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मरी माता पूरी करतीं श्रद्धालुओं की मुराद
Updated Sun, 18 Mar 2018 10:03 PM IST
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बहराइच। बहराइच-लखनऊ राजमार्ग के पास सरयू तट पर स्थित मां मरी माता का मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था का केंद्र है। शारदीय नवरात्र में मंदिर में पूजन-अर्चन के लिए ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। सोमवार और शुक्रवार को भी मंदिर में पूजा के लिए भीड़ उमड़ती है।
मान्यता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में माथा टेकने पर मुराद जरूर पूरी होती है। सरयू तट पर मरी माता का भव्य मंदिर है। मंदिर का निर्माण नया है लेकिन मरी माता स्थल की मान्यता काफी पुरानी है। बुजुर्ग बताते हैं कि सरयू तट से लखनऊ-बहराइच मुख्य मार्ग को जाने वाले रास्ते पर छह दशक पूर्व काफी घना जंगल था। यहीं पर दो साधु आकर रुके थे।
साधुओं ने नीम के पेड़ के नीचे विश्राम किया। रात में उन्हें पेड़ की जड़ के पास मां दुर्गा की पिंडी मिट्टी में दबे होने का स्वप्न आया। साधुओं ने आसपास के गांव के लोगों को बुलवाकर मिट्टी हटर्वाई। मिट्टी के हटते ही अति प्राचीन पिंडी मिली। साफ-सफाई कर नीम के तले पिंडी की स्थापना कर पूजा-अर्चना शुरू की गई।
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आसपास के लोग भी धीरे-धीरे पिंडी स्थल पर पहुंचने लगे। भक्तों की मन्नत भी पूरी हुई। इसके कारण नवरात्र महोत्सव में यहां पर मेला लगने लगा। जिनकी प्रार्थना पूरी हुई, उनके सहयोग से मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। धीरे-धीरे मंदिर ने भव्य रूप लिया। श्रद्धालुओं की ओर से प्रत्येक सप्ताह के सोमवार और शुक्रवार को मंदिर परिसर में मेले का आयोजन होता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर भी मेला लगता है। नवरात्र में मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। 24 घंटे पूजन अर्चन का सिलसिला चलता है। मंदिर को भव्यता देने में जिले में तैनात रहे एक नगर मजिस्ट्रेट का विशेष सहयोग रहा। दशमी के दिन हवन-पूजन आदि कार्यक्रम होते हैं। मुंडन, यज्ञोपवीत आदि संस्कार भी लोग करवाने के लिए आते हैं।
नेपाल व पड़ोसी जिलों से भी आते हैं श्रद्धालु
मंदिर के महंत रामफेरे व रामदीन समेत चार पुजारी छह दशक से मंदिर की पूजा कर रहे हैं। पुजारी रामफेरे का कहना है कि मंदिर तक जाने के लिए पहले रास्ता नहीं था। इसके बाद भी श्रद्धालु की भीड़ कम नहीं रहती थी। मां के पास आने वाले सभी भक्तों की प्रार्थना को मां स्वीकार करती हैं।
मंदिर में पूजन-अर्चन के साथ हिंदू धर्म के विभिन्न संस्कार होते हैं। मंदिर में चार पुजारी हैं। इनमें केशव व आशाराम भी शामिल हैं। मरी मैय्या की पूजा और आशीर्वाद लेने के लिए नेपाल के साथ ही लखीमपुर, सीतापुर, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर जिलों से भी काफी संख्या में भक्त आते हैं।
मंदिर की है मान्यता
