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400 गांवों में भरा पानी, पेयजल का संकट

Mon, 14 Aug 2017 11:16 PM IST
Updated Mon, 14 Aug 2017 11:16 PM IST
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400 गांवों में भरा पानी, पेयजल का संकट
रेउसा (सीतापुर)। गांजरी क्षेत्र में घाघरा व शारदा नदी कहर बरपा रही है। बारिश और बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी से घाघरा उफान पर है।
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रेउसा से रामपुर मथुरा क्षेत्र तक हाहाकार मचा हुआ है। करीब 400 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। यहां पांच फीट तक पानी भरा होने से हैंडपंप डूब गए हैं। अब पेयजल का संकट गहराता जा रहा है।

झोपड़ियों में पानी घुसने से लोग मचान बनाकर रह रहे हैं। सोमवार को बैराजों से पौने चार लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।

कोनी, दुर्गा पुरवा, मरेली, जैतहिया आदि गांवों के बाशिंदों का कहना है कि रविवार रात से जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। गांवों में पांच फीट तक पानी भर गया है।
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झोपड़िया पानी के तेज बहाव में बह रही हैं। सबसे दयनीय हालत पशुओं की है, जिनको बाढ़ के पानी से बाहर निकालना भी मुश्किल है। पूरे क्षेत्र में सारे संपर्क मार्ग जलमग्न हो चुके हैं।
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बाढ़ का पानी रेउसा कस्बे से महज एक किलोमीटर दूरी पर है। रामपुर मथुरा क्षेत्र में पंडित पुरवा, मिश्रन पुरवा, बालेसरपुरवा, अंगरौरा, कनरखी आदि सात गांव बाढ़ की चपेट में हैं।

अब इन गांवों में भी जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। गांव के लोग सामान बटोर कर बंधे का रुख कर रहे हैं। उधर लहरपुर क्षेत्र में शारदा नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जहां सोंसरी गांव के करीब नदी उफान पर है।

वहीं रतौली गांव के निकट नदी कटान कर रही है। कई बीघा खेत भी बाढ़ में कट गए हैं। उधर शारदा, घाघरा व बनबसा बैराजों सोमवार को 3 लाख 75 हजार 533 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।

झोपड़ी में मचान बनाकर रह रहे लोग
बाढ़ का जलस्तर इस कदर बढ़ रहा है कि लोगों को झोपड़ी में मचान का सहारा लेना पड़ रहा है। अधिकांश परिवारों ने बाढ़ के पानी में ही छोटे-छोटे मचान बनाकर उस पर झोपड़ी डाल रखी है।


उन्हीं मचानों पर परिवारों को बिठाकर सुरक्षित कर रखा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पूरे इलाके में सूखी जमीन तलाशे नहीं मिल रही है।

नावों पर चल रही जिंदगी
बाढ़ग्रस्त इलाके में नाव सबसे बड़ा सहारा बनकर सामने आई हैं। जिन लोगों के पास नावें हैं, उन्होंने नाव को ही अपना आशियाना बना लिया है।

एक नाव पर पशुओं को बिठा रखा है, तो दूसरी नाव पर गृहस्थी का सामान समेट रखा है। किसी ने नाव पर ईंधन वाला चूल्हा रखा है, तो किसी ने गैस सिलेंडर वाला चूल्हा लगा रखा है। कुल मिलाकर पूरे क्षेत्र में जिंदगी नाव पर चल रही है।

बच्चे बीमार, फैल रहा संक्रमण
बाढ़ से संक्रामक रोग तेजी से पांव पसार रहे हैं। नगीना पुरवा में महक, शिवानी आदि दस से अधिक बच्चे खसरे की चपेट में है।

गार्गी पुरवा, पासिनपुरवा, लोधन पुरवा आदि गांवों में सैकड़ों बच्चे बीमार हैं। अधिकतर खसरे की चपेट में है, जबकि कई बुखार की चपेट में आ गए हैं।
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