खुशखबरी: मेट्रो का मुंशीपुलिया तक 95 फीसदी काम पूरा, जनवरी से प्रस्तावित है कॉमर्शियल रन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ मेट्रो 23 किमी लंबी एयरपोर्ट से मुंशीपुलिया रेडलाइन पर कॉमर्शियल रन के नजदीक पहुंच चुकी है। अच्छी खबर यह है कि सबसे बाद में बनना शुरू हुए तीसरे सेक्शन केडी सिंह बाबू स्टेडियम से मुंशीपुलिया के बीच भी 95 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। ऐसे में जनवरी में प्रस्तावित कॉमर्शियल रन शुरू करने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
लखनऊ मेट्रो के निदेशक वर्क्स एंड इंफ्रा संजय मिश्रा का कहना है कि केडी सिंह बाबू स्टेडियम से मुंशीपुलिया के बीच 95 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है। यहां 75 फीसदी रूट पर ट्रैक भी बिछ गया है। साथ ही इलेक्ट्रिक लाइन के लिए ट्रैक्शन का काम भी पूरे रूट पर एक साथ चल रहा है। सभी आठ स्टेशनों का स्ट्रक्चर भी तैयार हो गया है। अब केवल इनकी फिनिशिंग और सीढ़ियां बनाने का काम बचा है। कोशिश है कि जल्द से जल्द इसे पूरा किया जाए।
संजय मिश्रा ने कहा, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि इस सेक्शन पर हमने सबसे बड़ी चुनौतियों को पूरा कर लिया है। इनमें गोमती के ऊपर 175 मीटर लंबा बैंलेस्ड कैंटेलीवर स्पेशल स्पान बनाना, करामत कॉलेज के पास रेलवे लाइन के ऊपर होते हुए आईटी कॉलेज फ्लाईओवर के समानांतर काम करते हुए निशातगंज पुल के ऊपर से गुजरना, निर्माणाधीन कुकरैल पुल के सबसे अधिक ऊंचाई 22.50 मीटर ऊपर से यू-गर्डर इंस्टॉल और पॉलीटेक्निक फ्लाईओवर के ऊपर से एलीवेटिड ट्रैक को पूरा करना मुश्किल था।
लखनऊ को मिल चुकीं सभी 20 ट्रेनें
कॉमर्शियल रन के लिए सभी 20 ट्रेनें लखनऊ मेट्रो को दीपावली से पहले ही मिल चुकी हैं। इनका ट्रायल प्राथमिकता सेक्शन पर मेट्रो कर रहा है।
एक साथ होगा पूरा ट्रायल
अधिकारियों का कहना है कि भूमिगत रूट के साथ एलीवेटिड सेक्शन का काम भी पूरा हो रहा है। ऐसे में अब 12.5 किमी में चारबाग से मुंशीपुलिया के बीच मेट्रो रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) का सुरक्षा ट्रायल एक साथ ही किया जाएगा। निर्माण पूरा होते ही इसके लिए शेड्यूल मांग लिया जाएगा।
किसकी, कितनी लंबाई
गोमती नदी स्पान - 175 मीटर
नेताजी सुभाष पार्क स्पान - 45 मीटर
करामत कालेज, निशातगंज स्पान - 60 मीटर
फैक्ट फाइल : केडी सिंह स्टेेडियम से मुंशीपुलिया
- 21 छोटे बड़े स्पान बनाए
- 541 पिलर्स बनाए गए
- 2121 पाइल का निर्माण हुआ
- 262 पीयर कैप बनाए गए
- 39 कैंटेलीवर पीयर कैप बने