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केजीएमयू: ट्रॉमा में 15 घंटे तक तड़पता रहा मासूम, नहीं पहुंचे सीनियर डॉक्टर, मौत

Sat, 06 Jul 2019 10:30 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 06 Jul 2019 10:30 AM IST
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A child died because of unavailability of doctors in trauma center in Lucknow.
इसी बच्चे की हुई मौत। - फोटो : amar ujala

केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान लापरवाही ने एक बच्चे की जान ले ली। मासूम करीब 15 घंटे तक तड़पता रहा, लेकिन सीनियर डॉक्टर उसे देखने नहीं पहुंचे। परिवारीजनों की गुहार को भी अनसुना कर दिया गया।

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चिकित्सा शिक्षा मंत्री कार्यालय से फोन आने के बाद शुक्रवार दोपहर को सीनियर डॉक्टर बच्चे को देखने पहुंची, लेकिन तब तक मासूम की सांसें थम चुकी थीं। परिवारीजनों ने मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री से पूरे मामले की शिकायत की है।
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केजीएमयू में डॉक्टरों की ऐसी लापरवाही के मामले आए दिन सामने आते हैं। एक विभाग में भर्ती होने वाले मरीज को देखने के लिए बार-बार पत्र भेजा जाता है। इसके बाद भी दूसरे विभाग के डॉक्टर मरीज देखने नहीं जाते। इतना ही नहीं जिस विभाग में मरीज भर्ती होता है, उसके सीनियर डॉक्टर भी उसके पास जाने से कतराते हैं।
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जानकारी मुताबिक हरदोई के बृजेश पांडेय के सात माह के बेटे रिषभ की तबीयत खराब हो गई। डॉक्टर के रेफर करने पर परिवारीजन उसे लेकर 27 जून को ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। आरोप है कि पीडियाट्रिक विभाग से ट्रॉमा सेंटर के बीच करीब चार घंटे तक चक्कर लगाते रहे। एनआईसीयू में बेड न होने की बात बताकर निजी अस्पातल ले जाने को कह दिया गया। काफी मशक्कत के बाद बच्चे को पीडियाट्रिक विभाग में भर्ती किया गया।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री के कार्यालय में कार्यरत रिश्तेदार से फोन करवाया

बृजेश के भाई संदीप ने बताया कि पीडियाट्रिक विभाग में जूनियर डॉक्टर ही इलाज करते रहे। कई बार सीनियर डॉक्टर को बुलाने के लिए गुहार लगाई, पर सुनवाई नहीं हुई। चार जुलाई को बच्चे की हालत बिगड़ी तो ट्रॉमा सेंटर की एनआईसीयू यूनिट में भेज दिया गया। यहां भी जूनियर डॉक्टर ही इलाज करते रहे।

संदीप का कहना है कि शुक्रवार पांच जुलाई को उन्होंने चिकित्सा शिक्षा मंत्री के कार्यालय में कार्यरत रिश्तेदार से फोन करवाया। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे सीनियर डॉक्टर बच्चे को देखने गईं। उन्होंने कुछ दवाएं बदलने को कहा, लेकिन जब तक दवाएं दी जाती, बच्चे की मौत हो गई।

खून चढ़ाने की थी तैयारी
संदीप ने बताया कि सीनियर डॉक्टर ने बच्चे को खून चढ़ाने की जरूरत बताई। इस पर वह ब्लड बैंक गए और वहां रक्तदान करने के बाद एक यूनिट खून लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। हालांकि, तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी।

मंत्री से करेंगे मुलाकात

संदीप का कहना है कि पूरे मामले की मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री से शिकायत की है। ट्विटर के जरिये ट्रॉमा सेंटर की अव्यवस्था के बारे में बताया गया है। शनिवार को वह चिकित्सा शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेंगे। बताया कि ट्रॉमा सेंटर की कुछ रिकार्डिंग भी उनके पास है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की हर हाल में जांच कराएंगे।

नहीं मिली कोई शिकायत
ट्रॉमा सेंटर के प्रवक्ता प्रो. संदीप तिवारी ने कहा, वार्ड में रेजीडेंट रहते हैं। संकाय सदस्य राउंड के वक्त मरीज को देखते हैं। बच्चे के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है। शनिवार को पता कराएंगे कि बच्चे को किस तरह की दिक्कत थी और शिकायत किस तरह की है।

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