आरक्षण के चलते पुलिस में नहीं हुई भर्ती तो दे दी जान
आरक्षण कोटे के चलते पुलिस में भर्ती हो पाने में नाकाम रही काकोरी के मलहा गांव की सरिता द्विवेदी (21) ने गुरुवार सुबह अपने बाग में फांसी लगाकर जान दे दी।
पुलिस को बाग में ही स्थित कोठरी से पांच पन्ने का सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने पुलिस भर्ती में नाकाम रहने के चलते खुदकुशी करने की बात लिखी है।
यही नहीं उसने अपनी मौत के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। सुसाइड नोट में उसने केंद्र व प्रदेश सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं।
किसान गिरीश द्विवेदी की बेटी सरिता चौक स्थित खुनखुनजी गर्ल्स डिग्री कॉलेज में बीए फाइनल ईयर की छात्रा थी। वह वर्ष 2014 के पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल हुई थी। फिजिकल परीक्षा में उसे 100 में 100 नंबर मिले थे।
जनरल कैटेगरी में हाई रैंक होने के बावजूद आरक्षण कोटे की वजह से वह सिपाही नहीं बन सकी। इसको लेकर वह तनाव में रहती थी।
गुरुवार को पिता गिरीश, भाई मोहित द्विवेदी व मां ऊषा खेतों में काम करने गए थे। सबको खाना पहुंचाने के बाद उसने खुदकुशी कर ली।
ये लिखा ससाइड नोट में
चार दिन बाद 188 से कैसे 288 हो गई रैंकिंग
मम्मी उनसे इतना जरूर पूछना कि जब मेरी मेरिट रिलीज हुई थी तब जनरल लड़कियों की अलग से कोई मेरिट नहीं बनी थी। लेकिन चार दिन बाद कैसे (उसकी रैंकिंग) 188 से 288 हो गई।
कहीं पढ़ाई, कहीं आरक्षण, क्या करें जीकर
पापा मैंने हार नहीं मानी। हमें सामान्य जाति का होने का अभिशाप था। कहीं लंबाई, कहीं पढ़ाई, कहीं आरक्षण, क्या करें जीकर। क्योंकि इससे ज्यादा पढ़ाई या प्रोफेशनल कोर्स हम लोगों की क्षमता से बाहर है।
मामले पर मोहनलालगंज के सीओ राकेश नायक का कहना है कि सरिता के सिपाही भर्ती परीक्षा में अच्छे नंबर आए थे। उसका सलेक्शन क्यों नहीं हुआ, इसकी जांच होगी। सुसाइड नोट से साफ है कि सलेक्शन न होने से वह मानसिक रूप से परेशान थी। पूरे मामले की छानबीन की जा रही है।