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415 लोग नहीं नहीं लड़ सकेंगे चुनाव
Updated Wed, 27 Dec 2017 11:50 PM IST
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बाराबंकी। सहकारिता चुनाव के नए नियमों ने लगभग सवा चार सौ दिग्गजों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस बार नियम में संशोधन कर जहां दो बार से लगातार सदस्य चुने जाने वालों पर इस बार रोक लगा दी गई, वहीं महिलाओं को पहली बार चुनाव में आरक्षण दिया गया। जनवरी में प्रस्तावित चुनाव से नियम में हुए बदलाव के बाद चुनाव से वंचित रहने वाले लोग अपनी पत्नियों को मैदान में उतारने की जुगत में लगे हुए हैं।
जिले में कुल 267 समितियां थीं, जिनमें से धीरे-धीरे 128 समितियां निष्क्रिय हो गईं। मौजूदा समय में सहकारिता का चुनाव 139 समितियों पर कराया जाएगा। प्रत्येक समिति पर जनवरी में प्रस्तावित चुनाव में 1251 सदस्यों को चुना जाना है। इस बार सहकारिता चुनाव के नियमों को संशोधित कर नए नियम लागू किए गए हैं, जिसके चलते जिले में करीब 415 सदस्य चुनाव से बाहर होंगे। इसके साथ जिनका लेनदेन बाकी है, वह सिर्फ वोट डाल पाएंगे और चुनाव पर उनके प्रतिबंध लगा दिया गया है। नए नियमों के लागू होने के बाद चुनाव लड़ने वाले ऐसे लोग जिनकी पत्नी व माता के नाम जमीन है, उनकी सदस्यता समितियों में कराने व चुनाव लड़ाने की जुगत में लग गए हैं। किस समिति पर कौन सा सदस्य कितनी बार से पदाधिकारी रहा है, इसका कोई आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। एआर कोऑपरेटिव मित्रसेन वर्मा ने कहा कि 139 सहकारी समितियों पर चुनाव कराया जाना है। जिनमें तीन समितियां खादी ग्रामोद्योग की हैं। नियमों में जो संशोधन हुआ है, उसी के आधार पर कार्य शुरू कर दिया गया है। चुनाव की डेट अभी निश्चित नहीं हुई है। जनवरी में प्रस्तावित है। शासन से जो भी आदेश मिलेंगे, उसका पालन कराया जाएगा।
नियमों में यह हुए बदलाव
समितियों पर चुनाव लड़ने के लिए 120 दिन की सदस्यता को घटाकर 45 दिन कर दिया गया है। सदस्यों की लेनदेन की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया। वहीं प्रत्येक समितियों पर दो महिला सदस्य बनाए जाने का आरक्षण किया गया है। दो बार लगातार सदस्य रहने वाले किसान के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई है, उन्हें सिर्फ मतदाता सूची में रखा जाएगा। इसके अलावा समितियों पर लेनदेन बाकी होने वाले को चुनाव लड़ने से वंचित रहना पड़ेगा
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नए लोगों को मिलेगा मौका
प्रदेश सरकार द्वारा सहकारी आंदोलन के तहत विभिन्न सहकारी संस्थाओं के लोक तांत्रिक स्वरूप को स्थापित करने और सहकारी सदस्यों की भूमिका को सकारात्मक बनाने के लिए नियमावली में संशोधन किया गया है। जिससे नए लोगों को मौका मिलेगा और समितियों का अस्तित्व बढ़ेगा। खास बात यह है कि महिलाओं का आरक्षण करने से महिला कृषकों को नया आयाम मिलेगा। या यूं कहे कि सहकारी आंदोलन को मजबूत करने की दिशा में बेहतर कार्य हुआ है।
- धीरेंद्र कुमार वर्मा, चेयरमैन कोआपरेटिव बैंक
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जिले में कुल 267 समितियां थीं, जिनमें से धीरे-धीरे 128 समितियां निष्क्रिय हो गईं। मौजूदा समय में सहकारिता का चुनाव 139 समितियों पर कराया जाएगा। प्रत्येक समिति पर जनवरी में प्रस्तावित चुनाव में 1251 सदस्यों को चुना जाना है। इस बार सहकारिता चुनाव के नियमों को संशोधित कर नए नियम लागू किए गए हैं, जिसके चलते जिले में करीब 415 सदस्य चुनाव से बाहर होंगे। इसके साथ जिनका लेनदेन बाकी है, वह सिर्फ वोट डाल पाएंगे और चुनाव पर उनके प्रतिबंध लगा दिया गया है। नए नियमों के लागू होने के बाद चुनाव लड़ने वाले ऐसे लोग जिनकी पत्नी व माता के नाम जमीन है, उनकी सदस्यता समितियों में कराने व चुनाव लड़ाने की जुगत में लग गए हैं। किस समिति पर कौन सा सदस्य कितनी बार से पदाधिकारी रहा है, इसका कोई आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। एआर कोऑपरेटिव मित्रसेन वर्मा ने कहा कि 139 सहकारी समितियों पर चुनाव कराया जाना है। जिनमें तीन समितियां खादी ग्रामोद्योग की हैं। नियमों में जो संशोधन हुआ है, उसी के आधार पर कार्य शुरू कर दिया गया है। चुनाव की डेट अभी निश्चित नहीं हुई है। जनवरी में प्रस्तावित है। शासन से जो भी आदेश मिलेंगे, उसका पालन कराया जाएगा।
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नियमों में यह हुए बदलाव
समितियों पर चुनाव लड़ने के लिए 120 दिन की सदस्यता को घटाकर 45 दिन कर दिया गया है। सदस्यों की लेनदेन की अनिवार्यता को भी समाप्त कर दिया गया। वहीं प्रत्येक समितियों पर दो महिला सदस्य बनाए जाने का आरक्षण किया गया है। दो बार लगातार सदस्य रहने वाले किसान के चुनाव लड़ने पर रोक लगाई गई है, उन्हें सिर्फ मतदाता सूची में रखा जाएगा। इसके अलावा समितियों पर लेनदेन बाकी होने वाले को चुनाव लड़ने से वंचित रहना पड़ेगा
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नए लोगों को मिलेगा मौका
प्रदेश सरकार द्वारा सहकारी आंदोलन के तहत विभिन्न सहकारी संस्थाओं के लोक तांत्रिक स्वरूप को स्थापित करने और सहकारी सदस्यों की भूमिका को सकारात्मक बनाने के लिए नियमावली में संशोधन किया गया है। जिससे नए लोगों को मौका मिलेगा और समितियों का अस्तित्व बढ़ेगा। खास बात यह है कि महिलाओं का आरक्षण करने से महिला कृषकों को नया आयाम मिलेगा। या यूं कहे कि सहकारी आंदोलन को मजबूत करने की दिशा में बेहतर कार्य हुआ है।
- धीरेंद्र कुमार वर्मा, चेयरमैन कोआपरेटिव बैंक