गांव निवासी राम कुंवारे का कहना है कि मंदिर में पूजा अर्चना करने से सभी मन्नतें पूरी होती हैं। रामरूप व पंडा यादव ने कहा कि मंदिर में नवरात्र पर हवन पूजन करने के साथ ही पूरे नवरात्र लोग बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराते हैं। मान्यता है कि इससे बच्चों का जीवन सुखमय होता है। रामसंवारे ने बताया कि मान्यता है कि मंदिर में पूजा अर्चना करने वालों को गंभीर रोगों से भी मुक्ति मिलती है।
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मान्यता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में माथा टेकने पर मुराद जरूर पूरी होती है। सरयू तट पर मरी माता का भव्य मंदिर है। मंदिर का निर्माण नया है लेकिन मरी माता स्थल की मान्यता काफी पुरानी है। बुजुर्ग बताते हैं कि सरयू तट से लखनऊ-बहराइच मुख्य मार्ग को जाने वाले रास्ते पर छह दशक पूर्व काफी घना जंगल था। यहीं पर दो साधु आकर रुके थे।
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साधुओं ने नीम के पेड़ के नीचे विश्राम किया। रात में उन्हें पेड़ की जड़ के पास मां दुर्गा की पिंडी मिट्टी में दबे होने का स्वप्न आया। साधुओं ने आसपास के गांव के लोगों को बुलवाकर मिट्टी हटर्वाई। मिट्टी के हटते ही अति प्राचीन पिंडी मिली। साफ-सफाई कर नीम के तले पिंडी की स्थापना कर पूजा-अर्चना शुरू की गई।
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आसपास के लोग भी धीरे-धीरे पिंडी स्थल पर पहुंचने लगे। भक्तों की मन्नत भी पूरी हुई। इसके कारण नवरात्र महोत्सव में यहां पर मेला लगने लगा। जिनकी प्रार्थना पूरी हुई, उनके सहयोग से मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। धीरे-धीरे मंदिर ने भव्य रूप लिया। श्रद्धालुओं की ओर से प्रत्येक सप्ताह के सोमवार और शुक्रवार को मंदिर परिसर में मेले का आयोजन होता है।
कार्तिक पूर्णिमा पर भी मेला लगता है। नवरात्र में मंदिर में काफी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। 24 घंटे पूजन अर्चन का सिलसिला चलता है। मंदिर को भव्यता देने में जिले में तैनात रहे एक नगर मजिस्ट्रेट का विशेष सहयोग रहा। दशमी के दिन हवन-पूजन आदि कार्यक्रम होते हैं। मुंडन, यज्ञोपवीत आदि संस्कार भी लोग करवाने के लिए आते हैं।
नेपाल व पड़ोसी जिलों से भी आते हैं श्रद्धालु
मंदिर के महंत रामफेरे व रामदीन समेत चार पुजारी छह दशक से मंदिर की पूजा कर रहे हैं। पुजारी रामफेरे का कहना है कि मंदिर तक जाने के लिए पहले रास्ता नहीं था। इसके बाद भी श्रद्धालु की भीड़ कम नहीं रहती थी। मां के पास आने वाले सभी भक्तों की प्रार्थना को मां स्वीकार करती हैं।
मंदिर में पूजन-अर्चन के साथ हिंदू धर्म के विभिन्न संस्कार होते हैं। मंदिर में चार पुजारी हैं। इनमें केशव व आशाराम भी शामिल हैं। मरी मैय्या की पूजा और आशीर्वाद लेने के लिए नेपाल के साथ ही लखीमपुर, सीतापुर, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर जिलों से भी काफी संख्या में भक्त आते हैं।
मंदिर की है मान्यता
गांव निवासी राम कुंवारे का कहना है कि मंदिर में पूजा अर्चना करने से सभी मन्नतें पूरी होती हैं। रामरूप व पंडा यादव ने कहा कि मंदिर में नवरात्र पर हवन पूजन करने के साथ ही पूरे नवरात्र लोग बच्चों का मुंडन संस्कार भी कराते हैं। मान्यता है कि इससे बच्चों का जीवन सुखमय होता है। रामसंवारे ने बताया कि मान्यता है कि मंदिर में पूजा अर्चना करने वालों को गंभीर रोगों से भी मुक्ति मिलती है।