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किसानों का सवा करोड़ दबाए बैठीं चीनी मिलें

Sun, 11 Feb 2018 10:00 PM IST
Updated Sun, 11 Feb 2018 10:00 PM IST
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किसानों का सवा करोड़ दबाए बैठीं चीनी मिलें
श्रावस्ती। जिले में गन्ने की खेती से किसानों का मोह भंग हो रहा है। इसका कारण जिले में एक भी चीनी मिल का न होना तथा दूसरे जिले की मिलों की ओर से किसानों को समय से फसल का भुगतान नहीं किया जाना है। बलरामपुर और बहराइच की दो चीनी मिलों पर गन्ना किसानों का करीब सवा करोड़ रुपया बकाया है। वहीं दूसरी ओर किसानों को समय से पर्ची न मिलने व अन्य कारणों से अभी भी 45 प्रतिशत फसल खेतों में खड़ी है। इसे बेचने के लिए किसान भटक रहा है।
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जिले में किसानों की ओर से करीब 6800 हेक्टेअर भूमि में गन्ने की खेती की जा रही है। जिले में एक भी चीनी मिल नहीं होने के कारण किसानों को अपनी फसल बलरामपुर, तुलसीपुर व इटईमैदा सहित बहराइच की चिल्वरिया चीनी मिल में बेचनी पड़ती है। बलरामपुर व तुलसीपुर चीनी मिलों की ओर से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान समय से किया जा रहा है। इन मिलों पर किसानों का पैसा भुगतान हो चुका है। वहीं बलरामपुर के इटईमैदा व बहराइच के चिल्वरिया चीनी मिलों की ओर से किसानों को गन्ना मूल्य देने में हीला हवाली की जा रही है। इसके चलते इन दोनों चीनी मिलों पर जिले के गन्ना किसानों का करीब एक करोड़ 24 लाख चार हजार रुपये बकाया है। इसे पाने के लिए किसान परेशान हैं। इसके बावजूद मिलों की ओर से समय से भुगतान न दिए जाने के कारण किसानों का गन्ने की खेती से मोह भंग हो रहा है। जिला गन्ना अधिकारी राम किशुन ने कहा कि शत प्रतिशत किसानों का गन्ना खरीदने के बाद ही मिलों का संचालन बंद होगा। फिलहाल लगभग सभी चीनी मिले मार्च तक संचालित होंगी। रही बात गन्ना मूल्य भुगतान की तो चिल्वरिया व इटईमैदा मिल पर किसानों का पैसा बाकी है। जिसका भुगतान कराने के लिए कहा गया है।
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अभी खेत में लगा 45 फीसदी गन्ना
जिले के किसानों का गन्ना मिलों की ओर से 19 नवंबर से खरीदा जा रहा है। कुछ चीनी मिले 19 तो कुछ 22 नवंबर से गन्ने की पेराई कर रही है। इसके बावजूद जिले में करीब 45 प्रतिशत गन्ना अभी खेत में ही लगा हुआ है। इसे बेचने के लिए किसान परेशान हैं। इसके बावजूद किसानों को समय से न तो पर्ची मिल रही है और न ही उनके गन्ने की खरीद ही की जा रही है। इसके चलते किसान गन्ने की खेती से किनारा करने का मन बना रहे हैं।
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