृष्टि से समृद्ध किया है। डॉ. रश्मि शील ने कहा कि कबीर की वाणी ने गुरमति दर्शन को और अधिक लोक उपयोगी और सामाजिक रूप से जागरूक बनाया। अकादमी निदेशक ओम प्रकाश सिंह, अरविंद नारायण मिश्र, मीना सिंह, अंजू सिंह आदि मौजूद रहे।
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