69 हजार शिक्षक भर्ती : दोनों पक्षों को सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद, अब 23 सितंबर को होगी सुनवाई
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि 13 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में फैसला सुनाया है, लेकिन सरकार की हीलाहवाली से यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
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69000 शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई और 23 सितंबर को होने वाली सुनवाई से आरक्षित व अनारक्षित दोनों वर्ग के अभ्यर्थियों को न्याय की उम्मीद है। हालांकि, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय आने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है। वे मंगलवार से फिर आंदोलन की शुरुआत करेंगे।
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा कि 13 अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में फैसला सुनाया है, लेकिन सरकार की हीलाहवाली से यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। आरक्षण नियमों के पालन की लड़ाई हम जारी रखेंगे। कहा, हमें सुप्रीम कोर्ट से न्याय की पूरी उम्मीद है।
उधर, चयनित अभ्यर्थी प्रत्यूष चंद्र मिश्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे हक में आया है। हाईकोर्ट में हम पार्टी नहीं थे जिसका फायदा आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को मिला। बार-बार कोर्ट को राज्यस्तरीय मेरिट बताकर गुमराह किया गया। हमने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि यह भर्ती जिला स्तरीय है। हमारा नियोक्ता बीएसए है और आरक्षण भी जिला स्तरीय है। 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हमारे पक्ष में निर्णय होगा।
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