बुजुर्ग ने ग्रिल में लटक कर लगा ली फांसी, बनियान लिखे सुसाइड नोट से खुला राज
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लखनऊ के अमीनाबाद निवासी 74 वर्षीय शिवकुमार ने बनियान पर सुसाइड नोट लिखकर खुदकुशी कर ली। शनिवार सुबह उनका शव शहीद स्मारक के स्मृति स्थल पर लोहे की ग्रिल से लटका देख अफरातफरी मच गई। सूचना पाकर आई वजीरगंज पुलिस ने शर्ट की जेब से आधार कार्ड मिलने पर परिवारीजनों को सूचना दी। शिवकुमार ने बनियान में लिखे सुसाइड नोट में अपनी मौत का जिम्मेदार छोटे भाई की पत्नी जयश्री को बताया है।
वजीरगंज कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक पंकज कुमार सिंह ने बताया कि शिवकुमार रात को किसी वक्त शहीद स्मारक आए और स्मृति स्थल की लोहे की ग्रिल से नायलॉन की रस्सी का फंदा बनाकर लटक गए। शनिवार सुबह कर्मचारी सियाराम शहीद स्मारक पहुंचा तो शव देखकर उसके होश उड़ गए। उसने चीख-पुकार मचाई तो आसपास लोग एकत्र हो गए। सूचना पाकर पुलिस आ गई।
मृतक के कपड़ों की तलाशी में आधार कार्ड मिला जिससे उसकी पहचान हुई। पुलिस टीम अमीनाबाद के चिकमंडी स्थित शिवकुमार के घर पहुंची और परिवारीजनों को जानकारी दी। इस बीच शिवकुमार की बनियान में जयश्री का नाम लिखा देखकर मौके पर मौजूद लोग चौंक गए। शर्ट हटाकर देखा गया तो पता चला कि शिवकुमार ने बनियान में नीले रंग के पेन से सुसाइड नोट लिखा था।
पूछताछ में पता चला कि जयश्री उसके छोटे भाई की पत्नी है। दोनों के बीच अक्सर झगड़ा होता था। शिवकुमार की पत्नी रामरानी की 16 साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। उनकी कोई संतान नहीं थी। घर के एक हिस्से में छोटा भाई सत्यनारायन, उसकी पत्नी जयश्री व बच्चे रहते हैं तो दूसरे हिस्से में बड़े भाई का बेटा राजेंद्र व उसका परिवार रहता है। सबसे नीचे वाले हिस्से में शिवराम रहते थे।
जयश्री ही उसके खाने-पीने का इंतजाम करती थी। इस बात को लेकर परिवार में कलह भी होती थी। मुहल्ले के लोगों का कहना है कि जयश्री ने कई बार शिवराम के साथ मारपीट भी की। दो महीने पहले भी जयश्री ने उनकी पिटाई की थी। इससे तंग आकर ही शिवराम ने खुदकुशी की है।
रात को टहलने के बहाने घर से निकलकर की खुदकुशी
परिवारीजनों ने बताया कि शिवराम रात का खाना खाने के बाद नियमित रूप से टहलने जाते थे। शुक्रवार रात भी वह टहलने के बहाने घर से निकले और शहीद स्मारक पहुंचकर फांसी लगा ली। शायद उन्हें आशंका थी कि मौत की खबर सुनने के बाद भी परिवार का कोई सदस्य पहचान न करे इसलिए अपना आधार कार्ड साथ ले गए थे।
घर पर था बाइंडिंग का कारखाना, भतीजे को सौंप दिया काम
शिवराम अपने घर पर ही बाइंडिंग का कारखाना चलाते थे। घर से ही वह अच्छा-खासा काम कर लेते थे। उम्र अधिक होने पर वह असहाय हो गए तो सारा काम भतीजे राजेंद्र को सौंप दिया।
बनियान में लिखा था जयश्री की वजह से जान जाएगी
शिवकुमार की बनियान के निचले हिस्से में लिखा था, जयश्री की वजह से जान जाएगी। ऊपर भी जयश्री के नाम से साथ कुछ लिखा है जो अस्पष्ट है। शिवकुमार ने यह खुद लिखा है या किसी और ने उनकी बनियान पर जयश्री का नाम लिख दिया, इसकी जांच की जा रही है।