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अवैध खनन से तालाब बन गया 'मौत' का मैदान!
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Sun, 28 Jul 2013 12:59 PM IST
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बूचड़ी मैदान में मिट्टी का टीला ढहने की घटना यहां लगातार हो रहे अवैध खनन के कारण हुई थी। हाल यह है कि लगातार अवैध खनन के कारण बूचड़ी मैदान के उक्त क्षेत्र में तालाब बन गया है।
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टीला ढहने से पांच मजदूरों के जान गंवाने के मामले की जांच कर रहा सैन्य प्रशासन अब तक यह नहीं बता पा रहा है कि वहां मिट्टी खनन के लिए अनुमति दी गई थी कि नहीं।
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मामले से पल्ला झाड़ रही सेना ने हादसे में बचने वाले रज्जन का बयान लेकर मिट्टी की खोदाई के लिए मजदूरों को यहां लाने वाले ठेकेदार की तलाश शुरू कर दी है।
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पांच मजदूरों की हुई थी मौत
बूचड़ी मैदान स्थित राजीव संधु विहार वैवाहिक आवासीय प्रोजेक्ट विस्तार के पास स्थित सेना की पुरानी चांदमारी रेंज पर मंगलवार को मिट्टी की खोदाई कर रहे अर्जुनगंज के पांच मजदूरों की मिट्टी में दबकर मौत हो गई थी, जबकि एक मजदूर इंद्रजीत को बेहोशी की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
फोटो में देखिए: यूं जिंदा दफ्न हो गईं पांच जिंदगियां
हादसे में मजदूर रज्जन बाल-बाल बच गया था। सेना और पुलिस शुरू से कह रही थी कि सभी पांचों मृतक और उनके दो साथी चांदमारी रेंज की गोलियां रोकने के लिए बनाए गए मिट्टी के टीले से कारतूस बिनने आए थे। इस बीच टीले का एक हिस्सा गिर गया और पांच मजदूरों की मौत हो गई।
जबकि इस रेंज में 14 साल से सेना ने फायरिंग बंद कर रखी थी। पहले तो इस हादसे से पल्ला झाड़ चुकी सेना ने गुपचुप तरीके से खनन की जांच शुरू की है।
मध्य यूपी सब एरिया के क्यू ब्रांच के अधिकारियों ने मौका मुआयना किया तो सभी हैरान रह गए। यहां पीपल के पेड़ के पास बड़े इलाके में काफी मात्रा में खोदाई की गई थी।
हर तरफ खनन
-आवासीय प्रोजेक्ट स्थल के पास जेसीबी से खोदाई कर करीब 40 फीट गहरा गड्ढा बना दिया गया।
-प्रोजेक्ट की चहारदीवारी के बाहर कई सौ मीटर लंबे क्षेत्रफल में दस से 12 फीट खोदाई की गई है।
-पुरानी चांदमारी रेंज के मिट्टी के टीले का एक तरफ का लगभग 50 फीट ऊंचा हिस्सा जेसीबी से खोदा गया है।
इन पर उठे सवाल
एमईएस के प्रोजेक्ट मैनेजर अनिल मेहरोत्रा ने बताया कि यहां चार महीने से खनन बंद है। जबकि जिस टीले के ढहने से पांच मजदूरों की मौत हुई वहां जेसीबी से खोदने के ताजा निशान मिले हैं।
प्रोजेक्ट मैनेजर के मुताबिक राजीव संधु विहार आवासीय प्रोजेक्ट के लिए मिट्टी के खनन की अनुमति ली गई थी। जबकि सेना ने अब तक पुरानी फायरिंग रेंज को निष्प्रयोज्य घोषित नहीं किया है। टीले और उसके आसपास हुए खनन का हिस्सा आवासीय प्रोजेक्ट के बाहर आता है।
चहारदीवारी की सीमा के बाहर खनन की अनुमति किस नियम के अनुसार दी गई इस बारे में कोई बोलने को तैयार नहीं है। सेना और पुलिस के मुताबिक मजदूर चांदमारी रेंज पर कारतूस बिनने गए थे। जबकि यहां 14 साल से फायरिंग ही नहीं हुई है तो ऐसे में इतने साल बाद वहां कितना कारतूस मिल सकता है।