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Lucknow News: प्राइमरी पाठशाला में 75 वर्ष के 'बच्चे' कर रहे पढ़ाई

Thu, 24 Jul 2025 01:49 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 24 Jul 2025 01:49 AM IST
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75 year old 'children' are studying in primary school
संस्कृत विश्वविद्यालय की कार्यशाला में पढ़ाई करते सेवानिवृत्त अधिकारी।
लखनऊ। आम तौर पर किसी स्कूल या शिक्षण संस्थान की प्राइमरी पाठशाला में छोटे बच्चों की मौजूदगी रहती है, लेकिन केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में 75 वर्ष की उम्र तक के बुजुर्ग भी ज्ञान ले रहे हैं।
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यहां पालि व्याकरण पर चल रही कार्यशाला में प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी रोजाना सुबह 10 से शाम 4:30 बजे तक जुट रहे हैं। इनका उद्देश्य पालि साहित्य के व्याकरण में निपुण होना है।
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बौद्ध दर्शन व पालि अध्ययन एवं अनुसंधान केंद्र के विभागीय प्रोफेसर डॉ. प्रफुल्ल गड़पाल ने बताया कि व्यावहारिक पालि व्याकरण पर बुधवार तक चली कार्यशाला में परास्नातक के विद्यार्थी शामिल हुए। खास बात यह रही कि 70 छात्रों में से 40 के करीब सेवानिवृत्त अधिकारी थे, जिनकी उम्र 60 से 75 वर्ष के बीच रही। उन्होंने बताया कि पालि व्याकरण की प्राथमिक कक्षा है। हर शब्द को कक्षा में जोर-जोर से दोहराने के लिए कहा जाता है।
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नया पढ़ने-सीखने में उम्र बाधा नहीं

कुछ नया पढ़ने और सीखने में उम्र बाधा नहीं होती है। मैं शुरू से तथागत बुद्ध के दर्शन व सिद्धांतों से प्रभावित था। पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद विपसना साधना शिविर में गया। इससे पालि भाषा को सीखने की जिज्ञासा पैदा हुई। अब एमए भी करना चाहता हूं।


- आरपी गौतम, 62 वर्ष, सेवानिवृत्त आईपीएस अफसर



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बुद्धवाणी को मूल स्वरूप में समझना है

यह कार्यशाला इसलिए की, ताकि बुद्धवाणी को मूल स्वरूप में समझ सकूं। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में डॉ. प्रफुल्ल की ओर से पालि को बहुत ही सरल और सहज ढंग से पढ़ाया गया।

- समय सिंह, 61 वर्ष, आरडीएसओ से सेवानिवृत्त इंजीनियर





सरकारी स्कूलों में हो पालि की पढ़ाई

यहां सीखते हुए कोई बोझ नहीं महसूस हआ। सरकार को भी स्कूलों में पालि विषय की पढ़ाई शुरू करनी चाहिए। विश्वविद्यालयों में इसके नए विभाग खोले जाने चाहिए।

- डॉ. निर्मल गुप्ता, 75 वर्ष, एसजीपीजीआई सर्जन विभाग के पूर्व एचओडी
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